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हाथरस गैंगरेप कांड में कोर्ट का बड़ा फैसला, रेप केस में चारों आरोपी बरी, इनमें से एक को गैर इरादतन हत्या का दोषी ठहराया

Written By: Sudhanshu Gaur @SudhanshuGaur24 Published : Mar 02, 2023 04:10 pm IST, Updated : Mar 02, 2023 04:29 pm IST

हाथरस गैंगरेप कांड में कोर्ट में चली ढाई साल की सुनवाई के दौरान किसी भी आरोपी पर रेप का आरोप सिद्ध नहीं हुआ। इसी को ध्यान में रहते हुए कोर्ट ने यह फैसला सुनाया है। वहीं न्यायालय के फैसले के बाद पीड़ित पक्ष के वकील ने कहा कि वे इस मामले में अब हाईकोर्ट का रुख करेंगे।

हाथरस गैंगरेप कांड- India TV Hindi
Image Source : FILE हाथरस गैंगरेप कांड

हाथरस: वर्ष 2020 में उत्तर प्रदेश के हाथरस में हुए गैंगरेप कांड में SC-ST कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने गैंगरेप के आरोप में चारो०न आरोपियों को बरी कर दिया है, वहीं संदीप ठाकुर को गैर इरादतन हत्या में दोषी माना है। हालांकि अन्य 3 आरोपियों लवकुश सिंह, रामू सिंह और रवि सिंह को इस मामले में भी बरी कर दिया। इसके साथ ही अदालत ने संदीप ठाकुर को SC/ST एक्ट में दोषी माना है। इन दोनों अपराधो में कोर्ट ने दोषी संदीप ठाकुर को उम्रकैद की सजा सुनाई है। 

फैसले से पहले पुलिस ने कड़ी कर दी थी सुरक्षा 

हाथरस गैंगरेप कांड में कोर्ट में चली ढाई साल की सुनवाई के दौरान किसी भी आरोपी पर रेप का आरोप सिद्ध नहीं हुआ। इसी को ध्यान में रहते हुए कोर्ट ने यह फैसला सुनाया है। वहीं न्यायालय के फैसले के बाद पीड़ित पक्ष के वकील ने कहा कि वे इस मामले में अब हाईकोर्ट का रुख करेंगे। यह मामला बेहद ही चर्चित रहा था, इसलिए पुलिस ने सुरक्षा के लिहाज से आज सुबह से ही कोर्ट को छावनी में तब्दील कर दिया था। जिससे फैसले के बाद वहां किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके। 

29 सितंबर को हो गई थी युवती की मौत 

बता दें कि 14 सितंबर 2020 हाथरस के चंदपा गांव में एक दलित युवती के साथ गैंगरेप का मामला सामने आया था। आरोप गांव के ही चार युवकों पर लगा था। पीड़िता की बेरहमी से जीभ काट दी गई थी। युवती के भाई ने गांव के ही संदीप ठाकुर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। बाद में युवती के बयान के आधार पर 26 सितंबर को तीन अन्य लवकुश सिंह, रामू सिंह और रवि सिंह को भी आरोपी बनाया गया। चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था। पीड़ित युवती की 29 सितंबर को इलाज के दौरान मौत हो गई थी। जब शव हाथरस लाया गया, तो पुलिस ने बिना परिजन की अनुमति के उसी रात शव का अंतिम संस्कार कर दिया था। जिसके बाद मामले ने राजिंतिक रंग ले लिया था और विपक्षी दलों ने सर्कार को जमकर निशाने पर लिया था 

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