क्या आपने कभी सुना है कि कोई 5539 बेटियों और दामाद के पिता हो सकते हैं? आज हम आपको बताते है सूरत के एक ऐसे उद्योगपति की कहानी जो 5539 पिता की छत्रछाया खो चुकी निराधार बेटियों की शादी करवाते हैं। लगातार 18 साल से सूरत के उद्योगपति महेश भाई सवाणी कुल 5539 निराधार बेटियों के पिता बने हैं। वे पिता की छत्रछाया खो चुकी बेटियों की शादी इतनी धूमधाम से करवाते हैं कि देखकर आप भी चौक जाएंगे। वह बेटियों की सिर्फ शादी ही नहीं करवाते, बल्कि एक पिता की सभी जिम्मेदारियों को भी निभाते हैं।
बेटी, दामाद को हनीमून के लिए कुल्लू मनाली और समधनों को धार्मिक यात्रा भी कराते है। शादी के बाद बेटी और दामादों को हनीमून के लिए कुल्लू मनाली भेजा जाएगा। वहीं दोनों परिवारों की माताएं याने समधनों को अयोध्या, वाराणसी, प्रयागराज और स्वामीनारायण मंदिरों की धार्मिक यात्रा भी कराई जाएगी। मुस्लिम बेटी और दामाद को 15 दिन उमराह पर भेजा जाएगा।

सवाणी परिवार ने 20 और 21 दिसंबर को दो दिवसीय आयोजन में 133 बेटियों का कन्यादान किया है। इस अवसर पर महेशभाई सवाणी ने बताया कि इस बार हमने शादी की थीम 'कोयलडी' रखी है क्योंकि कोई बाप अपनी बेटी को कोयल के नाम से बुलाते हैं, कोई लाडकडी के नाम से बुलाते हैं, बेटियां बोलती बहुत है इसलिए हम ने इस साल कोयलडी थीम पर शादी करवाने का तय किया था।

महेशभाई सवाणी ने बताया कि जिस बेटी के पिता नहीं है तो सबसे ज्यादा चिंता मां को होती है कि मेरी बेटी की शादी कैसे होगी। बेटियों के भी कुछ सपने होते हैं वो हमने पूरा करने की ठान ली है और ऐसी बेटी को जिंदगीभर अपने पापा की याद न आए इसलिए हम बेटियों का जिंदगीभर ख्याल रखेंगे। उनकी हर जरूरत को पूरी करेंगे। 2007 से शुरू की इस मुहिम 2025 में अबतक हम 5539 बेटियों की शादी करवा चुके हैं।

उन्होंने बताया कि सभी बेटियों को हमने रोल नंबर दिया है। पहली बेटी की शादी की 2007 में तब हम डीका नंबर 1 डिका नंबर 2 नंबर देते थे अगर मेरी किसी भी बेटी का फोन आता है तो मुझे पता चल जाता है कि इस बेटी की कौन से साल में शादी हुई है और उसका नाम क्या है इस तरह बेटी की पहचान हो जाती है। आगे उन्होंने कहा जबतक ऊपर वाले की मेहरबानी होगी तब तक में बेटियों की शादी कराता रहूंगा, मैंने 11111 बेटियों की शादी कराने का निश्चय किया है।

एक मुस्लिम लड़की ने बताया कि मेरे पापा की मौत हो जाने के बाद परिवार बहुत टेंशन में रहता था कि बेटी की शादी कैसे करेंगे। इस पर महेश पापा ने हमारा सारा टेंशन दूर कर दिया और इतनी धूमधाम से शादी करवाई की अगर मेरे पापा होते तो वह भी इतनी शाही शादी नहीं करवा पाते।
(रिपोर्ट- शैलेष चांपानेरिया)
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