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ओलिंपिक मेडलिस्ट पहलवान रवि दहिया का विवाह कल, एक रुपये लेकर किसान की बेटी से करेंगे शादी

Edited By: Mangal Yadav @MangalyYadav Published : Nov 29, 2025 06:58 pm IST, Updated : Nov 29, 2025 10:53 pm IST

ओलंपियन पहलवान रवि दहिया रविवार को किसान की बेटी रिचा संग परिणय सूत्र में बंधेंगे। दहेज के तौर पर उन्होंने रिचा के परिवार से मात्र रुपये लिया है।

रिचा और रवि दहिया - India TV Hindi
Image Source : REPORTER रिचा और रवि दहिया

सोनीपतः टोक्यो ओलंपिक में सिल्वर मेडल जीतकर देश का गौरव बढ़ाने वाले ओलंपियन पहलवान रवि दहिया अब जीवन के नए सफर की शुरुआत करने जा रहे हैं। रवि दहिया रविवार को गांव बिलबिलान की रहने वाली किसान परिवार की प्रतिभाशाली बेटी रिचा संग सात फेरे लेंगे। रिचा इस समय स्नातकोत्तर की पढ़ाई कर रही हैं और अपने सशक्त व्यक्तित्व, सरल स्वभाव व शिक्षा के प्रति समर्पण के लिए जानी जाती हैं।

दिल्ली में आज रात को हुई सगाई

जानकारी के मुताबिक,दिल्ली के निजी गार्डन में  रवि दहिया की आज रात सगाई की रस्म हुई। परिवार, रिश्तेदारों और ग्रामीणों में खुशी का माहौल है। दहिया परिवार के अनुसार विवाह के कार्यक्रम को लेकर सभी में उत्साह है और गांव में रौनक दिखने लगी है। रवि दहिया की शादी रविवार को होगी। दहिया बारात लेकर बिलबिलान गांव जाएंगे। 

शादी के बाद भी कुश्ती रहेगी जारी

रवि दहिया ने कहा कि वह अपने जीवन की एक नई शुरुआत करने जा रहे हैं और कुश्ती शादी के बाद भी जारी रहेगी। रवि दहिया के पिता राकेश दहिया ने बताया कि एक साधारण किसान परिवार की बेटी से शादी की जा रही है। बेटे की शादी दहेज मुक्त है। मात्र एक रुपया लेकर शादी की जा रही है। रवि की होने वाली पत्नी रिचा अभी पढ़ाई कर रही हैं।

दिल्ली सरकार में खेल निदेशक के पद पर कार्यरत हैं रवि दहिया

बता दें कि रवि दहिया ने छत्रसाल स्टेडियम से लेकर ओलंपिक के मैट तक अपने प्रदर्शन से देश का नाम रोशन किया। वह अब दिल्ली सरकार में खेल निदेशक के पद पर कार्यरत है। रवि ने टोक्यो ओलंपिक में रजत पदक जीता था। उसके साथ ही वह विश्व कुश्ती चैंपियनशिप, एशियन चैंपियनशिप, कॉमनवेल्थ खेलों समेत कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का परचम लहरा चुके हैं।

वह अब अपनी जीवनसंगिनी के रूप में किसान परिवार की होनहार बेटी को अपनाने जा रहे हैं। रवि बचपन में खेत के पास बने अखाड़े में कच्ची मिट्टी पर खूब दांव-पेच आजमाते थे। उनकी फुर्ती ने गांव के वरिष्ठ पहलवान और कोच हंसराज का ध्यान खींचा, जिन्होंने उसे विधिवत प्रशिक्षण देना शुरू किया था। इसके बाद रवि को दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम भेजा गया, जहां योगेश्वर दत्त और सुशील कुमार जैसे दिग्गजों को देखकर उसके भीतर बड़ा मुकाम हासिल करने की इच्छा और प्रबल होती गई। 

रिपोर्ट- सन्नी मलिक, सोनीपत

 

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