21 जून को पूरे विश्व को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जा रहा है। इस बार कोरोना वायरस के मद्देनजर बिना लोगों की भीड़ के डिजिटल मीडिया मंचों पर सेलिब्रेट हो रहा है। योग दिवस दुनियाभर में पहली बार 21 जून 2015 को मनाया गया था। इसके बाद से हर साल इस दिन को योग दिवस के तौर पर सेलिब्रेट किया जाता है। हालांकि, यह पहला मौका है, जब इसे डिजिटल तरीके से मनाया जा रहा है। इस साल की योग दिवस की थीम 'घर पर योग और परिवार के साथ योग' है।
स्वामी रामदेव के साथ विश्व दिवस के दिन करें 21 बेहतरीन योगासन जो आपके पूरे शरीर को रखेगा हेल्दी। विश्व योग दिवस के अवसर में आप भी करें ताड़ासन, वृक्षासन, कैज पोज, वज्रासन, पादहस्तासन, अर्द्ध उष्ट्रासन, त्रिकोणासन, सेतुंबंधान, नौकासन, शशकासन , अर्द्ध उष्ट्रासन, उष्ट्रासन, व्रकासन, उत्तान मंडूकासन, भुजगांसन, कंधरासन, पवनमुक्तासन, शलभासन जैसे बेहतरीन योगासन जो आपको कैंसर, डायबिटीज, एसिडिटी, कब्ज, ब्लड प्रेशर, सोरायसिस, स्किन संबंधी समस्याओं से छुटाकारा दिलाता है। इसके साथ-साथ दिल, दिमाग, लिवर, किडनी, फेफड़ों को मजबूत रखता है।
विश्व योग दिवस 2020: पहली बार योग करने वालों के लिए बेहतरीन 12 योगासन, जानिए तरीका
स्वामी रामदेव के अनुसार योग के द्वारा आप शारीरिक, मानसिक रूप से सेहतमंद रहते हैं। नियमित रूप से प्राणायाम करके आप हर तरह के रोगों से तो दूर रहते ही हैं इसके साथ ही आपकी इम्यूनिटी भी मजबूत होती है। जिससे आप कोरोना जैसी महामारी की जंग भी आसानी से जीत सकते हैं।
प्राणायाम को दिन में कभी भी किया जा सकता है। सोने से पहले आप अनुलोम-विलोम, भ्रामरी और कपालभाति कर सकते हैं। आप सुबह के समय खाली पेट प्राणायाम करें। खाने के 4-5 घंटे के बाद प्राणायम करें। रोजाना आधा घंटे प्राणायाम करके शरीर को स्वस्थ रखा जा सकता है।
स्वामी रामदेव के मुताबिक प्राणायाण शरीर को निरोगी बनाने में मदद करता है। इससे आपका इम्यून सिस्टम मजबूत होता है जो शरीर को बीमारियों से लड़ने के लिए ताकतवर बनाता है। नियमित रुप से अनुलोम-विलोम, कपालभाति, भ्रामरी, भस्त्रिका, करें।
अनुलोम विलोम
अनुलोम विलोम से ब्लड प्रेशर इंस्टेंट कम हो जाता है। इसके लिए सबसे पहले पद्मासन की मुद्रा में बैठ जाएं। अब दाएं हाथ की अनामिका और सबसे छोटी उंगली को मिलाकर बाएं नाक पर रखें और अंगूठे को दाएं वाले नाक पर लगा लें। तर्जनी और मध्यमा को मिलाकर मोड़ लें। अब बाएं नाक की ओर से सांस भरें और उसे अनामिका और सबसे छोटी उंगली को मिलाकर बंद कर लें। इसके बाद दाएं नाक की ओर से अंगूठे को हटाकर सांस बाहर निकाल दें। इस आसन को 5 मिनट से लेकर आधा घंटा कर सकते हैं। इस आसन को करने से त्वचा संबंधी, दमकती त्वचा, डायबिटीज, ब्रेन संबंधी हर समस्या, तनाव, दिमाग को शांत रखें, ब्लड सर्कुलेशन ठीक रखने के साथ पाचन तंत्र को फिट रखने में मदद करता है।
पवनमुक्तासान
पवनमुक्तासन करने से दूर इंस्टेंट दूर हो जाएगी डाइबिटीज। पवनमुक्तासन करने से पेट साफ होता है और शरीर मजबूत होता है। इससे शरीर की गंदगी बाहर निकल जाती है। इस आसन को करने के लिए सबसे पहले पीठ के बल लेट जाइए, और हाथों-पैरों को सीधा कर लें। शरीर ढीला छोड़ दें, और सांस लेते हुए घुटनों को मोड़कर छाती तक ले आएं। इसके बाद लेटे हुए अपना सिर उठाए और माथा घुटनों पर टच कराने की कोशिश करें।
मंडूकासन
इस आसन के लिए व्रजासन या पद्मासन में बैठ जाएं। इसके बाद गहरी सांस लें और अपने दोनों हाथ के उंगलियों को मोड़कर मुट्ठी बनाएं। अब दोनों हाथ की मुट्ठी को नाभि के दोनों तरफ रखें और सांस छोड़ते हुए आगे की ओर झुकेंगे। इस आसन में थोड़ी देर रहने के बाद फिर आराम से सांस छोड़ते हुए सीधे हो जाए। इस आसन को 5-6 बार करें। इस आसन को करने से मधुमेह वालों के लिए फायदेमंद। पैंक्रियाज में इंसुलिन रिलीज करने के साथ ही इम्यूनिटी को बढ़ाने में मदद करें।
गोमुखासन
इस आसन के लिए वज्रासन की मुद्रा में बैठ जाएंगे आप चाहे तो दाहिने पैर को घुटने से मोड़ते हुए बाएं पैर के कुल्हें के नीचे रख सकते हैं और बाएं बाएं पैर को दोनों हाथों से उठाकर के घुटने से मोड़ते हुए दाहिने पैर के ठीक घुटने के ऊपर रखेंगे। इसके बाद बाएं हाथ को ऊपर से लेकर पीठ की ओर ले जाएंगे। वहीं दूसरा हाथ नीचे से होते हुए पीठ के पास जाएगा। इसके बाद दोनों हाथों की अंगुलियों एक दूसरे से पकड़ लेंगे। इस आसन को 5 मिनट तक किया जा सकता है। रीढ़ की हड्डी मजबूत, बवासीर में उपयोगी, लिवर-किडनी के लिए फायदेमंद।
शलभासन
इस आसन को करने से पूरा शरीर फिट रहता है। इस आसन को करने के लिए सहसे पहले पेट के बल योग मैट में लेट जाएं। इसके बाद दोनों पैरों के पंजों को जोड़ लें। और अपने दोनों हाथों को अपने जांघ के नीचे रख लें। इसके बाद धीमे-धीमे सांस भरते हुए पैरों को ऊपर उठाएं। इस स्थिति में कुछ देर रहने के बाद पुरानी स्थिति में आ जाएं। इस आसन को कम सम कम 5 मिनट करें।
भुजगांसन
इस आसन को दो तरह से किया जाता है। इस आसन के लिए योग मैट में आराम से पेट के बल ले जाएं। इसके बाद दोनों हाथों को अपने मुंह के सामने लाकर एक दूसरे के पास रखकर पान का आकार दें। इसके बाद लंबी-लंबी सांस लेते हुए कमर के ऊपरी हिस्से को धीमे-धीमे उठाएं और फिर मुंह से अपने हथेलियों को छुए और फिर ऊपर जाएं। इस प्रक्रिया को 50 से 100 बार करना चाहिए। इस आसन को करने से लंबाई बढ़ती है। इसके साथ ही शरीर की थकावट कम होती है। पेट की चर्बा से भी दिलाएं निजात।
भ्रामरी प्राणायाम
इस प्राणायाम को करने के लिए पहले सुखासन या पद्मासन की अवस्था में बैठ जाएं। अब अंदर गहरी सांस भरते हैं। सांस भरकर पहले अपनी अंगूलियों को ललाट में रखते हैं। जिसमें 3 अंगुलियों से आंखों को बंद करते हैं। अंगूठे से कान को बंद कते हैं। मुंह को बंदकर 'ऊं' का नाद करते हैं। इस प्राणायाम को 3-21 बार किया जा सकता है। इस आसन को करने से तनाव से मुक्ति के साथ मन शांत रहेगा।
अनुलोम-विलोम
सबसे पहले पद्मासन की मुद्रा में बैठ जाएं। अब दाएं हाथ की अनामिका और सबसे छोटी उंगली को मिलाकर बाएं नाक पर रखें और अंगूठे को दाएं वाले नाक पर लगा लें। तर्जनी और मध्यमा को मिलाकर मोड़ लें। अब बाएं नाक की ओर से सांस भरें और उसे अनामिका और सबसे छोटी उंगली को मिलाकर बंद कर लें। इसके बाद दाएं नाक की ओर से अंगूठे को हटाकर सांस बाहर निकाल दें। इस आसन को 5 मिनट से लेकर आधा घंटा कर सकते हैं। इस आसन को करने से त्वचा संबंधी, दमकती त्वचा, डायबिटीज, ब्रेन संबंधी हर समस्या, तनाव, दिमाग को शांत रखें, ब्लड सर्कुलेशन ठीक रखने के साथ पाचन तंत्र को फिट रखने में मदद करता है।
कपालभाति
कपालभाति करने से एलर्जी की समस्या से निजात मिलता है। तनाव, टेशन से निजात मिलने के साथ दिमाग करें तेज। मेटाबॉलिज्म को तेज करें जिससे आपका वजन तेजी से कम होता है।
भस्त्रिका
इस प्राणायाम को 3 तरह से किया जाता है। पहले में 5 सेंकड में सांस ले और 5 सेंकड में सांस छोड़े। दूसरे में ढाई सेंकड सांस लें और ढाई सेंकड में छोड़ें। तीसरा तेजी के साथ सांस लें और छोड़े। इस प्राणायाम को लगातार 5 मिनट करें।
सूर्य नमस्कार
इस आज के पूरे 12 पोज होते हैं। रोजाना सुबह के समय सूर्य के सामने इसे करने से शरीर को विटामिन डी भरपूर मात्रा में मिलता है जिससे शरीर को मजबूती मिलने के साथ ही स्वस्थ रखने में भी मदद मिलती है। इसके साथ ही आप दिनभर एनर्जी से भरपूर रहते हैं।
पूर्ण शलभासन के लाभ
निरोगी शरीर के लिए जरूरी आसन। लिवर और किडनी को रखें स्वस्थय, गुर्दे और पैंक्रियाज के लिए फायदेमंद। डायबिटीज के लिए बहुत ही अधिक फायदेमंद।
नटराजासन
नर्वस सिस्टम को सही रखता है। शरीर पर कंट्रोल करने में मदद करता है। तनाव और चिंता से मुक्ति मिलती है।
पूर्ण उष्ट्रासन करने के लाभ
शरीर को फेक्सिबल बनाएं। ब्लड सर्कुलेशन तेज करें। अनियमित पीरियड्स को करें सही।
ऐसे करें ताड़ासन
ताड़ासन द्वारा आसानी से लंबाई बढ़ाई जा सकती है। इसके साथ-साथ रीढ़ की हड्डी मजबूत होती है। इस आसन को करने के लिए सबसे पहले बिल्कुल सीधे खड़े हो जाए। अब दोनों एड़ियों और पंजों को थोड़े से गैप देकर खड़े हो जाएं। दोनों हाथों को कमर की सिधाई की दिशा में ऊपर की ओर रखें और हथेलियों को मिलाएं। दोनों हाथों की अंगुलियां भी आपस में मिली होनी चाहिए। कमर सीधी, नजरें सामने की ओर और गर्दन सीधी रखें। दोनों एड़ियों भी ऊपर की ओर उठाएं और शरीर का पूरा भार पंजों पर डाल दें। हाथ-पैरों को उठाते हुए पेट अंदर करें। कुछ देर ऐसे ही खड़े रहें और फिर ये प्रक्रिया अपनाएं।
कंट भुजंगासन
इस आस को करने से हड्डियों मजबूत होती है। इसके साथ ही दिमाग तेज होता है। एकाग्रता बढ़ती है।
मयूरासन
इस आसन को बच्चे आराम से कर लेते हैं। इससे भी शरीर फुर्तिला और लचीला होता है।
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