Ganesh Chaturthi Mantra 2021: मनोकामना के अनुसार गणेश चतुर्थी पर करें इन मंत्रों का जाप, हर बाधा होगी दूर
Ganesh Chaturthi Mantra 2021: मनोकामना के अनुसार गणेश चतुर्थी पर करें इन मंत्रों का जाप, हर बाधा होगी दूर
Written by: India TV Lifestyle Desk
Published : Sep 10, 2021 07:23 am IST,
Updated : Sep 10, 2021 03:25 pm IST
गणपति जी आपकी हर समस्या का समाधान निकालने के लिये आपके साथ ही मौजूद होंगे। आचार्य इंदु प्रकाश से जानिए भगवान गणेश के ऐसे आठ विशेष मन्त्रों के बारे में
Image Source : INSTAGRAM/AJAYMANAK77
गणेश जी के मंत्र
आज से दस दिवसीय गणेशोत्सव की शुरुआत हो गयी है और ये उत्सव 19 सितंबर तक मनाया जाएगा। गणेश उत्सव के पहले दिन श्री गणेश जी की घर में स्थापना की जाती है और पूरे दस दिनों तक उनकी विधि-विधान से पूजा करके आखिरी दिन गणेश विसर्जन किया जाता है।
श्री गणेश भगवान की कृपा से इन दस दिनों के दौरान आपकी मनचाही सभी इच्छाएं पूरी हो सकती हैं। गणपति जी आपकी हर समस्या का समाधान निकालने के लिये आपके साथ ही मौजूद होंगे। आचार्य इंदु प्रकाश से जानिए भगवान गणेश के ऐसे आठ विशेष मन्त्रों के बारे में, जिनका जाप करने से आप किसी भी तरह की सिद्धि पा सकते हैं।
शक्तिविनायक गणपति का मंत्र है-“ऊँ ह्रीं ग्रीं ह्रीं” -ये चार अक्षर का मंत्र है । इसका पुरस्चरण 4 लाख है । इस मन्त्र के जप से खेल और राजनीति में पावर मिलती है।
''वक्रतुण्डाय हुं''- ये छः अक्षर का मंत्र है । इसका पुरस्चरण 6 लाख जप है। इस मन्त्र के जप से मुसीबतों से छुटकारा मिलता है।
''मेधोल्काय स्वाहा''- ये भी छः अक्षर का मंत्र है । इसका पुरस्चरण 6 लाख जप है। विद्या प्राप्ति के लिए इस मन्त्र का जप करनी चाहिए।
''गं गणपतये नमः''- ये आठ अक्षर का मंत्र है । इसका पुरस्चरण 8 लाख जप है। सफलता के लिये इस मंत्र का जाप करना चाहिए।
उच्छिष्ट गणपति नवार्ण मंत्र-''हस्ति पिशाचि लिखे स्वाहा''- यह वाम मार्गिय गणपति साधना का मंत्र है। इसकी जप संख्या एक लाख है। 12 अक्षर का उच्छिष्ट गणपति नवार्ण मंत्र ही बताया गया है। इससे प्यार, पैसा और शोहरत सब कुछ मिलता है।
लक्ष्मीविनायक गणपति का मंत्र है-''ऊँ श्रीं गं सौम्याय गणपतये वर वरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा''- यह अट्ठाईस अक्षरों का मंत्र है। इसका पुरस्चरण 4 लाख जप है। इन मन्त्र के जप से लक्ष्मी की कमी नहीं रहती ।
हरिद्रा गणेश मंत्र-''ऊँ हुं गं ग्लौं हरिद्रा गणपतये वरवरद सर्वजन ह्रदयं स्तम्भय स्तम्भय स्वाहा।'' - यह 32 अक्षरों का मंत्र है। इसका पुरस्चरण 4 लाख है। इस मंत्र का जप करने वाले बच्चों को खुशियां मिलती हैं। मनचाहा वर और मनचाही वधु मिलती है।
त्रैलोक्यमोहन गणेश मन्त्र-''वक्रतुण्डैक दंष्ट्राय क्लीं ह्रीं श्रीं गं गणपतये वर वरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा''- यह 33 अक्षरों का मंत्र है। इसका पुरस्चरण 4 लाख है। इस मंत्र को सिद्ध करने वाला व्यक्ति अपने मोहक व्यक्तित्व से सारे संसार को अपने वश में कर लेता है।