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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026: बेहाला पूर्व विधानसभा सीट पर किसे मिलेगी जीत? जानें सियासी समीकरण

 Published : Feb 21, 2026 02:27 pm IST,  Updated : Feb 21, 2026 02:27 pm IST

West Bengal assembly election 2026: राजधानी कोलकाता के अंतर्गत पड़नेवाली बेहाला पूर्व विधानसभा सीट पर इस बार मुकाबला दिलचस्प होने के आसार हैं।

West Bengal Assembly Election- India TV Hindi
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026: बेहाला पूर्व विधानसभा सीट Image Source : INDIA TV

West Bengal assembly election 2026: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों का ऐलान अगले महीने हो सकता है लेकिन सियासी दल अभी से अपनी जमीन मजबूत करने में जुट गए हैं। कोलकाता के दक्षिणी हिस्से में बेहाला पूर्व विधानसभा सीट सामान्य वर्ग की सीट है। हालांकि यह राजधानी का शहरी हिस्सा है लेकिन प्रशासनिक तौर पर साउथ 24 परगना जिले के अंदर आता है। इस विधानसभा क्षेत्र में कोलकाता म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन के 11 वार्ड शामिल हैं।

1967 में बेहाला विधानसभा सीट दो हिस्सों में बंटी। एक का नाम बेहाला पश्चिम और दूसरी सीट का नाम बेहाला पूर्व पड़ा। बेहाला पूर्व विधानसभा सीट प 1967 से 2006 तक कुल 11 विधानसभा चुनावों में सीपीआईएम ने 9 बार जीत हासिल की। 1972 में कांग्रेस ने यह सिलसिला तोड़ा जबकि 2001 में टीएमसी ने अपनी पहली मजबूत मौजूदगी दिखाई। वर्ष 2011 के बाद से यह विधानसभा सीट टीएमसी का मजबूत गढ़ बन गई। ममता की टीएमसी ने 2011, 2016 और 2021 के विधानसभा चुनाव में जीत का परचम लहराया। 

बीजेपी का उभार

इस क्षेत्र में हाल के दिनों में बीजेपी का तेजी से उभार हुआ है जो भारतीय जनता पार्टी के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। 2011 में इस सीट पर बीजेपी का वोट शेयर केवल 1.91 प्रतिशत था जो 2016 में बढ़कर 10.71 प्रतिशत और 2021 में 33.15 प्रतिशत तक पहुंच गया। वहीं लोकसभा में भी यही ट्रेंड दिखा। इसलिए आगामी विधानसभा चुनावों में इस सीट पर जबरदस्त मुकाबला होने के आसार हैं।

पिछले चुनावों का रिजल्ट

2011 के विधानसभा चुनाव में टीएसी उम्मीदवार सोवन चटर्जी ने प्रतिद्वंद्वी कुमकुम चक्रवर्ती को 48,173 वोटों से हराया। वहीं 2016 में भी टीएमसी ने बाजी मारी लेकिन हार जीत का अंतर घटकर 24,294 रह गया। निर्दलीय उम्मीदवार अंबिकेश महापात्रा दूसरे स्थान पर रहे। 2021 में रत्ना चटर्जी ने बीजेपी की पायल सरकार को 37,428 वोटों से हराया।

बता दें कि राज्य में टीएमसी पिछले 14 साल से सत्ता में है। वहीं बीजेपी मौजूदा सत्ता के खिलाफ दो-तिहाई से जीत का दावा कर रही है। वहीं, कांग्रेस के गठबंधन में चुनाव नहीं लड़ने के फैसले को टीएमसी के लिए एक चुनौती के रूप में देखा जा रहा है। इस फैसले से वोट बंटने की संभावना है।

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