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सीरम इंस्टीट्यूट ने तैयार किया टीबी का RBCG टीका, DCGI से मांगी आपात इस्तेमाल की मंजूरी

 Edited By: IndiaTV Hindi Desk
 Published : Mar 27, 2022 08:28 pm IST,  Updated : Mar 27, 2022 08:28 pm IST

सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने टीबी से बचाव में कारगर अपने रिकॉम्बिनेंट बीसीजी (RBCG) टीके को आपात उपयोग की मंजूरी देने के लिए भारतीय औषधि महानियंत्रक (DCGI) के पास आवेदन किया है। 

SII seeks approval for emergency use of its RBCG TB vaccine- India TV Hindi
SII seeks approval for emergency use of its RBCG TB vaccine   Image Source : REPRESENTATIONAL IMAGE

Highlights

  • टीबी के रिकॉम्बिनेंट बीसीजी टीके में सफलता
  • SII ने टीके के आपात उपयोग की मांगी मंजूरी
  • भारत में टीबी के मामलों में 19 फीसदी की वृद्धि

नई दिल्ली: सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने टीबी से बचाव में कारगर अपने रिकॉम्बिनेंट बीसीजी (RBCG) टीके को आपात उपयोग की मंजूरी देने के लिए भारतीय औषधि महानियंत्रक (DCGI) के पास आवेदन किया है। आधिकारिक सूत्रों ने रविवार को यह जानकारी दी कि सीरम इंस्टीट्यूट के सरकारी एवं नियामक मामलों के निदेशक प्रकाश कुमार सिंह ने 22 मार्च को आपात इस्तेमाल के लिए आवेदन दिया। 

मौजूदा समय में भारत के टीबी टीकाकरण कार्यक्रम के तहत बच्चों को जन्म के समय या एक साल की उम्र के भीतर बीसीजी टीका लगाया जाता है। सिंह ने DCGI को दिये आवेदन में इस बात का जिक्र किया है कि सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया सार्वभौम टीकाकरण कार्यक्रम के तहत सरकार को पहले से ही जीवनरक्षक टीकों की आपूर्ति कर रहा है, जिनमें न्यूमोकोकल, आईपीवी और रोटावायरस शामिल हैं। पुणे स्थित SII सरकार को बीसीजी टीके उपलब्ध कराने वाले संस्थानों में शामिल है। 

सीरम इंस्टीट्यूट के सरकारी एवं नियामक मामलों के निदेशक ने पत्र में कहा, “हमारी सरकार टीबी के पूरी तरह मिटाने के लिए प्रतिबद्ध है। टीबी के खात्मे से जुड़े सतत विकास लक्ष्य से पांच साल पहले ही 2025 तक प्रधानमंत्री के आह्वान से टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य को गति मिली है।”

 
एक आधिकारिक सूत्र ने बताया कि सिंह ने पत्र में लिखा है, “हमारे सीईओ अदार सी पूनावाला के नेतृत्व में हमारा संस्थान नवजातों, बच्चों, किशोरों और वयस्कों के लिए एक सस्ता, सुरक्षित, प्रभावी और उच्च गुणवत्ता वाला विश्वस्तरीय ट्यूबरवैक-आरबीसीजी टीका उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।” एक अधिकारी के मुताबिक, आरबीसीजी टीके एक उन्नत तकनीक से निर्मित होते हैं, जो बीसीजी वैक्सीन में बाहरी जीन को शामिल करने या मूल जीन को अतिसक्रिय करने की सुविधा देती है। 

गौरतलब है कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया द्वारा बृहस्पतिवार को जारी वार्षिक टीबी रिपोर्ट के अनुसार, साल 2021 में भारत में टीबी के मरीजों की संख्या में 2020 के मुकाबले 19 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है और 2019 से 2020 के बीच देश में टीबी के सभी स्वरूपों से होने वाली मौतों में 11 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। 

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