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'हर घर में सरकारी नौकरी...', युवाओं के बीच तेजस्वी यादव का क्यों नहीं चला ये वादा? जानिए RJD के हार के बड़े कारण

 Published : Nov 15, 2025 08:56 pm IST,  Updated : Nov 15, 2025 09:01 pm IST

बिहार में 2025 का विधानसभा चुनाव राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने तेजस्वी यादव के नेतृत्व में लड़ा। तेजस्वी यादव का जादू बिहार में नहीं चल सका। जानिए बिहार में RJD के हार के बड़े कारण क्या हैं?

आरजेडी नेता तेजस्वी यादव- India TV Hindi
आरजेडी नेता तेजस्वी यादव Image Source : PTI

बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों ने महागठबंधन के सीएम उम्मीदवार तेजस्वी यादव के सपनों पर पानी फेर दिया। 2020 में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी RJD इस बार महज 25 सीटों पर सिमट गई। यह 2010 के बाद आरजेडी का दूसरा सबसे खराब प्रदर्शन है। इसके साथ ही तेजस्वी यादव के नेतृत्व क्षमता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। बिहार में आरजेडी की इतनी बड़ी हार क्यों हुई है? इसके पीछे के भी कई कारण बताए जा रहे हैं।

NDA को मिला प्रचंड बहुमत

2025 के बिहार विधानसभा चुनाव परिणाम में NDA ने 202 सीटों के साथ प्रचंड बहुमत हासिल किया है। इसी के साथ नीतीश कुमार दसवीं बार सीएम बन सकते हैं। बिहार की राजधानी पटना और दिल्ली में सीएम के नाम को लेकर बैठकों का दौर भी शुरू हो गया है। 

तेजस्वी के वादे पर विश्वसनीयता की कमी 

महागठबंधन से तेजस्वी यादव सीएम इन वेटिंग ही रह गए। उनका जादू बिहार चुनाव में नहीं चला है। विश्लेषकों के अनुसार, तेजस्वी की हार की सबसे बड़ी वजह युवा वोटरों का आधा-अधूरा समर्थन रहा है। बेरोजगारी के मुद्दे पर तेजस्वी यादव के वादे पर विश्वसनीयता की कमी देखी गई है। वहीं, महिला वोटरों का भारी झुकाव NDA की ओर रहा है।

रैलियों में उमड़ा था युवाओं का जन सैलाब

तेजस्वी यादव ने चुनाव का पूरा कैंपेन हर घर सरकारी नौकरी और 10 लाख सरकारी जॉब्स पर टिका रखा था। 2020 में ऐसे ही कुछ वादा उन्हें 75 सीटें दिला चुका था। इस बार भी युवा तेजस्वी की रैलियों में भारी संख्या में उमड़े, सोशल मीडिया पर ट्रेंड चले, लेकिन वोटिंग बूथ पर तेजस्वी यादव का जादू नहीं चल सका।

NDA की स्थिरता और विकास वाली बात पड़ी भारी

इसके पीछे का कारण युवा मतदाताओं का RJD और तेजस्वी के प्रति विश्वसनीयता की कमी मानी जा रही है। बिहार में चुनाव प्रचार के पहले दिन से ही युवाओं के अंदर NDA की स्थिरता और विकास वाली बात ज्यादा भारी पड़ी है। 

RJD को लेकर लोगों में जंगलराज का डर

पेपर लीक, भर्ती घोटालों पर तेजस्वी की चुप्पी और प्रदर्शनों में अनुपस्थिति ने युवाओं में निराशा पैदा की है। कई युवाओं कहा कि तेजस्वी ने वादा किया है, लेकिन नीतीश सरकार में बिहार के अंदर कुछ सुधार तो दिखा है। बिहार में जंगलराज का डर फिर से नहीं चाहते हैं।

महिला वोटरों ने NDA पर जताया भरोसा

बिहार चुनाव परिणाम में तेजस्वी की हार के पीछे महिला वोटर भी बड़ी वजह है। बिहार में महिलाओं का वोटिंग प्रतिशत 71.6 रहा है, जो पुरुषों से 9 प्रतिशत ज्यादा रहा। नीतीश कुमार की योजनाओं के चलते महिला वोटरों ने एनडीए के पक्ष में वोटिंग की है। नीतीश सरकार द्वारा महिलाओं के खाते में 10,000 रुपये ट्रांसफर किया जाना सबसे बड़ा गेम चेंजर साबित हुआ है। ये भी आरजेडी की हार के लिए बड़ी वजह रही है।

RJD से MY का वोटबैंक भी खिसका

सीमांचल जैसे मुस्लिम बाहुल्य एरिया में आरजेडी के MY वोट बैंक में सेंधमारी हो गई। सीमांचल में मुस्लिम वोट AIMIM ने काट लिए। सीमांचल में यादव वोट भी पूरी तरह एकजुट नहीं हो पाए। यही कारण रहा कि सीमांचल में एनडीए के प्रत्याशियों ने अच्छी जीत हासिल की है।

RJD में पारिवारिक अंतरकलह भी बनी वजह

इसके साथ ही आरजेडी के हार के अन्य बड़े कारणों में पार्टी का अंतरकलह भी शामिल है। जहां तेजस्वी यादव के साथ रहने वाले संजय यादव और रमीज की जोड़ी पर टिकट बेचने और पुराने नेताओं को साइडलाइन करने का आरोप है। तेज प्रताप ने तेजस्वी के साथ रहने वाले लोगों को कई बार जयचंद तक कहा था। चुनाव परिणाम में आरजेडी की हार के बाद लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने राजनीति छोड़ने का ऐलान कर दिया है। 

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