बड़े पर्दे पर आए दिन कोई नई फिल्म रिलीज होती है, लेकिन सभी को दर्शकों से एक जैसा रिस्पॉन्स नहीं मिलता। कई बार बड़े-बड़े स्टार्स की फिल्में भी दर्शकों को तरसती नजर आती हैं। ऐसा ही कुछ इन दिनों प्रभास स्टारर 'द राजा साब' के साथ भी देखने को मिल रहा है। फिल्म ने पहले दिन तो बॉक्स ऑफिस को धुआं-धुआं कर दिया और अब 70 साल के सुपरस्टार चिरंजीवी की 'मना शंकरा वारा प्रसाद गारू' के सामने इसकी रफ्तार धीमी पड़ गई है। इस फिल्म की तेज रफ्तार से घटती कमाई ने लोगों को इसलिए भी हैरान कर दिया है कि पहले ही दिन फिल्म ने वर्ल्डवाइड 100 करोड़ क्लब में एंट्री कर ली थी और अब 9 दिनों में भी 200 करोड़ क्लब में एंट्री नहीं कर पाई है।
नहीं चला 1000 करोड़ी फिल्म के स्टार का जादू
प्रभास की फिल्म का जब ऐलान हुआ तो दर्शकों से इसे जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला। कई ने तो यहां तक दावा कर दिया कि प्रभास की ये फिल्म भी 1000 करोड़ क्लब में एंट्री मार लेगी। लेकिन, 9 जनवरी 2026 को रिलीज हुई ये फिल्म अब चींटी की चाल चलती नजर आ रही है और अब तक इसने 200 करोड़ का आंकड़ा भी पार नहीं किया है।
भारी-भरकम बजट में बनी 'द राजा साब'
द राजा साब के बजट की बात की जाए तो मेकर्स ने प्रभास स्टारर इस फिल्म पर 400 से 450 करोड़ की भारी-भरकम रकम खर्च की है। पहले दिन तो फिल्म ने घरेलू बॉक्स ऑफिस पर 53 और दुनियाभर में 100 करोड़ से ज्यादा कमा लिए, लेकिन दूसरे दिन के आते ही इसके बुरे दिन भी शुरू हो गए। दूसरे ही दिन फिल्म की कमाई में 50 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आ गई और ये 26 करोड़ का ही कलेक्शन कर पाई और दसवें दिन के आते-आते कमाई 2.50 करोड़ पर पहुंच गई। फिल्म को संडे का भी कोई फायदा नहीं मिला। भारत में इसका कुल कलेक्शन 139.25 और दुनियाभर में 196.65 करोड़ ही पहुंच सका है।
रिलीज से पहले डायरेक्टर ने किया था ये दावा
'द राजा साब' की रिलीज से पहले फिल्म के डायरेक्टर मारुति ने दावा किया था कि रिबेल स्टार की ये फिल्म दर्शकों का खूब मनोरंजन करेगी। उन्होंने यहां तक कह दिया था कि अगर दर्शक फिल्म से निराश हुए तो वे घर आकर उनसे सवाल कर सकते हैं। इसी के साथ उन्होंने अपना एड्रेस भी शेयर कर दिया। इस दौरान स्टेज पर खड़े प्रभास हंसते दिखे।
फ्लॉप शब्द पर द राजा साब के डायरेक्टर की आपत्ति
फिल्म की रिलीज के दूसरे दिन मारुति ने एक नोट शेयर किया, जिसमें उन्होंने FLOP शब्द के इस्तेमाल पर नाराजगी जाहिर की और कहा कि दर्शकों ने इसे हल्के मनोरंजन के तौर पर देखा, जबकि इसकी कहानी कई स्तरों पर बनी है। उन्होंने कहा- 'एक फिल्म के पीछे सिर्फ तीन घंटे नहीं, बल्कि तीन साल की मेहनत, रचनात्मक संघर्ष और मानसिक दबाव होता है। जब उस मेहनत को फ्लॉप कहकर खारिज किया जाता है तो दर्द होता है।'
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