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दिल्ली में अस्थायी तौर पर बंद होंगे टोल प्लाजा? प्रदूषण पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने 1 हफ्ते में फैसला लेने को कहा

दिल्ली-NCR में प्रदूषण के मामले पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में बड़ी सुनवाई हुई है। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान MCD से इस बात पर 1 हफ्ते में फैसला लेने को कहा है कि दिल्ली के टोल प्लाजा को अस्थायी तौर पर बंद किया जाए।

Reported By : Atul Bhatia Edited By : Subhash Kumar Published : Dec 17, 2025 03:51 pm IST, Updated : Dec 17, 2025 11:45 pm IST
supreme court delhi pollution- India TV Hindi
Image Source : PTI सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली प्रदूषण पर सुनवाई। (फाइल फोटो)

दिल्ली-NCR में प्रदूषण के मामले पर सुप्रीम कोर्ट में तीन जजों की बेंच ने बुधवार को सुनवाई की है। सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने गुड़गांव रोड के जाम पर टिप्पणी करते हुए कहा कि लोग जाम के चलते फंक्शन में नहीं जाते। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के 9 टोल प्लाज़ा को अस्थायी रूप से निलंबित करने पर विचार करने का निर्देश जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट ने MCD से कहा है कि दिल्ली के 9 टोल प्लाजा को अस्थायी अवधि के लिए निलंबित करने की संभावना पर विचार किया जाए।

1 हफ्ते में फैसला लेने का निर्देश

अदालत ने निर्देश दिया है कि दिल्ली के 9 टोल प्लाजा को अस्थायी तौर पर बंद करने के संबंध में 1 सप्ताह के भीतर निर्णय लिया जाए और लिया गया फैसला रिकॉर्ड पर रखा जाए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि टोल प्लाज़ा पर वाहनों की लंबी कतारों से प्रदूषण और उत्सर्जन बढ़ता है, जिसे देखते हुए यह कदम जनहित में हो सकता है।

स्कूलों को बंद करने के मुद्दे पर भी बहस

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान दिल्ली में स्कूलों को बंद करने के मुद्दे पर भी चर्चा हुई। वरिष्ठ वकील मेनका गुरुस्वामी ने कहा कि कक्षा 5 तक के स्कूल बंद कर दिए गए हैं। बच्चों की मिड-डे मील योजना भी बंद हो रही है। इस पर CJI ने कहा कि अगर मिड-डे मील योजना बंद नहीं की गई, तो लोग बच्चों को जबरन स्कूल भेजने लगेंगे, जबकि स्कूल बंद हैं।

CJI सूर्यकांत ने स्कूलों के मुद्दे पर कहा कि ये सब अस्थायी (कुछ समय के लिए) किए गए फैसले हैं और ये नीति से जुड़े मामले हैं। इस पर एक और अर्जी भी लगी है कि स्कूल बंद ही क्यों किए जाएं। इस मुद्दे पर विरोधाभासी दावे सामने आ रहे हैं। इसलिए बेहतर होगा कि ऐसे फैसले नीति बनाने वालों (सरकार/प्रशासन) पर ही छोड़ दिए जाएं। वकील गुरुस्वामी ने कहा कि बच्चे को घर पर बैठाकर आप उसकी सुरक्षा कैसे करेंगे? क्या उनके घरों में वैक्यूम क्लीनर हैं? मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि अब आप हमसे यह राय जानना चाहते हैं कि स्कूल जाना या स्कूल से आना जोखिम का कारण नहीं है। एएसजी भाटी ने कहा कि मेरा मानना है कि वे कक्षा 1 से 5 तक के लिए हाइब्रिड विकल्प की मांग कर रहे हैं। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि अगर कुछ माता-पिता बच्चे को स्कूल ले जाते हैं और वहीं छोड़ देते हैं, तो क्या आपको नहीं लगता कि इसमें भी जोखिम है।

हमें दीर्घकालिक समाधान के बारे में सोचना होगा- CJI

सीनियर एडवोकेट सिद्धार्थ लूथरा ने हाइब्रिड विकल्प चाहने वाले अभिभावकों के लिए कहा कि जिनके पास सामर्थ्य है, उनके बच्चों को यह सुविधा मिलेगी। एएसजी ने कहा कि यह एक मजबूरी का विकल्प है। यह स्थायी नहीं है। इसीलिए ग्रैप में हाइब्रिड विकल्प दिया गया था। CJI ने कहा कि पूरी समस्या का समाधान करने और स्वस्थ वातावरण बनाने के लिए, आप सभी सही कह रहे हैं, हमें दीर्घकालिक समाधान के बारे में सोचना होगा। स्कूल जाने वाले छोटे बच्चे, पार्क जाने वाले वरिष्ठ नागरिक, सभी एक ही समस्या का सामना करते हैं।

बच्चों की जान खतरे में- एएसजी

एएसजी ने कहा कि रविवार से ही गंभीर आपातकालीन स्थिति बनी हुई है, बच्चों की जान खतरे में है। हमने सड़कों पर भीड़ कम करने का भी प्रयास किया है। सीजेआई ने कहा कि वैसे भी स्कूल में छुट्टियां रहेंगी, हम केवल यही प्रार्थना कर सकते हैं कि छुट्टियों के बाद प्रदूषण कम हो जाए। गुरुस्वामी ने तर्क दिया कि गरीब परिवारों के बच्चे प्रदूषण में योगदान नहीं दे रहे हैं, वे पैदल स्कूल जाते हैं।

लेबर को समय पर पैसा मिलेगा, तभी उनके काम आएगा- CJI

एएसजी ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि 2.5 लाख लेबर को रजिस्टर किया गया है और 35 हजार का वेरिफिकेशन हुआ है। बैंक में सीधे इन्हें पैसा भेजा जाएगा। इस पर सीजेआई ने कहा कि लेबर को समय पर पैसा मिलेगा, तभी उनके काम आएगा। एएसजी भाटी ने कहा कि आधार सीडेड खातों में पैसा भेजा जा रहा है और अन्य की व्यवस्था की जा रही है।

इतने प्रदूषण में टोल से आय नहीं चाहिए- सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अगले साल से ये तय करें कि एक अक्टूबर से 31 जनवरी तक कोई टोल नहीं लिया जाएगा। CJI ने कहा कि इतने प्रदूषण में टोल से आय नहीं चाहिए। हम अगले वर्ष 31 जनवरी तक बिल्कुल भी टोल प्लाजा न लगाने की एक ठोस योजना पर सहमति बनाना चाहते हैं। मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने इस मामले में नोटिस जारी करने का निर्देश दिया। वरिष्ठ वकील ने NHAI (नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया) की ओर से नोटिस स्वीकार कर लिया।

MCD के 9 टोल बूथों को शिफ्ट किया जाए- सुप्रीम कोर्ट

कोर्ट ने NHAI से यह भी कहा है कि वह इस बात पर विचार करे कि दिल्ली में मौजूद MCD के 9 टोल वसूली बूथों को ऐसी जगहों पर शिफ्ट किया जाए, जहां NHAI के कर्मचारी तैनात किए जा सकें। टोल से मिलने वाली आय का एक हिस्सा MCD को दिया जाए, ताकि टोल हटाने या शिफ्ट करने से होने वाले अस्थायी नुकसान की भरपाई हो सके। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि सभी राष्ट्रीय राजमार्गों पर, यदि टोल प्लाजा मौजूद है तो 5-10 किलोमीटर के बजाय 50 किलोमीटर के बाद टोल प्लाजा बनाया जा सकता है। यदि प्लाजा 50 किलोमीटर के बाद बनाया जाता है, तो कुछ यातायात को डायवर्ट किया जा सकता है।

स्कूलों को बंद करने पर हस्तक्षेप से इनकार

सुप्रीम कोर्ट ने स्कूलों को बंद करने के मुद्दे पर हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है। सीएक्यूएम को अक्टूबर से जनवरी की अवधि में टोल हटाने की मांग पर नोटिस जारी किया गया है। CJI ने कहा कि नोटिस जारी करें, हमने स्कूलों को बंद करने और ऑनलाइन कक्षाएं संचालित करने के निर्देश के संबंध में वरिष्ठ वकील की बात सुनी है। हमें सूचित किया गया है कि नर्सरी से कक्षा 5 तक के बच्चों के स्कूल अस्थायी रूप से बंद हैं और शीतकालीन अवकाश जल्द ही शुरू होने वाला है, इस मामले में न्यायालय के हस्तक्षेप की कोई आवश्यकता नहीं है।

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