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राफेल को फ्रांस से उड़ाकर भारत लौटे पायलटों का हुआ जोरदार स्वागत, देखें तस्वीरें

 Edited By: IndiaTV Hindi Desk
 Published : Jul 29, 2020 06:31 pm IST,  Updated : Jul 29, 2020 06:54 pm IST

वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल आरकेएस भदौरिया ने उन पायलटों का स्वागत किया जो इन विमानों को उड़ाकर भारत लाए है। राफेल के भारतीय वायुसेना में शामिल होने से उसकी शक्ति में बहुत इजाफा हुआ है।

Air Chief Marshal RKS Bhadauria welcomes the pilots who flew Rafale jets to India- India TV Hindi
Air Chief Marshal RKS Bhadauria welcomes the pilots who flew Rafale jets to India Image Source : IAF

अंबाला: पांच राफेल विमान भारत पहुंच गए है। यह फ्रांस के बंदरगाह शहर बोर्डेऑस्क में मैरीग्नेक वायुसेना अड्डे से रवाना होकर लगभग सात हजार किलोमीटर का सफर तय करके बुधवार को अंबाला वायुसेना अड्डे पर पहुंचे है। वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल आरकेएस भदौरिया ने उन पायलटों का स्वागत किया जो इन विमानों को उड़ाकर भारत लाए है। राफेल के भारतीय वायुसेना में शामिल होने से उसकी शक्ति में बहुत इजाफा हुआ है। 

भारत ने वायुसेना के लिये 36 राफेल विमान खरीदने के लिये चार साल पहले फ्रांस के साथ 59 हजार करोड़ रुपये का करार किया था। वायुसेना के बेड़े में राफेल के शामिल होने से उसकी युद्ध क्षमता में महत्वपूर्ण वृद्धि होने की उम्मीद है। भारत को यह लड़ाकू विमान ऐसे समय में मिले हैं, जब उसका पूर्वी लद्दाख में सीमा के मुद्दे पर चीन के साथ गतिरोध चल रहा है। 

राफेल के भारत पहुंचने पर मोदी ने कहा ’स्वागतम्’

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राफेल लड़ाकू विमानों की पहली खेप के रूप में पांच विमानों का बेड़ा फ्रांस से बुधवार को अंबाला वायुसेना स्टेशन पहुंचने पर उनका स्वागत किया और कहा कि देश की रक्षा के समान न तो कोई पुण्य, न कोई व्रत और न ही कोई यज्ञ है। मोदी ने संस्कृत में ट्वीट किया, ‘‘राष्ट्ररक्षासमं पुण्यं, राष्ट्ररक्षासमं व्रतम्, राष्ट्ररक्षासमं यज्ञो, दृष्टो नैव च नैव च।। नभः स्पृशं दीप्तम् स्वागतम्!।’’ इसका अर्थ है, ‘‘राष्ट्र रक्षा के समान कोई पुण्य नहीं है, राष्ट्र रक्षा के समान कोई व्रत नहीं है, राष्ट्र रक्षा के समान कोई यज्ञ नहीं है, नहीं हैं, नहीं है।’’ 

मोदी ने ट्वीट के साथ अंबाला वायुसेना स्टेशन पर राफेल विमानों के उतरने का वीडियो भी साझा किया है। इससे पहले, रूस से सुखोई विमानों की खरीद के करीब 23 साल बाद, नये और अत्याधुनिक पांच राफेल लड़ाकू विमानों का बेड़ा अंबाला एयर बेस पहुंच गया। इन विमानों के वायुसेना में शामिल होने के बाद देश को आस-पड़ोस के प्रतिद्वंद्वियों की हवाई युद्धक क्षमता पर बढ़त हासिल हो जाएगी। निर्विवाद ट्रैक रिकॉर्ड वाले इन राफेल विमानों को दुनिया के सबसे बेहतरीन लड़ाकू विमानों में से एक माना जाता है। 

फ्रांस के बोरदु शहर में स्थित मेरिगनेक एयरबेस से 7,000 किलोमीटर की दूरी तय करके ये विमान आज दोपहर हरियाणा में स्थित अंबाला वायु सेना अड्डे पर उतरे। राफेल विमानों के भारतीय हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने के बाद दो सुखोई 30एमकेआई विमानों ने उनकी आगवानी की और उनके साथ उड़ते हुए अंबाला तक आए। राजग सरकार ने 23 सितंबर, 2016 को फ्रांस की एरोस्पेस कंपनी दसाल्ट एविएशन के साथ 36 लड़ाकू विमान खरीदने के लिए 59,000 करोड़ रुपये का सौदा किया था। 

गौरतलब है कि इससे पहले तत्कालीन संप्रग सरकार करीब सात साल तक भारतीय वायुसेना के लिए 126 मध्य बहुद्देशीय लड़ाकू विमानों के खरीद की कोशिश करती रही थी, लेकिन वह सौदा सफल नहीं हो पाया था। दसाल्ट एविएशन के साथ आपात स्थिति में राफेल विमानों की खरीद का यह सौदा भारतीय वायुसेना की कम होती युद्धक क्षमता में सुधार के लिए किया गया था, क्योंकि वायुसेना के पास फिलहाल 31 लड़ाकू विमान हैं जबकि वायुसेना के स्क्वाड्रन में इनकी स्वीकृत संख्या के अनुसार, कम से कम 42 लड़ाकू विमान होने चाहिए। अंबाला पहुंचे पांच राफेल विमानों में से तीन विमान एक सीट वाले जबकि दो राफेल दो सीट वाले लड़ाकू विमान हैं। इन्हें भारतीय वायुसेना के अंबाला स्थित स्क्वाड्रन 17 में शामिल किया जाएगा जो ‘गोल्डन एरोज’ के नाम से प्रसिद्ध है। 

 

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