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G-20 में यूक्रेन युद्ध पर पीएम मोदी ने फिर दिया बड़ा बयान, संयुक्त राष्ट्र पर सीधा हमला...आक्रामकता देख दुनिया हैरान

Written By: Dharmendra Kumar Mishra @dharmendramedia
Published : Nov 15, 2022 09:31 am IST, Updated : Nov 15, 2022 09:50 am IST

PM Modi's speech in G-20 Summit:इंडोनेशिया के बाली में चल रहे जी-20 सम्मेलन में यूक्रेन युद्ध को लेकर पीएम मोदी ने फिर बड़ा बयान दिया है। जैसा कि पहले से ही पूरे विश्व की निगाहें भारत के प्रधानमंत्री पर टिकी थीं और सबको उम्मीद थी कि प्रधानमंत्री कुछ न कुछ बड़ा बयान जरूर देंगे।

G-20 सम्मेलन में जो बाइडन के साथ पीएम मोदी- India TV Hindi
Image Source : AP G-20 सम्मेलन में जो बाइडन के साथ पीएम मोदी

PM Modi's speech in G-20 Summit:इंडोनेशिया के बाली में चल रहे जी-20 सम्मेलन में रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर पीएम मोदी ने फिर बड़ा बयान दिया है। जैसा कि पहले से ही पूरे विश्व की निगाहें भारत के प्रधानमंत्री पर टिकी थीं और सबको उम्मीद थी कि प्रधानमंत्री कुछ न कुछ बड़ा बयान जरूर देंगे। पीएम मोदी ने अपने उसी अंदाज में यूक्रेन युद्ध को लेकर कहा कि "मैंने बार-बार कहा है कि हमें यूक्रेन में युद्ध विराम और कूटनीति के रास्ते पर लौटने का रास्ता खोजना होगा। पिछली सदी में द्वितीय विश्व युद्ध ने दुनिया में कहर बरपाया था। उसके बाद उस समय के नेताओं ने शांति का रास्ता अपनाने का प्रयास किया। अब बारी हमारी है।"

बेहद आक्रामक अंदाज में दिख रहे पीएम मोदी यहीं नहीं रुके। उन्होंने जलवायुव परिवर्तन से लेकर कोविड महामारी और यूक्रेन समस्या के चलते विश्व भर में बर्बाद हुई आपूर्ति श्रृंखलाओं और खाद्य ऊर्जा संकट को लेकर संयुक्त राष्ट्र को भी सीधे निशाने पर लिया। प्रधानमंत्री ने अपने भाषण की शुरुआत विश्व नेताओं को नमस्कार के संबोधन के साथ की। उन्होंने कहा कि मैं एक चुनौतीपूर्ण वैश्विक वातावरण में जी-20 को प्रभावी नेतृत्व देने के लिए इंडोनेशिया के राष्ट्रपति जोको विडोडो को दिल से बधाई देता हूं।

पीएम मोदी ने कहा कई समस्याओं ने मिलकर दुनिया में तबाही मचा रखी है

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जलवायु परिवर्तन, कोविड महामारी, यूक्रेन में विकास और इससे जुड़ी वैश्विक समस्याओं ने मिलकर दुनिया में तबाही मचा रखी है। वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला बर्बाद हो गई है। पूरी दुनिया में जरूरी सामान का संकट है। हर देश के गरीब नागरिकों के लिए चुनौती अधिक गंभीर है। उनके लिए रोजमर्रा की जिंदगी पहले से ही संघर्ष भरी थी। उनके पास दोहरी मार से निपटने की वित्तीय क्षमता नहीं है। दोहरी मार के कारण उनके पास इसे संभालने के लिए वित्तीय क्षमता की कमी है। हमें यह स्वीकार करने में भी संकोच नहीं करना चाहिए कि संयुक्त राष्ट्र जैसे बहुपक्षीय संस्थान इन मुद्दों पर असफल रहे हैं। और हम सभी उनमें उपयुक्त सुधार करने में विफल रहे हैं। इसलिए आज दुनिया को जी-20 से अधिक उम्मीदें हैं, हमारे समूह की प्रासंगिकता और भी महत्वपूर्ण हो गई है।

विश्व शांति को देना होगा कड़ा संदेश
पीएम मोदी ने बाली में कहा कि कोविड के बाद की अवधि के लिए एक नई विश्व व्यवस्था बनाने का दायित्व हमारे कंधों पर है। दुनिया में शांति, सद्भाव और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस और सामूहिक संकल्प दिखाना समय की मांग है। मुझे विश्वास है कि अगले वर्ष जब बुद्ध और गांधी की पवित्र भूमि में जी-20 की बैठक होगी तो हम सभी विश्व को शांति का कड़ा संदेश देने के लिए सहमत होंगे। उन्होंने कहा कि महामारी के दौरान भारत ने अपने 1.3 बिलियन नागरिकों की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित की। वहीं कई जरूरतमंद देशों को खाद्यान्न की आपूर्ति भी की गई। खाद्य सुरक्षा के लिहाज से उर्वरकों की मौजूदा कमी भी एक बहुत बड़ा संकट है। आज की खाद की कमी कल का खाद्य संकट है, जिसका समाधान दुनिया के पास नहीं होगा। हमें खाद और खाद्यान्न दोनों की आपूर्ति श्रृंखला को स्थिर और सुनिश्चित बनाए रखने के लिए आपसी सहमति बनानी चाहिए।

दुनिया को कराया भारत की ताकत का एहसास
पीएम मोदी ने कहाकि भारत में स्थायी खाद्य सुरक्षा के लिए हम प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दे रहे हैं और बाजरा जैसे पौष्टिक और पारंपरिक खाद्यान्नों को फिर से लोकप्रिय बना रहे हैं। बाजरा वैश्विक कुपोषण और भूख को भी दूर कर सकता है। हम सभी को अगले वर्ष अंतर्राष्ट्रीय बाजरा वर्ष को बड़े उत्साह के साथ मनाना चाहिए। वैश्विक विकास के लिए भारत की ऊर्जा-सुरक्षा भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है। हमें ऊर्जा की आपूर्ति पर किसी प्रतिबंध को बढ़ावा नहीं देना चाहिए और ऊर्जा बाजार में स्थिरता सुनिश्चित की जानी चाहिए। भारत स्वच्छ ऊर्जा और पर्यावरण के लिए प्रतिबद्ध है। 2030 तक हमारी आधी बिजली अक्षय स्रोतों से पैदा होगी। समावेशी ऊर्जा संक्रमण के लिए विकासशील देशों को समयबद्ध और किफायती वित्त और प्रौद्योगिकी की सतत आपूर्ति आवश्यक है। भारत की जी-20 प्रेसीडेंसी के दौरान हम इन सभी मुद्दों पर वैश्विक सहमति के लिए काम करेंगे।

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