Bihar election results 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में महागठबंधन (INDIA ब्लॉक) ने जहां तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित किया था तो वहीं उपमुख्यमंत्री के दो उम्मीदवारों की बात कही गई थी। अपनी जिद पर अड़े सन ऑफ मल्लाह कहे जाने वाले विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के मुखिया मुकेश सहनी को डिप्टी सीएम का फेस घोषित किया गया और दूसरे डिप्टी सीएम के फेस की एनाउंसमेंट नहीं हुई। कहा गया कि दूसरा डिप्टी सीएम कोई मुस्लिम चेहरा होगा जिसका ऐलान रिजल्ट घोषित होने के बाद किया जाएगा।

मुकेश सहनी को काफी मान मनौव्वल के बाद उपमुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित तो किया गया, लेकिन जब चुनाव का रिजल्ट आया तो उनकी पार्टी 'विकासशील इंसान पार्टी' (VIP) एक भी सीट नहीं जीत पाई, जिससे उन्हें करारी हार का सामना करना पड़ा। चुनाव परिणामों के बाद, यह विश्लेषण किया गया कि उपमुख्यमंत्री का चेहरा बनने के बावजूद उनकी पार्टी का सूपड़ा साफ हो गया।
महागठबंधन के लिए पनौती बने सहनी
मुकेश सहनी ने इस बार के चुनाव में 15 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन किसी भी सीट पर सफलता नहीं मिली। कुछ रिपोर्टों में यह भी बताया गया कि हार के बाद उन्होंने जनता के फैसले पर सवाल उठाते हुए वोट बेचे जाने का आरोप लगाया और कहा कि, जनता "पैसे के लालच में" फंस गई। इस तरह से कहें तो, उन्हें डिप्टी सीएम उम्मीदवार बनाए जाने का फैसला तेजस्वी ने काफी जद्दो जहद के बाद लिया जो उनका गलत फैसला था और मुकेश सहनी उनके लिए पनौती साबित हुए।

तेजस्वी ने क्यों सहनी को दिया तवज्जो
मुकेश सहनी ने बीजेपी पर अपनी पार्टी को तोड़ने का और विधायकों को ख़रीदने का आरोप लगाया था और कहा था, अब हम भाजपा को जब तक तोड़ेंगे नहीं, तब तक छोड़ेंगे नहीं। हमने हाथ में गंगाजल लेकर प्रतिज्ञा ली थी, अब समय आ गया है। महागठबंधन के साथ मजबूती से खड़े होकर हम बिहार में अपनी सरकार बनाएंगे और भाजपा को राज्य से बाहर कर देंगे।
सीट शेयरिंग से पहले उन्होंने कहा था, ''बिहार में हम 60 विधानसभा सीटों पर लड़ेंगे। बिहार में 37 फ़ीसदी अति पिछड़ा समुदाय के वोटर हैं। इस आधार पर बिहार में अति पिछड़े के बेटे को उपमुख्यमंत्री होना चाहिए। माना जा रहा है कि तेजस्वी ने सहनी को महागठबंधन की ओर से उपमुख्यमंत्री बनाने का फैसला इसलिए किया क्योंकि इससे बिहार के ईबीसी (अति पिछड़ी जाति) वोटरों का एक बड़ा हिस्सा महागठबंधन के पाले में आ जाएगा।

उपमुख्यमंत्री के रूप में तेजस्वी ने मुकेश सहनी को आगे कर अति पिछड़ी और हाशिए की जातियों के वोटरों के बीच अपील मज़बूत करने की कोशिश की लेकिन ये दांव उल्टा पड़ गया। महागठबंधन के वोटरों में इस फ़ैसले का संदेश अच्छा नहीं गया और जनता ने भी उन्हें नकार दिया।
उलट पलट करने में माहिर हैं सहनी
- बता दें कि मुकेश सहनी की कभी भी किसी गठबंधन के साथ निष्ठा नहीं रही है। कभी वह महागठबंधन में रहते हैं तो कभी एनडीए में चले जाते हैं।
- सहनी ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत एनडीए के साथ की थी, लोकसभा चुनाव 2014 में वो बीजेपी के स्टार कैंपेनर थे। इसके बाद उन्होंने एनडीए का साथ छोड़ दिया था।
- 2015 में उन्होंने निषाद विकास संघ की स्थापना की और बाद में 2018 में विकासशील इंसान पार्टी का गठन किया।
- 2015 के विधानसभा चुनाव में मुकेश सहनी ने नीतीश कुमार का समर्थन किया था और फिर बाद में उनसे भी अलग हो गए।
- 2020 में सहनी एनडीए में शामिल हो गए, 2020 के बिहार चुनाव में, भाजपा ने अपने एनडीए कोटे से वीआईपी को 11 सीटें दी थीं, वीआईपी ने इन सीटों पर चुनाव लड़ा और चार सीटें जीतीं।
- विधानसभा चुनाव 2020 में मुकेश सहनी हार गए थे लेकिन हार के बावजूद मुकेश सहनी को नीतीश सरकार में कैबिनेट मंत्री (पशुपालन विभाग) बनाया गया।
- एक साल के भीतर, उनके एक विधायक की मौत हो गई और 2022 में बाक़ी तीन विधायक बीजेपी में शामिल हो गए।
- मुकेश सहनी ने यूपी विधानसभा चुनाव में बीजेपी से गठबंधन किए बिना 53 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार दिए, जिससे मुकेश सहनी को कैबिनेट से बर्खास्त कर दिया गया।
- सहनी ने एनडीए को छोड़ दिया और अप्रैल 2024 में महागठबंधन में वापस लौट गए।