Viral Post: समय के साथ बदलते दौर में आजकल लोगों में ऑनलाइन फूड मंगाकर खाने का चलन तेजी से बढ़ा है। आमतौर पर ऑनलाइन ऑर्डर किए जाने वाले खाने में किसी न किसी ख़ामी के वीडियो लोग शेयर करते रहते हैं मगर इस बार कीमतों में अंतर का मामला सामने आया है। एक महिला द्वारा रेस्तरां के बिल और Zomato पर ली जाने वाली कीमत में बेहद अंतर पाया गया। इसके बाद उसने फूड डिलीवरी की कीमतों को लेकर एक नई बहस छेड़ दी। उसकी पोस्ट ने ऑनलाइन सुविधा और प्लेटफ़ॉर्म की आर्थिक कार्यप्रणाली पर चर्चा शुरू कर दी है। उन्होंने X पर अपने रेस्टोरेंट बिल की एक तस्वीर साझा की। उन्होंने Zomato ऐप का एक स्क्रीनशॉट भी साझा किया जिसमें वही ऑर्डर काफी अधिक कीमत पर दिखाया गया है।
एक्स पर पोस्ट को @NalinisKitche नामक हैंडल से शेयर किया गया है। पोस्ट में लिखा है कि, 'प्रिय ज़ोमैटो, मेरे ऑर्डर की वास्तविक कीमत 320 रुपये है, लेकिन ज़ोमैटो पर यह 655 रुपये है। छूट लागू करने के बाद भी मुझे 550 रुपये ही देने पड़ रहे हैं। यह कीमत का अंतर सरासर अन्यायपूर्ण है। ग्राहकों से खुलेआम अधिक शुल्क लिया जा रहा है।' यह पोस्ट सोशल मीडिया पर जल्द ही चर्चा का विषय बन गई और यूजर्स ने इस पर अलग-अलग प्रतिक्रिया दी। कुछ ने उनकी निराशा का समर्थन किया, जबकि अन्य ने तर्क दिया कि यह आधुनिक सुविधाओं की कीमत है।
कंपनी ने दी प्रतिक्रिया
Zomato ने जल्द ही नलिनी की पोस्ट के जवाब दिया जिसमें उसने मूल्य निर्धारण में अंतर से खुद को अलग करते हुए इसकी जिम्मेदारी रेस्तरां पर डाली। कंपनी ने लिखा कि, 'नमस्ते नलिनी, हमारे प्लेटफॉर्म पर कीमतें पूरी तरह से हमारे रेस्तरां पार्टनर्स द्वारा निर्धारित की जाती हैं, क्योंकि ज़ोमैटो ग्राहकों और रेस्तरां के बीच केवल एक मध्यस्थ के रूप में कार्य करता है। फिर भी, हम निश्चित रूप से आपकी प्रतिक्रिया रेस्तरां पार्टनर तक पहुंचाएंगे और उनसे इस पर गौर करने का अनुरोध करेंगे। किसी भी अन्य प्रश्न के लिए बेझिझक हमसे संपर्क करें। हम आपकी सहायता के लिए यहां हैं।'
कई यूजर्स ने पोस्ट पर प्रतिक्रिया दी। एक यूजर ने टिप्पणी की, 'ज्यादातर रेस्टोरेंट अब खुद डिलीवरी नहीं करते। एक रेस्टोरेंट ने मुझे अपने स्विगी पार्सल में मेन्यू कार्ड भेजा, और कीमतें स्विगी की कीमतों के बराबर ही थीं। यह वाकई दुख की बात है।' उन्होंने आगे कहा, 'ज़ोमैटो/स्विगी ने रेस्टोरेंट व्यवसाय में अपनी जड़ें इतनी मज़बूती से जमा ली हैं कि वे सभी ऐप यूजर्स को 20 प्रतिशत की छूट दे रहे हैं, जबकि वे अपने मेनू की कीमतों में 25% की बढ़ोतरी कर रहे हैं, यह जानते हुए कि हर कोई ऐप का उपयोग कर रहा है। दूसरे शब्दों में, आप ऐप का उपयोग करें या न करें, आपको अतिरिक्त भुगतान करना ही होगा।' दूसरे यूजर ने प्लेटफॉर्म्स की मिली—भगत का आरोप लगाते हुए कहा, 'वे साफ तौर पर झूठ बोल रहे हैं। मैं व्यक्तिगत रूप से जानता हूं कि वे रेस्टोरेंट्स से कम से कम 30 प्रतिशत मुनाफा बढ़ाने के लिए कहते हैं और फिर हर बुधवार को भुगतान करते हैं। क्या यह सच नहीं है ज़ोमैटो? झूठे लोगों का झुंड, ईमानदार बनो और कहो कि अगर चाहो तो ऑर्डर करो।'
इसी पोस्ट पर कई यूजर्स कंपनी के समर्थन में भी दिखे। एक यूजर ने कहा, 'याद रखें, ज़ोमैटो कोई दान-पुण्य करने के लिए नहीं है। उन्हें अपने राइडर्स, कर्मचारियों और अन्य परिचालन खर्चों का भुगतान करना पड़ता है। क्या आप रेस्टोरेंट की कीमत पर खाना चाहते हैं? तो कृपया रेस्टोरेंट जाकर अपना ऑर्डर दें। सुविधा के लिए कीमत चुकानी पड़ती है।' एक और यूजर ने लिखा कि, 'ग्राहक को अपनी आलस्य और आराम की वजह से भारी कीमत चुकानी पड़ती है। आलस्य अपने चरम पर है, साथ ही समय की कमी भी है।' एक टिप्पणी में लिखा था, 'वह अंतर संयोगवश इतना अधिक नहीं है, यह प्लेटफॉर्म की आर्थिक रणनीति का नतीजा है जो आपके बिल में दिखाई दे रहा है।'
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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