प्लेटलेट्स क्यों घटता है: प्लेटलेट्स की कमी के बारे में तो आपके कई बार सुना होगा। ये हमारे खून के अंदर मूवमेंट करने वाले रेड सेल्स होते हैं। दरअसल, प्लेटलेट्स अस्थि मज्जा (bone marrow) में बहुत बड़ी कोशिकाओं के टुकड़े होते हैं जिन्हें मेगाकारियोसाइट्स (megakaryocytes) कहा जाता है। ये खून में थक्का जमने से रोकते हैं और घावों को ठीक करने में मदद करते हैं। एक हेल्दी इंसान के अंदर 150 हजार से 450 हजार प्रति माइक्रोलीट प्लेटलेट काउंट होता है। लेकिन, जब ये इससे कम होने लगता है तो इस बात का संकेत है कि शरीर में कुछ गंभीर रोग (Diseases in which platelet count decreased) हो सकते हैं।
हेपेटाइटिस सी वायरस (Hepatitis C Viral), प्लेटलेट्स की कमी का एक बड़ा कारण है। दरअसल, इसमें होता यह है कि शरीर थ्रोम्बोपोइटिन और एंडोथेलियल डिसफंक्शन का शिकार हो जाता है जो थ्रोम्बोसाइटोपेनिया की ओर ले जाता है। इसकी वजह से प्लेटलेट्स नहीं बन पाते हैं और प्लेटेस की कमी हो जाती है। ये लिवर फाइब्रोसिस और सिरोसिस का कारण भी बन सकता है।
अगर किसी के खून में बैक्टीरियल इंफेक्शन हो गया है तो शरीर में प्लेटलेट्स की अपने आप कमी हो सकती है। ऐसी स्थिति में मेगाकारियोसाइट्स (megakaryocytes) की कमी होती है और अस्थि मज्जा (bone marrow) इसे प्रड्यूस नहीं कर पाता है।
एनीमिया (Anemia) की बीमारी में अक्सर लोग इस समस्या से परेशान रहते हैं। होता यह है कि इस स्थिति में शरीर पर्याप्त मात्रा में खून नहीं बना पाता है और इसी दौरान रेड और व्हाइट सेल्स की कमी होने लगती है। इस स्थिति को बिलकुल भी नजरअंदाज न करें क्योंकि ये अप्लास्टिक एनीमिया (Aplastic anemia) जैसी गंभीर बीमारी भी हो सकती है।
ल्यूपस और रुमेटीइड गठिया जैसे ऑटोइम्यून रोग भी शरीर में प्लेटलेट्स की कमी का कारण बन सकते हैं। इस स्थिति को मेडिकल टर्म में इम्यून थ्रोम्बोसाइटोपेनिया (Immune thrombocytopenia) भी कहते हैं। इसमें शरीर का इम्यून सिस्टम खुद ही प्लेटलेट्स पर हमला करती है और इन्हें नष्ट कर देती है। ये रोग जिन लोगों को होता है, उनमें हमेशा ही प्लेटलेट्स की कमी रहती है।
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