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Explainer: बाढ़ जैसी आपदा में कितना कारगर है ड्रोन और AI का इस्तेमाल? क्या हैं चुनौतियां?

बाढ़ जैसी आपदाओं में ड्रोन और AI तकनीक तेजी से मददगार साबित हो रही है, लेकिन सटीक पहचान, डेटा की कमी और GPS की गलतियां अभी बड़ी चुनौतियां हैं। इंसानों और AI के तालमेल से राहत कार्यों को बेहतर तरीके से अंजाम दिया जा सकता है।

Edited By: Vineet Kumar Singh @VickyOnX
Published : Jul 17, 2025 11:26 am IST, Updated : Jul 17, 2025 11:26 am IST
AI in disaster response, drones in flood rescue, flood victim detection AI- India TV Hindi
Image Source : AP बाढ़ जैसी आपदाओं में AI और ड्रोन का इस्तेमाल बढ़ता जा रहा है।

ह्यूस्टन: बाढ़ जैसी आपदा के बाद लापता लोगों को ढूंढने के लिए ड्रोन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। ये तकनीकें भले ही इंसानों के मुकाबले तेजी से काम करती हैं, लेकिन अभी भी कई चुनौतियों की वजह से ये पूरी तरह भरोसेमंद नहीं हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि AI और इंसानों के तालमेल से ही बाढ़ पीड़ितों को खोजने में बेहतर नतीजे मिल सकते हैं। आज हम आपको बताएंगे कि ड्रोन और AI आपदा के समय कितने कारगर साबित हो सकते हैं और वे कौन सी चुनौतियां हैं जिनका फिलहाल हम सामना कर रहे हैं।

क्या है ड्रोन और AI की ताकत?

ड्रोन ऊंचाई से तस्वीरें खींचकर आपदा प्रभावित इलाकों का जायजा लेते हैं। 20 मिनट की छोटी सी उड़ान में भी एक ड्रोन आराम से 800 से ज्यादा हाई-रिजॉल्यूशन तस्वीरें ले सकता है। अगर इस तरह की 10 उड़ानें हों तो आराम से 8000 से ज्यादा तस्वीरें ली जा सकती हैं। इंसान के लिए इन तस्वीरों को देखने में घंटों लग सकते हैं। उदाहरण के लिए, अगर हर तस्वीर को देखने में 10 सेकंड भी लगें तो सारी तस्वीरों को देखने के लिए 22 घंटे से ज्यादा वक्त चाहिए। 

इतनी सारी तस्वीरों को बगैर गलती किए लगातार देखना इंसानों के लिए मुश्किल है, और यहीं AI की भूमिका अहम हो जाती है। AI का क्लासिफायर सिस्टम एक सेकंड से भी कम समय में तस्वीरों को स्कैन कर सकता है। यह उन तस्वीरों को प्राथमिकता देता है, जिनमें पीड़ितों के होने के संकेत मिलते हैं, जैसे कि कचरा, बैग या अन्य मानवीय गतिविधियों के निशान। इसके बाद ये तस्वीरें सर्च-एंड-रेस्क्यू टीम को भेजी जाती हैं, जो GPS लोकेशन की मदद से उस जगह की जांच करती हैं।

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Image Source : AP
आने वाले दिनों में AI आपदा राहत कार्यों में बेहतर नतीजे दे सकता है।

AI के इस्तेमाल में चुनौतियां क्या हैं?

हालांकि AI तेजी से काम करता है, लेकिन यह अभी भी पूरी तरह सटीक नहीं है। कई बार यह गलत संकेत देता है, जिससे सर्च टीम को गलत जगहों पर भेज दिया जाता है। बाढ़ पीड़ितों को खोजने में 3 बड़ी चुनौतियां हैं:

  1. पीड़ितों की पहचान मुश्किल: बाढ़ में लोग अक्सर मलबे में फंसे, पानी में डूबे या कीचड़ से ढके होते हैं। सामान्य अपराधी या भगोड़े की तुलना में उनकी तस्वीरें अलग होती हैं, जिससे AI के लिए इन्हें पहचानना मुश्किल हो जाता है।
  2. ट्रेनिंग डेटा की कमी: AI को कुछ भी सिखाने के लिए डेटा चाहिए होता, लेकिन बाढ़ पीड़ितों की हवाई तस्वीरों का पर्याप्त डेटासेट उपलब्ध नहीं है। इससे AI की सटीकता कम हो जाती है।
  3. GPS की गलती: ड्रोन की तस्वीरें अक्सर तिरछी होती हैं, न कि सीधे ऊपर से। इससे GPS लोकेशन सटीक नहीं होती, और सर्च टीम को सही जगह तक पहुंचने में दिक्कत होती है।

AI और इंसानों का तालमेल जरूरी

रिसर्चर्स का कहना है कि AI और इंसानों के मिलकर काम करने से बेहतर नतीजे मिल सकते हैं। बाढ़ में लोग अक्सर मलबे या पेड़-पौधों के बीच फंसे होते हैं। AI ऐसे मलबे को ढूंढ सकता है, जहां पीड़ित होने की संभावना हो। उदाहरण के लिए, यह आर्टिफिशयल रंगों, सीधी रेखाओं या 90 डिग्री के कोनों वाले मलबे को पहचान सकता है, जिनसे ऐसा इशारा मिलता है कि ये चीजें इंसानों के द्वारा बनाई गई हैं।  इसके बाद सर्च-एंड-रेस्क्यू टीमें इन जगहों को प्राथमिकता दे सकती हैं। शुरुआती कुछ घंटों में, जब जिंदा बचे लोगों को बचाने का मौका होता है, यह तरीका बहुत कारगर साबित हो सकता है।

AI को और बेहतर करने की जरूरत

एक्सपर्ट्स का मानना है कि AI को और बेहतर करने की जरूरत है। अगर ट्रेनिंग डेटा में सुधार हो, और GPS लोकेशन की सटीकता बढ़े, तो ड्रोन और AI मिलकर बाढ़ पीड़ितों को खोजने में और कारगर हो सकते हैं। फिलहाल, इंसान और AI का तालमेल ही सबसे अच्छा रास्ता है और यह बात टेक्सास में आई बाढ़ में साबित भी हुई है।  यह तकनीक भले ही अभी परफेक्ट न हो, लेकिन यह बाढ़ जैसी आपदाओं में उम्मीद की किरण जरूर है। सही दिशा में काम करके, हम इसे और बेहतर बना सकते हैं, ताकि ज्यादा से ज्यादा जिंदगियां बचाई जा सकें। (द कन्वर्सेशन)

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