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Russia-Ukraine War: रूस और यूक्रेन के बीच हुआ समझौता, पुतिन के करीबी रहे कैदी को छोड़ने के लिए तैयार हुए जेलेंस्की

Edited By: Ravi Prashant @iamraviprashant Published : Sep 22, 2022 06:31 pm IST, Updated : Sep 22, 2022 06:31 pm IST

Russia-Ukraine War: यूक्रेन के मारियुपोल में इस्पात संयंत्र की रक्षा करने वाले लड़ाकों को रूसी कब्जे से मुक्त कराने के प्रयास पर गुरुवार तड़के विराम लग गया।

Russia-Ukraine War- India TV Hindi
Image Source : AP Russia-Ukraine War

Highlights

  • कैदियों की इस अदला-बदली में 10 विदेशी नागरिक भी रिहा किए गए हैं
  • असल योद्धाओं के बदले में मेदवेदचुक को छोड़ना अफसोस की बात नहीं है
  • मेदवेदचुक की सबसे छोटी बेटी पुतिन की करीबी मानी जाती है

Russia-Ukraine War: यूक्रेन के मारियुपोल में इस्पात संयंत्र की रक्षा करने वाले लड़ाकों को रूसी कब्जे से मुक्त कराने के प्रयास पर गुरुवार तड़के विराम लग गया। रूस अपने एक हाईप्रोफाइल कैदी और कुछ सैनिकों की रिहाई के बदले उन यूक्रेनी युद्धबंदियों को छोड़ने को तैयार हो गया, जिन्होंने रूस के हमले के दौरान मारियुपोल में एक इस्पात संयंत्र की रक्षा की थी। यूक्रेन कई महीनों से इन कैदियों को मुक्त कराने के प्रयास कर रहा था और इनके बदले में वह जिस कैदी को छोड़ेगा वह रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का एक सहयोगी है। इसके अलावा वह रूस के 55 अन्य कैदियों को भी रिहा करेगा। 

अबतक रूस नहीं दी कोई प्रतिक्रिया 

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा कि उनकी सरकार ने तुर्किये और सऊदी अरब की मध्यस्थता के प्रयासों से रूस के कब्जे से 215 यूक्रेनी नागरिकों और विदेशियों को मुक्त करा लिया है। उन्होंने कहा कि इनमें से कई ऐसे सैनिक और अधिकारी हैं, जो रूस के कब्जे वाले क्षेत्र में मृत्युदंड का सामना कर रहे थे। हालांकि, रूसी अधिकारियों ने अभी कैदियों की इस अदला-बदली पर कोई टिप्पणी नहीं की है। रूस समर्थित विपक्षी नेता विक्टर मेदवेदचुक के बदले में कुल 200 यूक्रेनी कैदियों को रिहा किया जाएगा। मेदवेदचुक यूक्रेनी नागरिक हैं। कुलीन वर्ग से आने वाले 68 वर्षीय मेदवेदचुक 24 फरवरी को रूस के आक्रमण से कई दिनों पहले यूक्रेन में नजरबंदी से फरार हो गए थे, लेकिन उन्हें अप्रैल में फिर से पकड़ लिया गया।

मेदवेदचुक पुतिन के करीबी हैं
उन्हें देशद्रोह तथा पूर्वी यूक्रेन में रूस समर्थित दोनेत्स्क क्षेत्र में कोयला खरीदने में एक आतंकवादी संगठन की सहायता करने के आरोपों पर ताउम्र कैद की सजा सुनायी गयी थी। मेदवेदचुक यूक्रेन के पूर्व राष्ट्रपति लियोनिद कुचमा के चीफ ऑफ स्टाफ रहते हुए पुतिन के संपर्क में आए थे। मेदवेदचुक की सबसे छोटी बेटी पुतिन की करीबी मानी जाती है। उन्हें हिरासत में लिये जाने के बाद मॉस्को के अधिकारियों ने तीखी प्रतिक्रिया दी थी। मेदवेदचुक यूक्रेन की रूस समर्थित ‘ऑपोजिशन प्लेटफॉर्म-फॉर लाइफ’ पार्टी की राजनीतिक परिषद के प्रमुख हैं। यह यूक्रेन की संसद में सबसे बड़ा विपक्षी समूह है। सरकार ने पार्टी की गतिविधि निलंबित कर दी है। 

जेलेंस्की ने जारी किया वीडियो
जेलेंस्की ने रात को दिए वीडियो संबोधन में कहा कि ‘‘असल योद्धाओं के बदले में मेदवेदचुक को छोड़ना अफसोस की बात नहीं है। उनसे पूछताछ पूरी कर ली गयी है। यूक्रेन को उनसे हर वह जरूरी जानकारी मिल गयी है, जो आपराधिक कार्यवाही में सच साबित करने के लिए आवश्यक है।’’ जेलेंस्की ने कहा कि कैदियों की अदला-बदली की एक अन्य घटना में यूक्रेन ने 55 रूसी कैदियों को रिहा करने के बदले उन पांच कमांडर को मुक्त कराया है, जो अजोवस्ताल इस्पात संयंत्र की रक्षा के लिए सैनिकों का नेतृत्व किया था। उन्होंने कहा कि रूस के कब्जे से मुक्त कराए गए कई सैनिक यूक्रेन की अजोव रेजीमेंट से जुड़े हैं और उन्होंने उन्हें नायक बताया।

ब्रिटिश नागरिक भी हुए रिहा 
उन्होंने आगे कहा कि अजोव रेजीमेंट के कमांडर डेनिस प्रोकोपेंको तथा सियातोस्लाव पालामर समेत पांच नेता तुर्की में हैं, जहां वे सुरक्षा के नजरिये से युद्ध खत्म होने तक रहेंगे। कैदियों की इस अदला-बदली में 10 विदेशी नागरिक भी रिहा किए गए हैं, जिनमें पांच ब्रिटिश नागरिक और दो अमेरिका के भूतपूर्व सैनिक हैं, जिन्होंने यूक्रेनी बलों के साथ मिलकर युद्ध लड़ा था। उन्हें रूस समर्थित अलगाववादियों द्वारा छोड़ा गया। एक मीडिया ने दो ब्रिटिश नागरिकों एडेन असलिन और शाउन पिन को एक विमान के भीतर बात करते हुए वीडियो दिखाया गया। पिनर ने कहा, ‘‘हम सभी को बताना चाहते हैं कि हम खतरे से बाहर आ गए हैं और हम अपने परिवार के पास अपने घर जा रहे हैं।’’ संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने कैदियों की अदला-बदली का स्वागत करते हुए कहा कि यह ‘‘कोई छोटी उपलब्धि नहीं’’ है। उन्होंने कहा, ‘‘यूक्रेन में युद्ध से हुई पीड़ा को कम करने के लिए और बहुत कुछ किया जाना बाकी है।’

 

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