नई दिल्ली: दिल्ली की वायु गुणवत्ता बुधवार को लगातार दूसरे दिन ‘बेहद खराब’ रही और अगले 2 दिनों में इसके और भी खराब होने की आशंका है। अधिकारियों ने बुधवार को इस बारे में जानकारी देते हुए कहा कि भले ही दिवाली पर कोई आतिशबाजी नहीं की जाए, लेकिन फिर भी वायु गुणवत्ता खराब रहने की पूरी आशंका है। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की वायु गुणवत्ता पूर्वानुमान एजेंसी ‘सफर’ ने कहा कि अगर पटाखे जलाए जाते हैं तो 5 और 6 नवंबर को वायु गुणवत्ता ‘गंभीर’ हो सकती है।
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भारत मौसम विज्ञान विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि मॉडल अनुमान AQI को ‘उच्च उत्सर्जन के साथ भी’ ‘गंभीर’ श्रेणी तक पहुंचने का संकेत नहीं देते है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार, राजधानी में 24 घंटे का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 314 दर्ज किया गया। मंगलवार को यह 303 और सोमवार को 281 था। दिल्ली के पड़ोसी शहरों में भी एक्यूआई बेहद खराब श्रेणी में रहा। यह फरीदाबाद में 337, गाजियाबाद में 330, नोएडा में 327 दर्ज किया गया।
शून्य और 50 के बीच AQI को 'अच्छा', 51 और 100 के बीच 'संतोषजनक', 101 और 200 के बीच 'मध्यम', 201 और 300 के बीच 'खराब', 301 और 400 के बीच 'बहुत खराब', तथा 401 और 500 के बीच 'गंभीर' माना जाता है। ‘सफर’ ने कहा कि बुधवार को दिल्ली के पीएम 2.5 प्रदूषण में 8 प्रतिशत प्रदूषण के लिए पराली जलाये जाने की 3,271 घटनाएं जिम्मेदार रही।
उसने कहा कि यह गुरुवार को 20 प्रतिशत और शुक्रवार और शनिवार को 35 से 40 प्रतिशत तक बढ़ने की आशंका है, क्योंकि हवा की दिशा उत्तर पश्चिम में बदल रही है। उत्तर-पश्चिमी हवाएं पंजाब और हरियाणा में खेतों में पराली जलाए जाने से उत्पन्न धुआं राष्ट्रीय राजधानी की ओर ले आती है।