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इंडोनेशिया में बेकाबू हुई भीड़ ने संसद भवन में लगाई आग, 3 लोगों की मौत; जानें क्यों सड़क पर उतरी जनता

 Published : Aug 30, 2025 06:44 pm IST,  Updated : Aug 30, 2025 06:52 pm IST

इंडोनेशिया में गुस्साई भीड़ ने संसद भवन में आग लगा दी। इससे कम से कम 3 लोगों की मौत हो गई। जबकि कई अन्य लोग घायल हो गए। जनता सांसदों को मिलने वाले भारी-भरकम भत्तों और देश में बढ़ती महंगाई से परेशान है।

इंडोनेशिया के संसद भवन में आग लगने के बाद मची तबाही। - India TV Hindi
इंडोनेशिया के संसद भवन में आग लगने के बाद मची तबाही। Image Source : NEW YORK TIMES

जकार्ता: इंडोनेशिया में बेकाबू भीड़ ने संसद भवन में आग लगा दी है। इससे कम से कम 3 लोगों की मौत हो गई। जबकि कई अन्य लोग घायल हो गए। बताया जा रहा है किक इंडोनेशिया में सांसदों को मिलने वाले भारी-भरकम भत्तों को लेकर जनता का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा है। विरोध प्रदर्शनों ने कई शहरों में हिंसक रूप ले लिया है। 

इमारत समेत दर्जनों वाहन खाक

गुस्साई भीड़ ने दक्षिण सुलावेसी प्रांत की राजधानी मकास्सर में स्थानीय प्रांतीय संसद भवन में शुक्रवार देर रात आग लगा दी। स्थानीय आपदा प्रबंधन अधिकारी फदली ताहर ने बताया कि शनिवार सुबह तक तीन शव बरामद किए गए, जबकि इमारत से जान बचाकर कूदने के प्रयास में पांच लोग गंभीर रूप से झुलस गए या घायल हो गए, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। स्थानीय टीवी चैनलों पर प्रसारित दृश्यों में दिखाया गया कि प्रांतीय परिषद की इमारत रात भर जलती रही।

अन्य शहरों में भी उग्र प्रदर्शन

पश्चिमी जावा के बांडुंग शहर में प्रदर्शनकारियों ने एक क्षेत्रीय संसद को आग के हवाले कर दिया। हालांकि, वहां किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। इंडोनेशिया के दूसरे सबसे बड़े शहर सुरबाया में भी प्रदर्शनकारियों ने क्षेत्रीय पुलिस मुख्यालय पर धावा बोल दिया। उन्होंने बाड़बंदी तोड़ी, वाहनों में आग लगाई और सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया।

राजधानी जकार्ता में हालात सामान्य

इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में शनिवार को हालात धीरे-धीरे सामान्य हो गए। अधिकारियों ने जली हुई कारों, बस स्टेशनों और पुलिस कार्यालयों से मलबा हटाना शुरू कर दिया है। जकार्ता में यह विरोध सोमवार से शुरू हुआ था और पांच दिनों तक चला, जिसकी चिंगारी बनी एक खबर, जिसमें दावा किया गया कि 580 सांसदों को उनके वेतन के अलावा प्रति माह 50 मिलियन रुपया (लगभग 3,075 अमेरिकी डॉलर) का आवास भत्ता मिल रहा है। यह भत्ता पिछले साल शुरू किया गया था और जकार्ता के न्यूनतम वेतन से करीब 10 गुना अधिक बताया गया है।

जनता का गुस्सा और मांगें

आम लोगों का कहना है कि जब देश के बड़े हिस्से महंगाई, बेरोज़गारी और आर्थिक असमानता से जूझ रहे हैं, तब नेताओं को इस तरह के भारी भत्ते देना अनुचित और अपमानजनक है। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि सांसदों के भत्तों में कटौती की जाए, सरकारी खर्चों में पारदर्शिता लाई जाए और जनप्रतिनिधियों को जवाबदेह बनाया जाए। (भाषा)

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