नई दिल्ली: राजनीति की दुनिया में जहां अक्सर तल्खियां और टकराव देखने को मिलते हैं, वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अंदाज-ए-बयां हटकर है। उनके लिए हास्य सिर्फ एक जरिया नहीं, बल्कि उनके नेतृत्व की एक खास पहचान है। वो इसे एक ऐसे हुनर के तौर पर इस्तेमाल करते हैं, जो तल्ख माहौल को नर्म कर सकता है, लोगों से रिश्ता बना सकता है और सच्चाई को सबके सामने ला सकता है।
जब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री बने, तो उनके हास्य में तीखापन आ गया। भरी सभाओं में व्यंग्य एक ताकतवर सियासी हथियार बन गया। कांग्रेस के नेताओं पर तंज कसते हुए वो कहते थे, "कांग्रेस के नेता ऐसे वादे करते हैं, जैसे शोले का गब्बर पूछ रहा हो- 'अरे ओ सांभा, कितने वोट लाए?'"
गरीबों के लिए चलाए गए कल्याण मेलों में उन्होंने अपने आलोचकों पर चुटकी लेते हुए कहा, "उनको गरीब कल्याण मेला पसंद नहीं, शायद वो गरीब रुलाओ मेला करना चाहते हैं।"
एक बार जब उनसे पूछा गया कि वह प्रतिद्वंद्वियों के हमलों का जवाब कैसे देते हैं, तो उनका जवाब बहुत ही दिलचस्प था, "मैं रोज 2-3 किलो गाली खाता हूं, इसलिए मुझे कुछ होता नहीं।" यह मजाक इतना यादगार बन गया कि उन्होंने कई साल बाद प्रधानमंत्री बनने के बाद भी इसे दोहराया।
विधानसभा में हास्य एक कवच के रूप में भी काम करता था। जब प्रतिपक्ष के विधायकों ने उन पर तानाशाही का आरोप लगाया, तो उन्होंने तुरंत जवाब दिया, "शायद आपको प्रॉब्लम है कि मैं आपका 'हॉलीडे सीएम' नहीं हूं।"
उनकी कई सबसे तीखी आलोचनाएं हास्य में समेटी गई हैं। 2014 के चुनाव अभियान में उन्होंने कांग्रेस के पतन पर टिप्पणी की, "400 से 40 हो जाएंगे।"
प्रधानमंत्री बनने के बाद उनको अपनी हाजिरजवाबी दिखाने का और भी बड़ा मंच मिला। पार्लियामेंट, जो अक्सर बहस का अखाड़ा होती है, कई बार उनके मजाकिया अंदाज से गूंज उठी।
साल 2018 में राहुल गांधी ने जब संसद में उन्हें गले लगाया, तो बाद में पीएम मोदी ने उनकी नकल उतारकर पूरे सदन को हंसा दिया। ऐसे लम्हों में उनका हास्य तनाव को कम करता था, लेकिन उनकी बात की गंभीरता को कम नहीं करता था।
एक बार राहुल गांधी ने कहा था कि युवा उन्हें लाठियों से पीटेंगे। जब गांधी ने बाद में उनके भाषण में रुकावट डाली, तो पीएम मोदी ने मजाक में कहा, "मैं 30-40 मिनट से बोल रहा हूं और इतनी देर में करंट पहुंचा। बहुत से ट्यूबलाइट ऐसे ही होते हैं।" भाजपा सांसदों नें जोरदार ठहाके लगाए और मेजें थपथपाईं।
पीएम मोदी ने फिर राहुल गांधी की धमकी वाली पिटाई के लिए मजाक में कहा कि वे तैयारी करेंगे। उन्होंने कहा, "मैं और अधिक सूर्य नमस्कार करूंगा, ताकि मेरी पीठ पिटाई के लिए तैयार रहे... मैं खुद को गाली-प्रूफ और डंडा-प्रूफ भी बना लूंगा। एक तरह से, मैं आभारी हूं कि मुझे अग्रिम सूचना दी गई है।"
पीएम मोदी ने एक बार कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी के लगातार रुकावट डालने पर मजाक में कहा था कि वो लगातार अपनी सीट से खड़े होकर "संसद में 'फिट इंडिया' अभियान का प्रचार कर रहे हैं।"
इसी तरह, बेरोजगारी की आलोचना का जवाब देते हुए पीएम मोदी ने चुटकी ली, "मैं देश में बेरोजगारी का समाधान करूंगा, लेकिन उनकी (प्रतिपक्ष की) बेरोजगारी का नहीं।"
एक बार फिर अपनी हाजिरजवाबी का प्रदर्शन करते हुए संसद में मोदी ने अपने आलोचकों से कहा, "अगर मैं आपको एक-एक करके जवाब देना शुरू कर दूं, तो मैं गूगल सर्च जैसा बन जाऊंगा।" इसके बाद पार्टी लाइन से हटकर सांसदों ने हंसना शुरू कर दिया।
2017 में डॉ. मनमोहन सिंह पर उनकी टिप्पणी, "वे बाथरूम में रेनकोट पहनकर नहाने की कला जानते थे" ने हंगामा खड़ा कर दिया था।

छात्रों से बात करते हुए भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मजाकिया अंदाज नजर आया। जब एक छात्र ने कहा कि वह ऑनलाइन गेम्स खेलता है, तो उन्होंने तुरंत पूछा, "पबजी वाला है क्या?" यह वाक्य तुरंत वायरल हो गया। बाद में, गेमर्स से "नूब" शब्द सीखते हुए उन्होंने हंसते हुए कहा, "तो मैं भी नूब हूं?" और एक विशाल नेता पल भर में ही जुड़ने योग्य बन गया।
वैश्विक राजनीति में भी उनका हास्य एक कूटनीतिक साधन बन गया है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से उन्होंने हंसते हुए कहा, "आजकल, आप ट्विटर पर ही लड़ाई कर रहे हैं?"
उन्होंने एक बार मैडिसन स्क्वायर गार्डन में एक चुटकुला सुनाकर भारत की पुरानी सोच को बदल दिया, "हमारे पूर्वज सांपों से खेलते थे; आज हमारे लोग माउस से खेलते हैं।" इस जुमले पर दर्शकों ने तालियों की बौछार कर दी।
कैरेबियाई क्रिकेटरों क्रिस गेल और डैरेन सैमी से उन्होंने छक्के मारने और डांस मूव्स पर मजाकिया बातचीत की। इन क्षणों में कूटनीति और चंचलता का संगम हुआ।
एक अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम के दौरान अनुवादक अंग्रेजी और हिंदी के बीच अटक गए, तो इसे अजीब होने देने के बजाय पीएम मोदी तुरंत मुस्कुराए और चुटकी ली, "चिंता मत करो, हम भाषाओं को मिला सकते हैं।"
राष्ट्रीय रचनाकार पुरस्कारों में उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा, "चलिए, मूड तो हर एक के बहुत होते हैं भाई।" फिर उन्होंने माइक्रोफोन मांगते हुए कहा, "माइक दे दीजिए, काम आएगा।"
पाकिस्तान को लेकर उन्होंने कहा, "उनके लिए झंडे पर चांद है, मेरे लिए चांद पे झंडा हो।"
अमेरिकी दौरे पर भारत के मंगल मिशन के बारे में बात करते हुए उन्होंने अंतरिक्ष विज्ञान की तुलना रोज़मर्रा के ऑटो किराए से की। उन्होंन कहा, "अहमदाबाद में आप एक किलोमीटर की यात्रा के लिए एक ऑटो में 10 रुपये खर्च करते हैं। हमने सिर्फ 7 रुपये प्रति किलोमीटर पर मंगल तक 65 करोड़ किलोमीटर की यात्रा की।"
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