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कर्नाटक: 'फ़ेक न्यूज़' से नफ़रत फैलाने के आरोप में एडिटर गिरफ़्तार, बीजेपी कूदी बचाव में

 Written By: India TV News Desk
 Published : Mar 30, 2018 12:19 pm IST,  Updated : Mar 30, 2018 12:19 pm IST

कर्नाटक के बेंगलुरू में पुलिस ने दो समुदायों के बीच नफ़रत फैलाने के लिए फ़र्ज़ी ख़बर पोस्ट करने के आरोप में एक वेबसाइट के एडिटर महेश हेगड़े को गिरफ़्तार किया है.

Mahesh Hegde- India TV Hindi
Mahesh Hegde

कर्नाटक के बेंगलुरू में पुलिस ने दो समुदायों के बीच नफ़रत फैलाने के लिए फ़र्ज़ी ख़बर पोस्ट करने के आरोप में एक वेबसाइट के एडिटर महेश हेगड़े को गिरफ़्तार किया है. फ़िलहाल, पुलिस हेगड़े के दो सहयोगियों की तलाश कर रही है. एडिटर के गिरफ़्तार होते ही भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने सोशल मीडिया पर उनकी रिहाई के लिए अभियान शुरू कर दिया है.

महेश विक्रम हेगड़े postcard.news नाम की वेबसाइट के एडिटर हैं. इस साइट पर 11 मार्च को एक रिपोर्ट छपी थी जिसमें कहा गया थी कि एक जैन मुनि पर एक मुसलमान ने कथित हमला किया जबकि सच्चाई ये है कि उनके साथ सड़क दुर्घटना हुई थी.

बेंगलुरू पुलिस के ज्वाइंट कमिश्नर सतीश कुमार के अनुसार जब मुनि का इलाज चल रहा था तो उनके अनुयायियों ने तस्वीर ली थी. अभियुक्त ने इस तस्वीर का इस्तेमाल किया और ख़बर दी कि मुनि पर एक मुसलमान ने हमला किया. उन्होंने बताया कि ख़बर की "हेडलाइन थी कि ''जैन मुनि पर मुसलमानों ने हमला किया."

वेबसाइट के एडिटर महेश विक्रम हेगड़े को मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया और सेक्शन 153 ए(समुदायों के बीच नफ़रत फैलाना), 120 बी(साज़िश), और 34 (एक ही मंशा से कई लोगों द्वारा किया गया जुर्म) के तहत न्यायिक हिरासत में भेज दिया है. साथ ही आईटी एक्ट के सेक्शन 66 में भी मामला दर्ज हुआ है.

महेश हेगड़े की गिरफ़्तारी के बाद भाजपा नेताओं ने कर्नाटक सरकार को निशाना बनाना शुरू कर दिया है जिनमें केंद्रीय राज्यमंत्री अनंत कुमार हेगड़े और कर्नाटक भाजपा नेता सी टी रवि भी शामिल हैं. अनंत कुमार हेगड़े ने अपने ट्वीट में लिखा है, "सिद्धारमैया सरकार को शर्म आनी चाहिए जो महेश हेगड़े को गिरफ़्तार कर तानाशाह जैसा बर्ताव कर रही है. बुज़दिलों जैसे कदम उठाने की बजाए हमसे लोकतांत्रिक तरीके से लड़िए".

वहीं कर्नाटक भाजपा के महासचिव सीटी रवि ने ट्वीट किया, "एंटी-हिंदू सिद्धारमैया ने लेखक भगवान को गिरफ़्तार क्यों नहीं किया जिन्होंने भगवान श्रीराम का अपमान किया? जिन्होंने वीर मादाकरी नायक का अपमान किया, वे अभी तक क्यों खुले घूम रहे हैं? क्या अभिव्यक्ति की आज़ादी आप लोगों के लिए ही है?"

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