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झारखंड सिविल सेवा की टॉपर, IRS भाई और मां की मिली लाश, सुसाइड या मर्डर? जांच जारी

 Published : Feb 22, 2025 01:14 pm IST,  Updated : Feb 22, 2025 01:17 pm IST

साल 2003 में जेपीएससी की पहली संयुक्त परीक्षा की टॉपर शालिनी विजय अपने आईआरएस भाई और मां के साथ सरकारी कमरे में मृत पाई गई हैं।

सांकेतिक तस्वीर- India TV Hindi
सांकेतिक तस्वीर Image Source : FILE

रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) परीक्षा की टॉपर शालिनी विजय अपने आईआरएस अधिकारी भाई और मां के साथ केरल के कोच्चि में एक सरकारी आवास में शुक्रवार को मृत पाई गई। जानकारी के अनुसार, केंद्रीय उत्पाद शुल्क और सीमा शुल्क के अतिरिक्त आयुक्त मनीष के सरकारी आवास पर परिवार के तीनों लोग मृत मिले हैं। पुलिस को संदेह है कि तीनों ने सुसाइड किया है। झारखंड समाज कल्याण विभाग की सहायक निदेशक शालिनी विजय 2020 से छुट्टी पर थीं। 

सुसाइड की आशंका

बताया जा रहा है कि शालिनी और मनीष के शव अलग-अलग कमरों में मिले। मां शकुंतला विस्तर पर मृत पाई गईं। उनके शव के आस पास फूल रखे गए थे। पुलिस को संदेश है कि पहले मां को मारा होगा फिर दोनों भाई-बहन सुसाइड कर लिए होंगे। फिलहाल मामले की जांच चल रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की सच्चाई सामने आएगी।

जानकारी के अनुसार, केंद्रीय उत्पाद शुल्क और सीमा शुल्क के अतिरिक्त आयुक्त मनीष चार दिन की छुट्टी पर थे। छुट्टी खत्म होने के बाद भी जब वह काम पर नहीं लौटे तो मनीष के सहकर्मी हालचाल लेने उनके सरकारी आवास पर पहुंचे। जब तीनों के शव देखे तो पुलिस को जानकारी दी गई।

डायरी में लिखा मिला ये नोट

पुलिस को मनीष की डायरी में 15 फरवरी की तारीख वाला एक नोट मिला, जिसमें कुछ दस्तावेज उसकी छोटी बहन को सौंपने का निर्देश दिया गया था, जो इस समय दुबई में है। नोट में उसका फोन नंबर लिखा है। 

कानूनी पचड़े में पड़ी थीं शालिनी

बता दें कि साल 2003 में जेपीएससी की पहली संयुक्त परीक्षा के माध्यम से भर्ती किए गए 64 सिविल सेवकों में शालिनी अव्वल आई थी। कुछ उम्मीदवार जो सफल नहीं हो पाए, उन्होंने भर्ती प्रक्रिया को चुनौती दी, उन्होंने बताया कि परीक्षा पास करने वाले कई लोग राजनेताओं या अधिकारियों से जुड़े थे। राज्य की जांच के चलते झारखंड हाईकोर्ट ने 2022 में मामले को सीबीआई को सौंप दिया।

सीबीआई ने शालिनी और अन्य भर्तियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 420 (धोखाधड़ी), 423 (धोखाधड़ीपूर्ण दस्तावेज) और 201 (साक्ष्य नष्ट करना) के साथ-साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(2) और 13(1)(डी) के तहत आरोप दायर किए। अगली सुनवाई 27 फरवरी को होनी है। शालिनी विजय का परिवार 2013 तक रांची में किराए के मकान में रहता था। शालिनी की मां बोकारो में प्रोफेसर हुआ करती थीं।

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