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शहर की हवा बना रही है आपको बूढ़ा, जानें कैसे करें स्किन का बचाव?

Written By: Poonam Yadav @R154Poonam
Published : Jan 26, 2026 10:36 pm IST,  Updated : Jan 26, 2026 10:43 pm IST
स्किन की केयर के लिए लोग रोज़ सनस्क्रीन, मॉइस्चराइज़र, सीरम और टोनर का अच्छी तरह इस्तेमाल करते हैं। इसके बाद भी चेहरा बेजान, रूखा या झुर्रियों भरा दिखने लगता है जिससे स्किन पर एजिंग तेजी से हावी होने लगती है। एजिंग के पीछे प्रदूषण भी ज़िम्मेदार हो सकता है। हवा में मौजूद प्रदूषक कण धीरे-धीरे स्किन को नुकसान पहुंचाते हैं। चलिए जानते हैं प्रदूषण स्किन को कैसे नुकसान पहुंचाता है और बचाव के लिए क्या करें?
1/5 Image Source : unsplash/freepik
स्किन की केयर के लिए लोग रोज़ सनस्क्रीन, मॉइस्चराइज़र, सीरम और टोनर का अच्छी तरह इस्तेमाल करते हैं। इसके बाद भी चेहरा बेजान, रूखा या झुर्रियों भरा दिखने लगता है जिससे स्किन पर एजिंग तेजी से हावी होने लगती है। एजिंग के पीछे प्रदूषण भी ज़िम्मेदार हो सकता है। हवा में मौजूद प्रदूषक कण धीरे-धीरे स्किन को नुकसान पहुंचाते हैं। चलिए जानते हैं प्रदूषण स्किन को कैसे नुकसान पहुंचाता है और बचाव के लिए क्या करें?
बैरियर का कमजोर होना: हवा में मौजूद कण स्किन के नेचुरल लिपिड बैरियर को कमजोर कर देते हैं, जिससे नमी बाहर निकल जाती है और डिहाइड्रेशन होता है। इससे स्किन रूखी, सेंसिटिव और कमजोर हो जाती है। फिर यह स्किन की उम्र बढ़ने की प्रोसेस को तेज़ कर देता है।
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बैरियर का कमजोर होना: हवा में मौजूद कण स्किन के नेचुरल लिपिड बैरियर को कमजोर कर देते हैं, जिससे नमी बाहर निकल जाती है और डिहाइड्रेशन होता है। इससे स्किन रूखी, सेंसिटिव और कमजोर हो जाती है। फिर यह स्किन की उम्र बढ़ने की प्रोसेस को तेज़ कर देता है।
इलास्टिसिटी का टूटना: ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस हवा के हानिकारक कणों, प्रदूषण और जीवनशैली के कारण कोलेजन और इलास्टिन को तेजी से तोड़ता है, जिससे कम उम्र में ही त्वचा ढीली होकर झुर्रियां आने लगती हैं। ये प्रोटीन त्वचा को टाइट और स्मूद रखते हैं, इसलिए 30 वर्ष की उम्र से पहले ही कोलेजन सप्लीमेंट्स लेना कम उम्र में ही एंटी-एजिंग की तरफ झुकाव का संकेत है, जो त्वचा के लिए अच्छा नहीं है।
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इलास्टिसिटी का टूटना: ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस हवा के हानिकारक कणों, प्रदूषण और जीवनशैली के कारण कोलेजन और इलास्टिन को तेजी से तोड़ता है, जिससे कम उम्र में ही त्वचा ढीली होकर झुर्रियां आने लगती हैं। ये प्रोटीन त्वचा को टाइट और स्मूद रखते हैं, इसलिए 30 वर्ष की उम्र से पहले ही कोलेजन सप्लीमेंट्स लेना कम उम्र में ही एंटी-एजिंग की तरफ झुकाव का संकेत है, जो त्वचा के लिए अच्छा नहीं है।
सूजन और बंद पोर्स की समस्या: प्रदूषण आमतौर पर हल्की सूजन को ट्रिगर करता है, जिससे मुंहासे की स्थिति खराब हो जाती है। इससे रेडनेस, स्किन का रंग असमान होना और गंभीर जलन होती है। छोटे कण आमतौर पर पोर्स के अंदर फंस जाते हैं, तेल और गंदगी के साथ मिल जाते हैं, जिससे गंभीर ब्लैकहेड्स, बड़े पोर्स और ब्रेकआउट होते हैं।
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सूजन और बंद पोर्स की समस्या: प्रदूषण आमतौर पर हल्की सूजन को ट्रिगर करता है, जिससे मुंहासे की स्थिति खराब हो जाती है। इससे रेडनेस, स्किन का रंग असमान होना और गंभीर जलन होती है। छोटे कण आमतौर पर पोर्स के अंदर फंस जाते हैं, तेल और गंदगी के साथ मिल जाते हैं, जिससे गंभीर ब्लैकहेड्स, बड़े पोर्स और ब्रेकआउट होते हैं।
ऐसे में अपनी स्किन को एजिंग से बचाने के लिए दिन में दो बार, एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर क्लींजर से स्किन की सफाई करें। यह फंसे हुए प्रदूषकों को हटाते हैं। इसके बाद, विटामिन C, विटामिन E, नियासिनमाइड, या ग्रीन टी के अर्क वाला सीरम लगाएं, जो आमतौर पर फ्री रेडिकल्स को न्यूट्रलाइज़ करता है। ऐसे मॉइस्चराइज़र का इस्तेमाल करना शुरू करें जिनमें सेरामाइड्स और हाइलूरोनिक एसिड हो, जो स्किन बैरियर को मजबूत करते हैं।
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ऐसे में अपनी स्किन को एजिंग से बचाने के लिए दिन में दो बार, एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर क्लींजर से स्किन की सफाई करें। यह फंसे हुए प्रदूषकों को हटाते हैं। इसके बाद, विटामिन C, विटामिन E, नियासिनमाइड, या ग्रीन टी के अर्क वाला सीरम लगाएं, जो आमतौर पर फ्री रेडिकल्स को न्यूट्रलाइज़ करता है। ऐसे मॉइस्चराइज़र का इस्तेमाल करना शुरू करें जिनमें सेरामाइड्स और हाइलूरोनिक एसिड हो, जो स्किन बैरियर को मजबूत करते हैं।
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