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Explainer: क्यों आसान नहीं होगी नए उपराष्ट्रपति की राह? सीपी राधाकृष्णन के सामने होंगी ये बड़ी चुनौतियां

 Written By: Vineet Kumar Singh @VickyOnX
 Published : Sep 10, 2025 12:48 pm IST,  Updated : Sep 10, 2025 12:48 pm IST

भारत के नए उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने शानदार जीत दर्ज की है लेकिन उनकी आगे की राह आसान नहीं होगी। राज्यसभा में शांति बनाए रखना, राजनीतिक निष्पक्षता दिखाना और सत्तापक्ष-विपक्ष के बीच संतुलन बनाना उनकी प्रमुख चुनौतियां होंगी।

CP Radhakrishnan, CP Radhakrishnan Vice President- India TV Hindi
सीपी राधाकृष्णन ने उपराष्ट्रपति चुनावों में बड़ी जीत दर्ज की। Image Source : PTI

नई दिल्ली: किशोरावस्था में ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी कि RSS के स्वयंसेवक बनने वाले और जनसंघ से अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू करने वाले चंद्रपुरम पोन्नुसामी राधाकृष्णन मंगलवार को देश के 15वें उपराष्ट्रपति चुने गए। वह तमिलनाडु में लंबे समय तक भारतीय जनता पार्टी का प्रमुख चेहरा रहे हैं। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के उम्मीदवार राधाकृष्णन ने विपक्ष के उम्मीदवार बी. सुदर्शन रेड्डी को 152 वोटों के बड़े अंतर से हराया। राधाकृष्णन को प्रथम वरीयता के 452 और विपक्ष के प्रत्याशी बी. सुदर्शन रेड्डी को 300 वोट हासिल हुए।

राधाकृष्णन के सामने क्या हैं बड़ी चुनौतियां

राधाकृष्णन की जीत के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, पूर्व उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ तथा कई अन्य प्रमुख नेताओं ने उन्हें बधाई दी। हालांकि इतनी शानदार जीत हासिल करने के बाद भी राधाकृष्णन की आगे की राह आसान नहीं होने वाली है। उनके सामने कई ऐसी चुनौतियां हैं जिन पर उन्हें बहुत मेहनत करनी होगी। आज हम आपको उन्हीं में से कुछ सबसे बड़ी चुनौतियों के बारे में बताने जा रहे हैं:

राजनीतिक निष्पक्षता का दबाव: उपराष्ट्रपति को सत्ता और विपक्ष के बीच तटस्थ रहना होता है। विपक्ष अक्सर इस पद पर आसीन लोगों के खिलाफ पक्षपात का आरोप लगाता रहता है। राधाकृष्णन को अपनी निष्पक्षता साबित करने के लिए हर कदम पर सावधानी बरतनी होगी।

राज्यसभा में शांति बनाए रखना: राज्यसभा में सांसदों के बीच तीखी नोक-झोंक और अव्यवस्था उपराष्ट्रपति की भूमिका को मुश्किल बना देती है। कई मौकों पर ऐसा हुआ है जब विपक्षी सांसदों के निलंबन जैसे कदमों से विवाद हुआ है। राधाकृष्णन को ऐसी स्थिति में धैर्य और कड़ाई का संतुलन बनाना होगा।

संसदीय गरिमा की रक्षा: उपराष्ट्रपति का पद संवैधानिक गरिमा का प्रतीक होता है। इस पद पर आसीन व्यक्ति को अपने कर्मों के द्वारा इस गरिमा की रक्षा के लिए बहुत ध्यान देना होता है। राधाकृष्णन को इस गरिमा को बनाए रखना होगा।

सत्ता और विपक्ष के बीच संतुलन: राधाकृष्णन के सामने सबसे बड़ी कसौटी होगी सत्ता और विपक्ष के बीच संतुलन बनाना। उनकी RSS और BJP में काम करने की मजबूत पृष्ठभूमि है, और अच्छा सियासी अनुभव है। लेकिन यही पृष्ठभूमि विपक्ष के लिए संदेह का कारण भी बन सकती है। उन्हें सत्तापक्ष और विपक्ष में संतुलन बनाना होगा।

CP Radhakrishnan, CP Radhakrishnan Vice President
Image Source : PTIपीएम नरेंद्र मोदी से मुलाकात करते सीपी राधाकृष्णन।

राधाकृष्णन के पास सुनहरा मौका भी

इन तमाम चुनौतियों के बीच सी.पी. राधाकृष्णन के सामने उपराष्ट्रपति के तौर पर संवैधानिक जिम्मेदारियों को निभाने का सुनहरा मौका भी है। उनकी भूमिका न केवल संसद की कार्यवाही को सुचारु बनाने की है, बल्कि देश की संवैधानिक और कूटनीतिक गरिमा को बढ़ाने की भी है। अगर वह निष्पक्षता, धैर्य और संवैधानिक मूल्यों के हिसाब से काम करेंगे, तो निश्चित रूप से सत्ता और विपक्ष के बीच संतुलन साधने में कामयाब होंगे, और इस पद के लिए एक नजीर बनेंगे।

क्या होती है उपराष्ट्रपति की भूमिका?

उपराष्ट्रपति राज्यसभा का पदेन सभापति होता है, जो संसद के उच्च सदन की कार्यवाही को सुचारु रूप से चलाने का जिम्मा संभालता है। वह सत्र के दौरान अनुशासन बनाए रखता है, चर्चाओं को नियंत्रित करता है और अगर कोई विधेयक या प्रस्ताव असंवैधानिक हो तो उसे रोकने की ताकत रखता है। इसके अलावा, राष्ट्रपति की अनुपस्थिति, बीमारी या पद रिक्त होने पर उपराष्ट्रपति कार्यवाहक राष्ट्रपति की भूमिका निभाता है, जो 6 महीने तक रह सकती है। यह पद देश की संवैधानिक निरंतरता को बनाए रखने में अहम है।

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