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तबलावादक जाकिर हुसैन की मौत पर पीएम मोदी ने जताया शोक, लिखा- 'वह सांस्कृतिक एकता के स्तंभ थे'

Edited By: Shakti Singh Published : Dec 16, 2024 12:27 pm IST, Updated : Dec 16, 2024 12:27 pm IST

पीएम मोदी ने उस्ताद जाकिर हुसैन की मौत पर दुख जाहिर करते हुए लिखा कि वह हमेशा ही नई पीढ़ियों को प्रेरणा देते रहेंगे। अमेरिका के एक अस्पताल में इलाज के दौरान जाकिर हुसैन का निधन हो गया।

Zakir Hussain- India TV Hindi
Image Source : PTI जाकिर हुसैन

मशहूर तबला वादक उस्ताद जाकिर हुसैन के निधन पर पीएम मोदी ने दुख जाहिर किया है। उन्होंने कहा कि उस्ताद जाकिर हुसैन जी को हमेशा ही एक महान व्यक्ति के रूप में याद किया जाएगा, जिन्होंने भारतीय संस्कृति को नई पहचान दिलाई। पीएम मोदी ने उन्हें सांस्कृतिक एकता का स्तंभ भी बताया।

जाकिर हुसैन का सोमवार की सुबह अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में निधन हो गया। अमेरिका में रह रहे 73 वर्षीय तबला वादक दिल से जुड़ी समस्या के चलते अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जाकिर करीब 2 हफ्तों से अस्पताल में भर्ती थे, लेकिन रविवार को उनकी हालत ज्यादा बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें आईसीयू में रखा गया था।

पीएम मोदी ने क्या लिखा?

पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जाकिर हुसैन के निधन पर शोक जताते हुए लिखा "महान तबला वादक उस्ताद जाकिर हुसैन जी के निधन से बहुत दुख हुआ। उन्हें एक सच्चे प्रतिभाशाली व्यक्ति के रूप में याद किया जाएगा जिन्होंने भारतीय शास्त्रीय संगीत की दुनिया में क्रांति ला दी। उन्होंने तबले को वैश्विक मंच पर भी लाया और अपनी बेजोड़ लय से लाखों लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके माध्यम से, उन्होंने भारतीय शास्त्रीय परंपराओं को वैश्विक संगीत के साथ सहजता से मिश्रित किया, इस प्रकार वे सांस्कृतिक एकता के प्रतीक बन गए। उनके प्रतिष्ठित प्रदर्शन और भावपूर्ण रचनाएं संगीतकारों और संगीत प्रेमियों की पीढ़ियों को प्रेरित करने में योगदान देंगी। उनके परिवार, दोस्तों और वैश्विक संगीत समुदाय के प्रति मेरी हार्दिक संवेदनाएं।"

पद्म पुरस्कार से सम्मानित थे जाकिर हुसैन

जाकिर हुसैन का जन्म 9 मार्च, 1951 को बॉम्बे (अब मुंबई) में हुआ था। उनके पिता उस्ताद अल्लाह रक्खा खान प्रसिद्ध तबला वादक थे। जाकिर ने तबला वादन अपने पिता से सीखा। उन्होंने सात साल की उम्र में संगीत समारोहों में तबला बजाना शुरू कर दिया था। मुंबई के सेंट जेवियर्स कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई के बाद जाकिर ने वाशिंगटन विश्वविद्यालय से संगीत में डॉक्टरेट की डिग्री पूरी की। उन्होंने 1991 में प्लैनेट ड्रम के लिए ड्रमर मिकी हार्ट के साथ काम किया और ग्रैमी पुरस्कार जीता। हुसैन ने कई फिल्मों के साउंडट्रैक में योगदान दिया। उन्हें 1991 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। वह अटलांटा में ग्रीष्मकालीन ओलंपिक के उद्घाटन समारोह के लिए संगीत तैयार करने वाली टीम का भी हिस्सा थे। वह पहले भारतीय संगीतकार भी हैं जिन्हें 2016 में पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने ऑल-स्टार ग्लोबल कॉन्सर्ट में भाग लेने के लिए व्हाइट हाउस में आमंत्रित किया था। जाकिर हुसैन को भारत सरकार ने 1988 में पद्म श्री, 2002 में पद्म भूषण और 2023 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया

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