श्रावण शुक्ल पक्ष की उदया तिथि पंचमी और शुक्रवार का दिन है। हर वर्ष श्रावण शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नागपंचमी का पर्व मनाने का विधान है। लिहाजा शुक्रवार को नागपंचमी है। नागपंचमी श्रावण के महीने में पड़ने वाले महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। नागपंचमी के दिन नागों की पूजा करने का विधान है। नागपंचमी का ये त्योहार सर्पदंश के भय से मुक्ति पाने के लिये और कालसर्प दोष से छुटकारा पाने के लिये, राहू कृत पीड़ा से मुक्ति पाने के लिए, मनाया जाता है।
अगर आपको भी इस तरह का कोई भय है या आपकी कुंडली में कालसर्प दोष है या आप राहू से पीड़ित हैं, तो उससे छुटकारा पाने के लिये आज के दिन आपको इन आठ नागों की पूजा करनी चाहिए ।
वासुकि
तक्षक
कालिय
मणिभद्र
ऐरावत
धृतराष्ट्र
कर्कोटक
आज के दिन सर्प दंश से मुक्ति पाने के लिये और कालसर्प दोष से छुटकारा पाने के लिये आपको किस प्रकार नागों की पूजा करनी चाहिए। जानिए आचार्य इंदु प्रकाश से इन उपायों के बारे में।
प्रत्येक जन्म पत्रिका में राहु से केतु सातवें खाने में होता है और काल सर्प दोष का मतलब है सारे ग्रहों का राहु और केतु के एक ही तरफ होना। अतः आपकी जन्मपत्रिका में ऐसी स्थिति बन रही है तो आपको आज नागपंचमी की पूजा जरूर करनी चाहिए। लेकिन यहां आपको एक और बात ध्यान में रखना जरूरी है कि अगर आपकी पत्रिका में कालसर्प दोष नहीं है, तब भी आपको आज दिशाओं के क्रम में नागों की पूजा जरूर करनी चाहिए । क्योंकि राहु तो सभी की जन्मपत्रिका में होता है। लिहाजा कालसर्प दोष हो या न हो, राहु कृत पीड़ा की शान्ति के लिये दिशाओं के सही क्रम में पूजा करना सभी के लिए फायदेमन्द साबित होगा।
राहु सर्प का मुख है और केतु सर्प की पूंछ है। चूंकि पूजन मुख में करना उचित है लिहाजा आपको ये देखना है कि आपकी जन्म पत्रिका के किस खाने में राहु बैठा हुआ है और फिर उसी के अनुसार सही दिशा में नाग पंचमी की पूजा करनी है। सबसे पहले आपको एक वर्ग बनाना हैं। इस वर्ग के अनुसार, ईशान कोण, यानी उत्तर-पूर्व दिशा में वासुकि नाग की पूजा करनी चाहिये, पूर्व में तक्षक की, दक्षिण-पूर्व में कालिय की, दक्षिण में मणिभद्र की, दक्षिण-पश्चिम में ऐरावत की, पश्चिम में धृतराष्ट्र की, उतर-पश्चिम में कर्कोटक की।
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