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'Ghooskhor Pandat फिल्म का टीजर और अन्य प्रचार सामग्री हटाएं', Netflix को केंद्र सरकार ने दिया अल्टीमेटम

नेटफ्लिक्स की फिल्म 'घूसखोर पंडत' अपने टाइटल को लेकर विवादों में घिर गई है। अब इस मामले को लेकर नई अपडेट सामने आई है। केंद्र सरकार ने नेटफ्लिक्स को Ghooskhor Pandat का टीजर और अन्य प्रचार सामग्री हटाने को कहा है।

Reported By : Devendra Parashar Edited By : Himanshi Tiwari Published : Feb 06, 2026 06:18 pm IST, Updated : Feb 06, 2026 07:48 pm IST
manoj bajpayee- India TV Hindi
Image Source : SCREEN GRAB FROM NETFLIX मनोज बाजपेयी

बीजेपी ने शुक्रवार, 06 जनवरी को दावा किया कि केंद्र सरकार ने नेटफ्लिक्स पर आने वाली फिल्म 'घूसखोर पंडत' का टीजर और दूसरा प्रमोशनल कंटेंट हटाने को कहा है, क्योंकि इस प्रोजेक्ट को लेकर विवाद तेजी से बढ़ गया है। पीटीआई के मुताबिक, केंद्र का यह निर्देश फिल्म के टाइटल और उसके कथित मतलब को लेकर बढ़ते विरोध के बीच आया है, जिसने कई राज्यों में राजनीतिक, कानूनी और सामाजिक प्रतिक्रियाएं पैदा की हैं। यह मामला तब सामने आया जब नेटफ्लिक्स ने मनोज बाजपेयी स्टारर और फिल्ममेकर नीरज पांडे की बनाई क्राइम ड्रामा 'घूसखोर पंडत' का प्रमोशनल मटेरियल जारी किया। ब्राह्मण समुदाय के एक हिस्से ने टाइटल पर कड़ी आपत्ति जताई।

घूसखोर पंडत को नेटफ्लिक्स से हटाने की मांग

बीजेपी नेताओं ने कहा कि केंद्र ने इन चिंताओं पर ध्यान दिया और बाद में स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म से टीजर और संबंधित प्रमोशनल सामग्री हटाने को कहा। रिपोर्ट्स के अनुसार, सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने भी फिल्म के टाइटल को लेकर नेटफ्लिक्स के साथ बातचीत की है, क्योंकि इसके शब्दों और जनता की भावनाओं पर संभावित असर को लेकर आपत्तियां और चिंताएं बढ़ रही थीं। PTI के अनुसार, बीजेपी ने कहा है कि यह कदम ऐसी सामग्री को फैलने से रोकने के लिए जरूरी था, जिससे भावनाएं आहत हो सकती हैं और सार्वजनिक व्यवस्था बिगड़ सकती है। पार्टी के प्रतिनिधियों ने यह भी कहा कि रचनात्मक स्वतंत्रता सामाजिक जfम्मेदारी से ऊपर नहीं हो सकती, खासकर जब टाइटल में इस्तेमाल किए गए शब्दों को किसी समुदाय के लिए मानहानिकारक या अपमानजनक समझा जा सकता हो।

घूसखोर पंडत विवाद पर नीरज पांडे ने तोड़ी चुप्पी

यह विवाद सिर्फ राजनीतिक बयानों तक ही सीमित नहीं रहा है। उत्तर प्रदेश में पुलिस ने शिकायतें मिलने के बाद FIR दर्ज की क्योंकि फिल्म का टाइटल और प्रमोशन आपत्तिजनक हैं। यह मामला न्यायपालिका तक भी पहुंच गया है, जिसमें फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने की याचिकाएं दायर की गई हैं। यह तर्क देते हुए कि टाइटल सामूहिक मानहानि के बराबर है। विरोध के जवाब में नीरज पांडे ने सफाई देते हुए कहा कि फिल्म पूरी तरह से काल्पनिक है और 'पंडित' का इस्तेमाल एक किरदार के बोलचाल के नाम के तौर पर किया गया है, न कि किसी जाति या समुदाय के संदर्भ में। हालांकि, नेटफ्लिक्स ने अब तक कोई विस्तृत सार्वजनिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन टीजर अब उसके आधिकारिक प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध नहीं है।

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