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पति के खिलाफ पहुंच गई थी कोर्ट, अब अदालत ने सुनाया ऐसा फैसला कि दूसरी महिलाएं जाने से पहले कई बार सोचेंगी

उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि महिला ने केवल इतना कहा है कि उसे प्रताड़ित किया गया, लेकिन उसने इस तरह के किसी विशेष कृत्य का अपनी शिकायत में जिक्र नहीं किया।

Edited By: Ravi Prashant @iamraviprashant
Published : Oct 27, 2022 06:59 pm IST, Updated : Oct 27, 2022 06:59 pm IST
मुंबई उच्च न्यायालय- India TV Hindi
Image Source : SOCIAL MEDIA मुंबई उच्च न्यायालय

भारतीय घरों को महिलाओं ने संभाल रखा है इसे कहने में कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए। आमतौर पर महिलाएं दफ्तर के साथ-साथ घर भी देखती है। ऐसे में किसी विवाहित महिला से कहा जाता है कि घरों के काम करें, तो इसकी तुलना नौकरानी से नहीं किया जा सकता है। इसके अलावा इसे क्रूरता की श्रेणी में भी नहीं रखा जा सकता है। लेकिन घर का काम करना महिला के जहमत हो गया है। इसी को लेकर महिला कोर्ट में पहुंच गई।

घरेलु काम से परेशान हुई तो पहुंची कोर्ट 

मुंबई उच्च न्यायालय की औरंगाबाद पीठ ने एक महिला की ओर से दर्ज कराये गये मामले पर सुनवाई के दौरान यह बात सामने रखी। महिला ने अलग रह रहे पति और उसके माता-पिता पर घरेलू हिंसा और क्रूरता के तहत मामला दर्ज कराया था जिसे उच्च न्यायालय ने रद्द कर दिया। न्यायमूर्ति विभा कांकनवाड़ी और न्यायमूर्ति राजेश पाटिल की खंडपीठ ने 21 अक्टूबर को उस व्यक्ति और उसके माता-पिता के खिलाफ दर्ज की गई प्राथमिकी को अमान्य ठहराया। 

शादी के बाद मेड की तरह व्यवहार 
महिला ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया था कि विवाह के बाद एक महीने तक ही उसके साथ अच्छा व्यवहार किया गया लेकिन इसके बाद उससे मेड की तरह व्यवहार किया जाने लगा। उसने यह भी आरोप लगाया कि उसके पति और सास-ससुर ने शादी के एक महीने बाद चार पहिया वाहन खरीदने के लिए चार लाख रुपये मांगना शुरू कर दिया। उसने अपनी शिकायत में कहा कि इस मांग को लेकर उसके पति ने उसे मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया।

शादी से पहले सोचना चाहिए था
उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि महिला ने केवल इतना कहा है कि उसे प्रताड़ित किया गया, लेकिन उसने इस तरह के किसी विशेष कृत्य का अपनी शिकायत में जिक्र नहीं किया। अदालत ने कहा कि अगर विवाहित महिला से परिवार के लिए घर का काम करने को कहा जाता है तो इसकी तुलना मेड के काम से नहीं की जा सकती। अदालत के अनुसार, अगर महिला की दिलचस्पी घर का काम करने में नहीं है तो उसे यह बात विवाह से पहले स्पष्ट कर देना चाहिए ताकि पति और पत्नी बनने से पहले विवाह पर पुन:विचार किया जा सके। अदालत के अनुसार, अगर महिला विवाह के बाद कहती है कि वह घर का काम नहीं करना चाहती तो ससुराल वालों को इसका हल जल्द निकालना चाहिए। 

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