Islamabad Blast: पाकिस्तान में इस्लामाबाद के इमामबाड़ा में भीषण धमाका हुआ है, जिसमें 70 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई। ज्यादातर लोग इसे मस्जिद में धमाका समझ रहे हैं लेकिन यह उससे अलग है। पाकिस्तान में शिया मुस्लिमों को निशाना बनाया गया है। उनके धार्मिक स्थल पर फिदायीन अटैक हुआ है। इमामबाड़ा शब्द सुनकर आपको लखनऊ की भी याद आती होगी। आइए इस खबर में जानते हैं कि लखनऊ से इस्लामाबाद तक कई शहरों में बना इमामबाड़ा क्या होता है, यह मस्जिद से कैसे अलग है।
इमाम हुसैन की शहादत को याद करने की जगह
जान लें कि शिया मुस्लिमों की तरफ से मुहर्रम के दौरान मजलिस यानी शोक सभाओं और नौहा यानी शोकगीत का आयोजन किया जाता है। इसके लिए जो विशेष हॉल या भवन होता है, उसे इमामबाड़ा कहते हैं। इमामबारगाह या आशूरखाना के नाम से भी इमामबाड़ा को जाना जाता है। यह इमाम हुसैन की शहादत को याद करने की जगह होती है। यहां इमाम हुसैन से जुड़े प्रतीक भी रखे होते हैं।
इमामबाड़े का स्ट्रक्चर कैसा होता है?
इमामबाड़े का इस्तेमाल मुख्य रूप से मुहर्रम के 10 दिनों के दौरान इमाम हुसैन की शहादत पर शोक मनाने के लिए किया जाता है। इसके स्ट्रक्चर की बात करें तो इमामबाड़े में एक बड़ा हॉल होता है। इसमें एक ऊंचे चबूतरे वाला कमरा भी होता है जिसको शाहनशीं कहा जाता है। यहां इमाम हुसैन के प्रतीक यानी जरी सजाकर रखे जाते हैं।
लखनऊ का इमामबाड़ा क्यों है फेमस?
इमामबाड़े में कोई भी आ सकता है। धर्म या सम्प्रदाय देखकर एंट्री नहीं दी जाती है। लखनऊ के फेमस इमामबाड़े की बात करें तो अवध के नवाबों ने लखनऊ में 'बड़ा इमामबाड़ा' और 'छोटा इमामबाड़ा' बनवाया था। यहां का बड़ा इमामबाड़ा अपनी भूलभुलैया के लिए प्रसिद्ध है। ऐसे ही तमाम इमामबाड़े आपको भारत के ज्यादातर शहरों में मिल जाएंगे, जहां भी शिया समुदाय के लोग रहते हैं। पाकिस्तान में भी शिया मुस्लिमों की रिहाइश के पास इमामबाड़े बने हैं।
मस्जिद और इमामबाड़े में क्या है अंतर?
इमामबाड़ा और मस्जिद से अंतर की बात करें तो जहां मस्जिद का इस्तेमाल नमाज पढ़ने के लिए होता है तो वहीं इमामबाड़े का मुख्य रूप से उपयोग इमाम हुसैन की याद में मजलिस करने के लिए होता है। इमामबाड़ा ना सिर्फ धार्मिक केंद्र होता है, बल्कि भारत के लखनऊ में यह वास्तुकला का बेहतरीन नमूना भी माना जाता है।