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पीएम नरेंद्र मोदी ने SCO की बैठक में की अफगानिस्तान और आंतकवाद पर चर्चा, जानिए भाषण की बड़ी बातें

 Written By: IndiaTV Hindi Desk
 Published : Sep 17, 2021 12:11 pm IST,  Updated : Sep 17, 2021 02:37 pm IST

पीएम मोदी ने कहा कि भारत central एशिया के साथ अपनी connectivity बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा मानना है कि land locked central एशियाई देशों को भारत के विशाल बाज़ार से जुड़ कर अपार लाभ हो सकता है।

नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ताजिकिस्तान की राजधानी दुशांबे में शुक्रवार को आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की वार्षिक शिखर बैठक को डिजिटल माध्यम से संबोधित किया। इस बैठक में अफगानिस्तान संकट, क्षेत्रीय सुरक्षा, सहयोग एवं सम्पर्क सहित अन्य मुद्दों पर चर्चा हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एससीओ की बैठक ईरान को SCO के नए सदस्य देश के रूप में शामिल होने पर और सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और कतर का तीन नए डायलॉग पार्टनर्स के रूप में स्वागत किया। आइए आपको बताते हैं पीएम नरेंद्र मोदी के भाषण की बड़ी बातें।

एससीओ की बैठक में प्रधानमंत्री ने ये कहा

  1. इस क्षेत्र में सबसे बड़ी चुनौतियाँ शांति, सुरक्षा और trust-डेफिसिट से संबंधित है। और इन समस्याओं का मूल कारण बढ़ता हुआ radicalisation है। अफगानिस्तान में हाल के घटनाक्रम ने इस चुनौती को और स्पष्ट कर दिया है।
  2. यदि हम इतिहास पर नज़र डालें, तो पाएंगे कि मध्य एशिया का क्षेत्र moderate और progressive cultures और values का गढ़ रहा है। सूफ़ीवाद जैसी परम्पराएँ यहाँ सदियों से पनपी और पूरे क्षेत्र और विश्व में फैलीं। इनकी छवि हम आज भी इस क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत में देख सकते हैं।
  3. भारत में और SCO के लगभग सभी देशों में, इस्लाम से जुड़ी moderate, tolerant और inclusive संस्थाएं और परम्पराएँ हैं। SCO को इनके बीच एक मजबूत network विकसित करने के लिए काम करना चाहिए। इस सन्दर्भ में मैं SCO के RATS mechanism द्वारा किये जा रहे उपयोगी कार्य की प्रशंसा करता हूँ।
  4. चाहे financial inclusion बढ़ाने के लिए UPI और Rupay Card जैसी technologies हों, या COVID से लड़ाई में हमारे आरोग्य-सेतु और COWIN जैसे digital platforms, इन सभी को हमने स्वेच्छा से अन्य देशों के साथ भी साझा किया है।
  5. भारत central एशिया के साथ अपनी connectivity बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा मानना है कि land locked central एशियाई देशों को भारत के विशाल बाज़ार से जुड़ कर अपार लाभ हो सकता है। 
  6. कनेक्टिविटी की कोई भी पहल one-way street नहीं हो सकती। आपसी trust सुनिश्चित करने के लिए connectivity projects को consultative, पारदर्शी और participatory होना चाहिए। इनमें सभी देशों की टेरीटोरियल इंटीग्रिटी का सम्मान निहित होना चाहिए।

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