सूरत: हिंदी में एक कहावत है कि भगवान हर किसी के लिए धरती पर नहीं आ सकते हैं। इसीलिए उन्होंने मां को बनाया। इंसानों की तरह जानवर भी अपने बच्चों को जी जान से प्यार करते हैं। जो अपने बच्चों के लिए जान पर खेल जाते हैं। ऐसा ही एक वाकया सूरत जिले के बारडोली तहसील में सामने आया है। इसका वीडियो भी सामने आया है।
आग की चपेट में आ गए थे तेंदुए के बच्चे
दक्षिण गुजरात में गन्ने की कटाई की सीजन चल रही है। मजदूर कटाई के पहले गन्ने को जलाते है। बारडोली तहसील के अकोट गांव में गन्ने को जलाते समय तेंदुए के तीन बच्चे (शावक) भी आग की चपेट में आ गए, जिनमें से एक की मौत हो गई। वन विभाग को जानकारी मिलते ही टीम मौके पर पहुंची और घायल शावकों को अपने साथ ले गई। आग की वजह से मांडा तेंदुआ बच्चे को छोड़कर चली गई थी।
मादा तेंदुआ बच्चे की तलाश करने रोज आती थी
तब से मांदा तेंदुआ रोज रोज अपने बच्चे की तलाश में गन्ने के खेत में आ रही थी। लेकिन उसके बच्चे मिल नहीं रहे थे। वन विभाग भी घायल शावकों का इलाज कर रही थी। जब दोनों शावक ठीक हो गए तो वन विभाग की टीम ने शावकों को उनकी मां से मिलाने की ठान ली।
वन विभाग ने मिलाया
वन विभाग की टीम ने देखा कि मां अपने बच्चे को जिस जगह ढूंढ रही थी। वहां बास्केट में शावकों को रख दिया और उसके आसपास कैमरा लगा दिया। मां को भी अपने बच्चों का इंतजार था कि एक दिन मुझे जरूर मिलेंगे इसलिए रोज बच्चे को ढूंढने आती थी। आखिरकार उसको बच्चे मिल गए। सीसीटीवी में साफ नजर आ रहा है कि तेंदुआ उस बास्केट के पास आता है। इसमें उसके दो बच्चे रखे हैं और फौरन अपने दोनों बच्चे को साथ लेकर चली जाती है।
यहां देखें वीडियो
रिपोर्ट: शैलेष चांपानेरिया, सूरत