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महाराष्ट्र के इस गांव में है महज एक घर, आबादी के रूप में रहते हैं केवल 7 लोग, 60 साल की महिला हैं सभी की मुखिया

महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में एक गांव इतना छोटा है कि उसमें केवल एक ही घर है और आबादी के नाम पर पूरे गांव में महज 7 लोग रहते हैं। इस गांव में इन 7 लोगों की मुखिया 60 वर्षीय यशोदा हैं।

Written By: Rituraj Tripathi @riturajfbd
Published : Dec 07, 2025 11:56 pm IST, Updated : Dec 08, 2025 12:08 am IST
Maharashtra- India TV Hindi
Image Source : REPORTER INPUT इरपुंडी गांव में रहते हैं महज 7 लोग, 60 वर्षीय यशोदा हैं परिवार की मुखिया

गढ़चिरौली: क्या आप सोच सकते हैं कि महाराष्ट्र में एक गांव ऐसा भी हो सकता है, जिसमें केवल एक ही घर हो और आबादी के नाम पर पूरे गांव में महज एक ही परिवार के 7 लोग रहते हों। लेकिन ये सच है और गढ़चिरौली जिले के धनोरा तालुका में ये अनोखा गांव है। इस गांव का नाम इरपुंडी है। 

आम तौर पर गांव का मतलब होता है कि उसमें कम से कम 20–25 घर, ग्राम पंचायत, आंगनवाड़ी और गांव के बीच में एक मंदिर होगा। लेकिन इरपुंडी गांव पूरी तरह अलग है। यहां पूरे गांव में सिर्फ एक ही घर है और उसी में रहने वाले जादे परिवार के सात लोग इस गांव की कुल आबादी हैं।

घने जंगलों के बीच बसा है गांव

इरपुंडी गढ़चिरौली शहर से करीब 42 किलोमीटर दूर घने जंगलों के बीच बसा है। गांव से पांच किलोमीटर दूर तुकुम सबसे नज़दीकी बड़ा गांव है। तुकुम तक पक्की सड़क जाती है, जबकि वहां से इरपुंडी तक एक किलोमीटर लंबी कच्ची सड़क जंगल से गुजरती है। जादे परिवार के घर तक पहुंचने के लिए कंक्रीट रोड बनाई गई है।

60 वर्षीय यशोदा हैं परिवार की मुखिया

60 वर्षीय यशोदा जादे इस अकेले परिवार की मुखिया हैं। उनके तीन बेटे, एक बहू और दो पोते–पोतियां इसी घर में रहते हैं। यशोदा का एक बेटा और उसकी पत्नी तुकुम के पास रहते हैं। पति की मृत्यु के बाद यशोदा को जीवन संभालने में कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, लेकिन पास के गांव में रहने वाले रिश्तेदारों ने समय–समय पर उनका साथ दिया।

जादे परिवार का मुख्य सहारा खेती और पशुपालन है। धान की खेती, मवेशी, बकरियां और मुर्गियां उनकी संपत्ति हैं। रोजमर्रा की जरूरतों के लिए परिवार तुकुम गांव पर ही निर्भर रहता है। यशोदा बताती हैं कि उनका परिवार कई पीढ़ियों से इसी गांव में रह रहा है। वह कहती हैं, “हमने कभी डर महसूस नहीं किया। लोग बाघ और हाथियों से डरते हैं, लेकिन हमने कभी उनका सामना नहीं किया।”

गढ़चिरौली जिले की एक बड़ी विशेषता है कि यहां कम आबादी वाले गांव और पाड़े बड़ी संख्या में मौजूद हैं। धनोरा तालुका में ही ऐसे 35 गांव हैं, जिनकी आबादी सौ से कम है। कम जनसंख्या और घने जंगलों की वजह से स्वास्थ्य सेवाएं और सरकारी योजनाएं इन तक पहुंचाना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती है। कई बार लोग दिनभर खेतों या जंगलों में काम में लगे रहते हैं, जिससे उनके घरों तक पहुंचना और भी मुश्किल हो जाता है। (इनपुट: नरेश सहारे)

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