Published : Dec 23, 2025 08:32 pm IST, Updated : Dec 23, 2025 08:33 pm IST
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कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने कर्मचारियों की सुविधा के लिए EPFO 3.0 पेश किया है। EPFO 3.0 के तहत कर्मचारियों के लिए पीएफ खाते से आंशिक निकासी के नियमों में बदलाव किए गए हैं। केंद्रीय न्यासी बोर्ड ने 13 अक्टूबर को हुई एक अहम मीटिंग में नियमों में बदलाव का फैसला लिया, जिसकी अध्यक्षता केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मंडाविया ने की थी। यहां हम जानेंगे कि EPFO 3.0 के तहत, पीएफ खाते से आंशिक निकासी के नियमों में क्या-क्या बदलाव हुए हैं।
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बेरोजगारी: पुराने नियमों के तहत कर्मचारी अगर लगातार 1 महीने तक बेरोजगार है तो वो अपने PF खाते में जमा 75% और बाकी 25% दो महीने बाद निकाल सकता था। नए नियमों में कर्मचारी अपने खाते में जमा पैसों का 75% हिस्सा तुरंत निकाल सकता है, जबकि पूरी निकासी लगातार 12 महीने तक नौकरी न होने पर की जा सकती है।
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नौकरी छूटने के बाद पेंशन निकासी: पुराने नियमों में बेरोजगारी के दो महीने बाद पेंशन के पैसे निकाले जा सकते थे। लेकिन, अब नए नियमों के तहत, कर्मचारी अब अपनी पेंशन के पैसों को 36 महीने बाद ही निकाल सकते हैं।
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कंपनी बंद होने की स्थिति: पुराने नियमों में कंपनी बंद होने की स्थिति में कर्मचारी अपने खाते में जमा सारे पैसे निकाल सकता था। अब, EPF कॉर्पस का सिर्फ 75% निकाला जा सकता है, जबकि 25% को न्यूनतम बैलेंस के रूप में रखना होगा।
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मेडिकल खर्च: पहले, कर्मचारी 6 महीने की BW (बेसिक वेज) और DA (महंगाई भत्ता) या कर्मचारी का अंशदान, जो भी कम हो, निकाल सकते थे और ये एक से ज्यादा बार भी किया जा सकता था। नए नियम इस संरचना को बनाए रखते हैं, लेकिन 12 महीने की समान सेवा शर्त के तहत आते हैं।
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शिक्षा और विवाह: पुराने नियमों के तहत, EPF सब्सक्राइबर 7 साल की नौकरी के बाद अपने योगदान का 50% तक निकाल सकते थे। नौकरी के दौरान तीन बार (शिक्षा के लिए) और दो बार (शादी के लिए) पैसे निकालने की अनुमति थी। नए नियमों के तहत, फ्रीक्वेंसी लिमिट बढ़ा दी गई है। नौकरी के दौरान शिक्षा के लिए 10 बार तक और शादी से जुड़े खर्चों के लिए 5 बार तक पैसे निकाले जा सकते हैं।
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घर खरीदना या बनवाना: पुराने नियमों में इसकी अनुमति 24-36 महीने की नौकरी के बाद मिलती थी, जो बेसिक सैलरी + DA या कंस्ट्रक्शन की लागत, दोनों में से जो भी कम हो और सिर्फ एक बार थी। अब, नए नियम के साथ, सभी आंशिक निकासी के लिए कम से कम 12 महीने की नौकरी जरूरी है।