ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय की तीनों सेना का शौर्य देखने को मिला। एक तरफ जहां भारत ने पाकिस्तानी एयरबेसों को तबाह कर दिया तो वहीं भारत की सीमा के भीतर पाकिस्तान की एक नहीं चली। भारत ने पाकिस्तान को चारों खाने चित्त कर दिया। वहीं अब भारत रक्षा के मामले में आत्मनिर्भर बनन के ओर लगातार कदम बढ़ रहा है। भारत इस दिशा में किस तरह से काम कर रहा और भारत की आगामी क्या योजनाएं हैं, इन सभी मामलों पर रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) के प्रमुख डॉ. समीर वी. कामत ने इंडिया टीवी से खास बात की।
इंडिया टीवी से बात करते हुए DRDO चीफ कामत ने देश की तीनों सेनाओं की आत्मनिर्भरता के बारे में जानकारी दी। इस दौरान उन्होंने एयर-टू-सरफेस हमला करने वाली रुद्रम मिसाइल के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा कि हमारी रुद्रम-1 मिसाइल अगले दो सालों में इंडक्ट हो जाएंगी, जो पूरी तरह से आत्मनिर्भर भारत का उदाहरण है और इससे देश की क्षमता काफी बढ़ेगी। आगे उन्होंने कहा, "एयर-टू-ग्राउंड मिसाइल की बात करें तो इसमें NGARM है, रुद्रम-2 है, रुद्रम-3 है और रुद्रम-4 है, जिनके रेंज बढ़ते जाएंगे। ये सभी मिसाइल अभी डेवलपमेंट स्टेज पर हैं, लेकिन अगले 3-4 सालों में ये सभी मिसाइल इंडक्ट हो जाएंगे।"
बता दें कि DRDO के तरकश में अभी कई ऐसे तीर हैं जो सामने आने हैं। DRDO अगले दो से तीन सालों में कई ऐसे मिसाइल सिस्टम को सेना में शामिल करने वाला है, जो आत्मनिर्भर भारत की ताकत को और मजबूत करेंगे। DRDO जिन प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहा है उनमें- वेरी शॉर्ट रेंज एयर डिफेंस सिस्टम (VSHORADS), मैन-पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (MPATGM), प्रलय मिसाइल, रुद्रम मिसाइल, एडवांस्ड लाइट टॉरपीडो, मल्टी-इन्फ्लुएंस लैंड माइन शामिल हैं। ये सभी मिसाइलें और तकनीक आत्मनिर्भर भारत की ओर बढ़ते भारत के कदम का परिचायक साबित होंगी।
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