बिहार के पूर्णिया में पप्पू यादव ने खीर बांटकर लोगों के साथ अपनी खुशी जाहिर की। पप्पू यादव का कहना था कि पूर्णिया को एयरपोर्ट की सौगात मिलने की खुशी में वह खीर बांट रहे थे, लेकिन सियासत के गलियारों में पप्पू यादव की खुशी के अलग ही मायने निकाले जा रहे हैं। दरअसल, पप्पू यादव ने पीएम मोदी से मुलाकात भी की थी और प्रधानमंत्री ने भी हाथ जोड़कर उनका अभिवादन किया था। पप्पू यादव पीएम मोदी से मिलने मंच पर पहुंचे थे और उनकी बात सुनी गई। पीएम ने उनसे पूरे सम्मान के साथ बात की।
इस घटना को राहुल गांधी की वोटर अधिकार यात्रा से जोड़कर देखा जा रहा है। राहुल गांधी के मंच पर कई बार पप्पू यादव को जगह नहीं मिली थी। उन्हें राहुल की गाड़ी के पीछे चलने वाली बस में भी नहीं बैठाया गया था। पूर्णिया सांसद को कई बार अपमान का सामना करना पड़ा था। अब पीएम मोदी ने उन्हें पूरा सम्मान दिया तो पप्पू यादव खुशी से फूले नहीं समा रहे हैं।
पूर्णिया में 36,000 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं की शुरुआत
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बिहार के पूर्णिया जिले में लगभग 36,000 करोड़ रुपये की कई विकास परियोजनाओं की सोमवार को शुरुआत की। प्रधानमंत्री ने पूर्णिया हवाई अड्डे पर नवनिर्मित टर्मिनल भवन का भी उद्घाटन किया। मोदी ने पूर्णिया-कोलकाता मार्ग पर पहली उड़ान को हरी झंडी दिखाई। समारोह में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, कई केंद्रीय मंत्री, राज्य मंत्री, सांसद और विधायक उपस्थित थे। मोदी ने भागलपुर के पीरपैंती में 25,000 करोड़ रुपये की लागत वाली 3x800 मेगावाट की ताप विद्युत परियोजना की आधारशिला रखी। यह राज्य में निजी क्षेत्र का सबसे बड़ा निवेश है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "इसे ‘अल्ट्रा-सुपर क्रिटिकल’, कम उत्सर्जन वाली तकनीक के आधार पर डिजाइन किया गया है। यह परियोजना बिजली प्रदान करेगी और बिहार की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगी।"
कांग्रेस में पहले भी अपमान झेल चुके हैं पप्पू
पप्पू यादव ने लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान अपनी पार्टी का विलय कांग्रेस में कर दिया था। इसके बावजूद उन्हें टिकट नहीं मिला और आरजेडी ने इस सीट से अपना उम्मीदवार खड़ा किया। ऐसे में पप्पू यादव ने निर्दलीय चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। इसके बावजूद वह कांग्रेस के प्रति वफादार बने हुए हैं। उन्होंने यहां तक कहा कि अगर कांग्रेस कहेगी तो विधानसभा चुनाव लड़ लेंगे। हालांकि, कांग्रेस की तरफ से पप्पू यादव को अहमियत नहीं दी गई है। ऐसे में पीएम मोदी का उनके साथ मिलना कई संभावनाओं को जन्म देता है। पप्पू यादव हमेशा से ही बीजेपी के खिलाफ मुखर रहे हैं, लेकिन उनका इतिहास हमेशा से ही पाला बदलने का रहा है। ऐसे में किसी भी सियासी संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है।
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