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देहरादून: दिव्यांग बच्चों से हॉस्टल में हैवानियत, 2 ऑटिस्टिक छात्रों से कुकर्म, आरोपी ने सिगरेट से दागा

Edited By: Shakti Singh Published : Jun 02, 2025 12:06 pm IST, Updated : Jun 02, 2025 12:06 pm IST

जांच में पाया गया कि बोर्डिंग स्कूल दिल्ली की एक संस्था चला रही थी, लेकिन स्थानीय प्रशासन को इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई थी। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

Representative Image- India TV Hindi
Image Source : FILE PHOTO प्रतीकात्मक तस्वीर

उत्तराखंड के देहरादून में दो ऑटिस्टिक बच्चों के साथ हैवानियत का मामला सामने आया है। यहां एक स्कूल के हॉस्टल में काम करने वाले कर्मचारी ने दोनों बच्चों के साथ कुकर्म किया और उन्हें डराने के लिए उनके साथ मारपीट भी की। इस दौरान उन्हें कई जगह सिगरेट से दागा गया। बच्चों की मां उनसे मिलने आई तो बच्चों ने पूरा खुलासा किया। इसके बाद मां ने पुलिस में शिकायत की। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है और जांच शुरू कर दी है।

पीड़ित बच्चे उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद के रहने वाले हैं। एक की उम्र 9 साल और दूसरे की उम्र 13 साल है। दोनों को उनकी मां ने अप्रैल के महीने में देहरादून के आवासीय स्कूल में भर्ती कराया था। यह आवासीय स्कूल दिव्यांग बच्चों के लिए है। टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार स्कूल के एक कर्मचारी ने कथित तौर पर बच्चों के साथ मारपीट की, उनके शरीर पर कई जगह सिगरेट से दागा गया और उनके साथ कुकर्म किया।

शुक्रवार को हुआ खुलासा

शुक्रवार के दिन बच्चों की मां उनसे मिलने पहुंची और उन्हें देहरादून में एक दोस्त के ऑफिस ले गई, तो बच्चे रो पड़े और अपने साथ हो रही हैवानियत की कहानी बताई। इसके बाद उनकी मां ने शहर के एक पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई है। अपनी शिकायत में उन्होंने कहा कि आरोपी बच्चों को डराने के लिए सिगरेट से जलाता था, ताकि वे इसके बारे में किसी को बताने की हिम्मत न करें। आरोपी मोनू पाल 29 साल है। वह उत्तर प्रदेश के गाजीपुर का रहने वाला है। 

पुलिस ने दोनों बच्चों से की बात

देहरादून शहर एसपी प्रमोद कुमार ने रविवार को कहा कि बीएनएस धारा 64 (2) (बलात्कार) और 115 (2) (स्वेच्छा से चोट पहुंचाने) के साथ-साथ पोक्सो अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। कुमार ने कहा, "आरोपी बोर्डिंग स्कूल में रह रहा था। उसका पता लगा लिया गया है और उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है।" एसपी ने बताया कि पुलिस ने बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) के ट्रांसलेटर और राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एससीपीसीआर) की सहायता से दोनों भाइयों से बात की। उन्होंने कहा, "हमने बोर्डिंग स्कूल के अंदर लगे सीसीटीवी कैमरों की डीवीआर जब्त कर ली है। यह स्कूल तीन महीने पहले चार कमरों वाली आवासीय इमारत में खोला गया था। हम दोनों पीड़ितों के साथ रह रहे अन्य दो बच्चों के माता-पिता से भी संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं।"

परमिट के बिना चल रहा था हॉस्टल

एससीपीसीआर की अध्यक्ष गीता खन्ना ने कहा कि आरोपी के बिस्तर के पास एक ही कमरे में ऑटिज्म से पीड़ित चार बच्चे रह रहे थे। यह स्कूल एक महिला चला रही थी, जिसके पास परमिट नहीं था। वह बोर्डिंग स्कूल से कुछ किलोमीटर दूर विशेष बच्चों के लिए एक प्रीप स्कूल चला रही थी। वहां 15 बच्चे पढ़ रहे थे, जिनमें से चार ने हॉस्टल में रहने का विकल्प चुना। स्कूल दिल्ली में पंजीकृत एक ट्रस्ट द्वारा चलाया जा रहा था। उन्होंने स्थानीय प्रशासन को स्कूल या हॉस्टल के बारे में सूचित नहीं किया था। मालिक ने कहा कि आरोपी को 16 मई को नौकरी पर रखा गया था और तब से वह बच्चों के सात हैवानियत कर रहा था।

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