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भारत की चाल से पस्त हो जाएगा पाकिस्‍तान, जानें कैसे पीएम मोदी ने बनाया तुर्किए को घेरने का प्लान?

 Edited By: Amit Mishra
 Published : Jun 10, 2025 06:49 pm IST,  Updated : Jun 10, 2025 06:50 pm IST

भारत की नीति साफ है कि जो जैसा करेगा उसके साथ वैसा की सलूक होगा। पड़ोसी मुल्क से बढ़ी टेंशन के बीच तुर्किए ने पाकिस्तान का खुलकर साथ दिया है। अब भारत भी वही करने वाला है जो तुर्किए ने किया है।

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी- India TV Hindi
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी Image Source : FILE

India Plan For Türkiye: तुर्किए जब भूकंप जैसी भीषण आपदा से कराह रहा था तो सबसे पहले मदद के लिए भारत ने हाथ बढ़ाया था। भारत ने महज 12 घंटों के भीतर राहत सामग्री और बचाव दल को तुर्किए में उतार दिया था। भारत ने एनडीआरएफ की तीन टीमों को भी तुर्की में तैनात किया था। लेकिन, तुर्किए ने इस मदद के जवाब में भारत के साथ जो किया है वो दुनिया ने देखा है। भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ी टेंशन में तुर्किए खुलकर पाकिस्तान के समर्थन में खड़ा है। 

तुर्किए को घेरने की तैयारी

तुर्किए ने ना सिर्फ खुलकर पाकिस्तान के सपोर्ट में बयान दिए बल्कि भारत के खिलाफ संघर्ष में पाकिस्तान को ड्रोन और अन्य सैन्य उपकरण भी दिए हैं। तुर्किए की इस हरकत का विरोध पूरे देश में देखने मिला है। अब भारत ने भी तुर्किए को घेरने की तैयारी कर ली है और इसकी शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की साइप्रस यात्रा होने वाली है।

साइप्रस के साथ है तुर्किए की टेंशन

प्रधानमंत्री मोदी 15 से 17 जून तक कनाडा में होने वाले G 7 समिट में शामिल होंगे। कनाडा से पहले पीएम मोदी साइप्रस जाएंगे और वापसी में क्रोएशिया से होते हुए भारत आएंगे। समझने वाली बात यह है कि साइप्रस के साथ तुर्किए की दुश्मनी पुरानी है। अब ऐसे में जब पीएम मोदी साइप्रस में होंगे तो टर्किश राष्ट्रपति एर्दोगन की टेंशन जरूर बढ़ेगी। पीएम मोदी भारत के तीसरे प्रधानमंत्री होंगे जो साइप्रस का दौरा करेंगे। इससे पहले साल 2002 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने यहां का दौरा किया था। साल 1983 में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने भी साइप्रस का दौरा किया था. 

तुर्किए और साइप्रस में क्या है लड़ाई?

तुर्किए और साइप्रस का विवाद दशकों पुराना है। साइप्रस एक भूमध्यसागरीय द्वीप है जो तुर्किए के दक्षिण में, सीरिया के पश्चिम और इजरायल के उत्तर पश्चिम में पड़ता है। साइप्रस में तुर्किए और ग्रीक समुदाय के लोग रहते हैं, जिनमें नस्ली विवाद है। तुर्किए और साइप्रस के बीच विवाद की शुरुआत तब हुई जब साल 1974 में ग्रीक लड़ाकों के तख्तापलट के बाद तुर्किए ने साइप्रस के उत्तरी हिस्से पर आक्रमण कर दिया था। इस घटना के बाद साइप्रस दो हिस्सों में बंट गया, जिनमें से एक में ग्रीक साइप्रस सरकार है और दूसरे पर तुर्क साइप्रस वासियों का कंट्रोल है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ग्रीक साइप्रस सरकार के शासन वाले साइप्रस गणराज्य को मान्यता प्राप्त है। वहीं, तुर्क साइप्रस वासियों ने अपने इलाके को एक स्वघोषित राष्ट्र का दर्जा दिया है, जिसे सिर्फ तुर्किए स्वीकार करता है।

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