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सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेले में इस बार क्या है खास? कब जाएं और कैसे जाएं, जानें ट्रैफिक एडवाइजरी

सूरजकुंड मेला 31 जनवरी से शुरू होगा और 15 फरवरी तक चलेगा। इस बार मेले में क्या है खास। कैसे जाएं और कब जाएं, जानें ट्रैफिक एडवायजरी...

Edited By: Kajal Kumari @lallkajal
Published : Jan 30, 2026 11:58 pm IST, Updated : Jan 31, 2026 03:14 pm IST
सूरजकुंड मेले में इस बार क्या है खास- India TV Hindi
Image Source : FILE PHOTO (PTI) सूरजकुंड मेले में इस बार क्या है खास

हरियाणा में सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेला इस बार  31 जनवरी से होगा और 15 फरवरी तक चलेगा। इसे देखते हुए पहले ही फरीदाबाद में भारी वाहनों के लिए नो-एंट्री लागू कर दी गई है। यह प्रतिबंध 31 जनवरी से 15 फरवरी 2026 तक सुबह 7 बजे से रात 12 बजे तक लागू रहेगा। ये प्रतिबंध हरियाणा में गुरुग्राम, पाली, अनखीर, शूटिंग रेंज और सूरजकुंड के रास्तों पर लागू रहेगा। फरीदाबाद ट्रैफिक पुलिस ने लोगों की सुविधा और यातायात सुचारू रखने के लिए यह कदम उठाया है।

जानें ट्रैफिक एडवाइजरी

  • ट्रैफिक एडवाइजरी के अनुसार, पाली चौक से MVN, सूरजकुंड रोड और अनखीर से शूटिंग रेंज/सूरजकुंड क्षेत्र में भारी वाहनों का प्रवेश वर्जित है।

     

  • गुरुग्राम से आने वाले वाहन चालकों को वैकल्पिक रास्तों का उपयोग करने की सलाह दी गई है।
     
  • सैनिक कॉलोनी मोड, अनखीर चौक, बड़खल या पाली चौक, प्याली चौक, बाटा चौक, मथुरा रोड का इस्तेमाल कर सकते हैं।
     
  • नोएडा और दिल्ली की ओर जाने वाले भारी वाहनों को पलवल या अन्य वैकल्पिक मार्गों पर भेजा जा सकता है।
     
  • ट्रैफिक पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे मेले के दौरान इन प्रतिबंधित रास्तों पर भारी वाहनों का प्रयोग न करें और ट्रैफिक नियमों का पालन करें।

पार्किंग की व्यवस्था कहां कहां है

मेले में आने वाले लोगों के लिए पार्किंग की भी व्यवस्था की गई है। वाहन ईरोज सिटी पार्किंग, हेलीपैड, और लेकवुड सिटी पार्किंग जैसे चिन्हित स्थानों पर ही पार्क किए जा सकते हैं। यह व्यवस्था मेले के दौरान यातायात जाम से बचने और आगंतुकों को परेशानी न हो, इसके लिए की गई है।

इस बार मेले में क्या है खास

  • यह महोत्सव राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कलाकारों, शिल्पकारों और बुनकरों की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को सुदृढ़ करेगा। साथ ही यह बौद्धिक, रचनात्मक और व्यावसायिक गतिविधियों को भी नई दिशा देगा।
     
  • महोत्सव का मार्गदर्शक मंत्र ‘लोकल से ग्लोबल–आत्मनिर्भर भारत’ रखा गया है।
     
  • यह महोत्सव राज्य की विरासत को संरक्षित करने, प्रतिभाशाली कारीगरों और शिल्पकारों के लिए स्थायी आजीविका सुनिश्चित करने तथा अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक सहयोग को मजबूत करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
     
  • इस साल चौथी बार भागीदार राष्ट्र के रूप में मिस्र अपनी प्राचीन कला और संस्कृति से आगंतुकों को आकर्षित करेगा, जबकि थीम राज्य उत्तर प्रदेश और मेघालय अपने समृद्ध लोक जीवन, सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं का प्रदर्शन करेंगे। 

 

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