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मॉक पोल में निकलीं VVPAT की पर्चियों का असल में क्या होता है? पोलिंग बूथ के अधिकारी ने बताई पूरी प्रक्रिया

बिहार के समस्तीपुर में VVPAT की पर्चियों के कचरे के ढेर में मिलने के बाद चुनाव आयोग पर सवाल उठ रहे हैं। इस खबर में पढ़िए वीवीपैट की पर्चियों का मॉक पोलिंग के बाद क्या होता है।

Written By: Vinay Trivedi
Published : Nov 09, 2025 01:19 pm IST, Updated : Nov 09, 2025 01:19 pm IST
samastipur vvpat slips controversy- India TV Hindi
Image Source : PTI VVPAT की पर्चियां पोलिंग बूथ से चुनाव आयोग तक कैसे पहुंचती हैं?

नई दिल्ली: बिहार में चुनाव की सरगर्मी के बीच समस्तीपुर के सरायरंजन विधानसभा क्षेत्र में VVPAT की पर्चियां कचरे के ढेर में मिलने से हड़कंप मच गया। RJD समेत तमाम विपक्षी पार्टियों ने तरह-तरह के आरोप लगाए और चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाए। हालांकि, मामले की नजाकत को देखते हुए तुरंत इस मामले की एफआईआर हुई और डीएम समस्तीपुर ने सफाई दी कि ये मॉक पोल की पर्चियां हैं। इसलिए चिंता की बात नहीं, चुनाव की शुचिता बरकरार है। चुनाव आयोग और विपक्ष पार्टियों के आरोप-प्रत्यारोप के बीच ये समझते हैं कि पोलिंग बूथ पर वोटिंग शुरू होने से पहले मॉक पोल प्रक्रिया के बाद VVPAT से जो पर्चियां निकाली जाती हैं उनका क्या होता है। वो मतदान में काउंट नहीं होती हैं तो उन्हें सुरक्षित रखने का प्रोसेस क्या है।

मतदान केंद्र पर मॉक पोलिंग कैसे होती है?

VVPAT पर्चियों से जुड़े विवाद और मॉक पोल की प्रक्रिया जानने के लिए INDIA TV की टीम ने पीठासीन अधिकारी के तौर पर चुनाव संपन्न करा चुके हिमांशु शुक्ला से बातचीत की। उन्होंने बताया कि पोलिंग बूथ पर चुनाव की वोटिंग शुरू कराने से पहले ईवीएम में मॉक पोल किया जाता है। निष्पक्षता के लिए सभी पार्टियों के उम्मीदवारों के पोलिंग एजेंट्स के सामने ही मॉक पोलिंग होती है। उन्हें ईवीएम के सही होने का भरोसा हो, इसके लिए पोलिंग एजेंट्स से भी मॉक पोलिंग में ईवीएम के बटन दबवाए जाते हैं। इस तरह मॉक पोल में ईवीएम के सारे बटन दबाकर चेक किए जाते हैं और फिर वीवीपैट मशीन में देखा जाता है कि जिस कैंडिडेट के सामने का बटन ईवीएम में दबाया जा रहा है, उसी के नाम की पर्ची वीवीपैट में दिखाई दे रही है या नहीं।

पोलिंग एजेंट्स को EVM पर कैसे होता है भरोसा?

जब मॉक पोल पूरा हो जाता है और पोलिंग एजेंट्स को ये भरोसा हो जाता है कि ईवीएम और वीवीपैट मशीन सही से काम कर रही है। इसके बाद CRC किया जाता है। CRC का मतलब है Close, Result और Clear। Close में पहले मॉक पोल की प्रकिया को बंद किया जाता है। फिर Result के तहत पोलिंग एजेंट्स को मॉक पोल का रिजल्ट दिखाया जाता है और इसके बाद Clear में ईवीएम का डेटा जीरो कर दिया जाता है। इसके बाद वीवीपैट से वो पर्चियां निकाल ली जाती हैं जो मॉक के वक्त वीवीपैट के बॉक्स में गिरी थीं।

VVPAT से निकली पर्चियों का क्या होता है?

इसके बाद वीवीपैट से निकली गई पर्चियों पर पीछे मुहर लगा दी जाती है कि ये पर्चियां मॉक पोल की हैं जिससे उनकी पहचान हो सके। इसके बाद सारी पर्चियों को एक ब्लैक बॉक्स में रखा जाता है और उसे पोलिंग एजेंट्स के सामने ही सील कर दिया जाता है। पीठासीन अधिकारियों को निर्देश होता है कि ब्लैक बॉक्स में सील मॉक पोल की इन पर्चियों को ईवीएम और वीवीपैट मशीन के साथ स्ट्रॉन्ग रूम में जमा करना होता है। हालांकि, बिहार के समस्तीपुर में वीवीपैट की जो पर्चियां कचरे के ढेर में मिली हैं वो किसकी लापरवाही है, उसके पीछे का क्या मकसद है ये पुलिस की जांच में पता चलेगा।

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