मुंबई महानगरपालिका में मेयर पद को लेकर जो कुछ दिख रहा है, वह जितना जटिल दिखाई देता है, उतना है नहीं और जो दिख नहीं रहा, वही असली राजनीति है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस 24 जनवरी तक दावोस में हैं यानी जब तक फडणवीस मुंबई में मौजूद नहीं होंगे, तब तक मेयर पर कोई अंतिम निर्णय नहीं होगा। राजनीतिक भाषा में इसे कहा जाता है Decision deferred, pressure applied
शिंदे का होटल 'GAME' ऑन
महायुति में मेयर पद को लेकर तेज हुई खींचतान के बीच डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने अपने सभी पार्षदों से मुलाकात की। एकनाथ शिंदे ने मुंबई के होटल ताज लैंड्स एंड में अपने पार्षदों से मुलाकात की। एकनाथ शिंदे ने साफ कर दिया है कि बीएमसी का मेयर महायुति का होगा। साथ ही बाड़ेबंदी पर जब उनसे सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि नए लोग चुनकर आए हैं इसलिए उनके मार्गदर्शन के लिए उन्हें एक साथ रखा गया है और उनकी मुलाकात भी मार्गदर्शन के लिए ही थी।
BJP नेतृत्व को क्या संदेश देने की कोशिश?
बता दें कि यह शिंदे गुट की तरफ से बीजेपी नेतृत्व को यह संदेश देने की कोशिश है कि वे सिर्फ संख्या नहीं, सत्ता साझेदार हैं। 29 पार्षद सत्ता बनाने में निर्णायक नहीं हैं, लेकिन सत्ता के संतुलन में उनकी भूमिका शून्य भी नहीं है।
जानकार मानते हैं कि शिंदे गुट को पहले से पता है कि ढाई-ढाई साल का मेयर फॉर्मूला या मुंबई स्टैंडिंग कमिटी चेयरमैन बीजेपी कभी स्वीकार नहीं करेगी। फिर भी ये प्रस्ताव रखे जा रहे हैं क्योंकि यह नेगोशिएशन का नहीं, नैरेटिव का खेल है। शिंदे गुट अपने कैडर और विधायकों को यह दिखाना चाहता है कि हमने कोशिश की, दबाव बनाया, लेकिन जनादेश बड़ा था।
क्या है शिंदे गुट की असली चिंता?
शिंदे गुट की असली चिंता मुंबई नहीं, ठाणे है। वह इलाका जिसे एकनाथ शिंदे की राजनीतिक राजधानी माना जाता है। संभावित डील का अंदरूनी फॉर्मूला यही माना जा रहा है- मुंबई में मेयर, सत्ता का चेहरा बीजेपी और ठाणे में मेयर व स्टैंडिंग कमिटी पूरी तरह शिवसेना (शिंदे)।
मुंबई का मेयर कौन?
- बीजेपी- 89 पार्षद
- शिवसेना- 29 पार्षद
- NCP- 03 पार्षद
- कुल- 121 पार्षद
- मेयर के लिए चाहिए- 114 पार्षद
क्या संकेत दे रही फडणवीस की चुप्पी?
देवेंद्र फडणवीस की अब तक की भूमिका पर ध्यान दें - कोई सार्वजनिक बयान नहीं, कोई प्रतिक्रिया नहीं, कोई काउंटर नहीं। यह राजनीतिक चुप्पी दरअसल यह संकेत देती है कि फैसला पहले ही तय है, सिर्फ समय बाकी है। राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि फडणवीस किसी भी तरह की रिसॉर्ट या प्रेशर पॉलिटिक्स को वैधता नहीं देना चाहते।
तीसरे कोण से खेल रही उद्धव की शिवसेना
वहीं, उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) की एंट्री सिर्फ खेल बिगाड़ने की कोशिश मात्र है। इस पूरे घटनाक्रम में शिवसेना (UBT) तीसरे कोण से खेल रही है। सूत्रों के मुताबिक, यूबीटी के 65 पार्षद सदन से अनुपस्थित रह सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो बीजेपी अपने 89 पार्षदों के दम पर अकेले मेयर चुन सकती है और शिंदे गुट की सौदेबाजी पूरी तरह निष्प्रभावी हो सकती है।
मुंबई को कब तक मिल पाएगा मेयर?
हालांकि बाहर से यह पूरा मामला शक्ति-संघर्ष लगता है, लेकिन अंदरखाने जानकार एकमत हैं कि कोई दरार नहीं है, कोई सत्ता संकट नहीं है, सिर्फ पोस्टिंग और पोजिशनिंग का खेल है। जानकारों के मुताबिक बीजेपी मुंबई में मेयर बनाएगी। शिंदे गुट ठाणे में संतुष्ट होगा। बीएमसी की यह राजनीति न तो रिसॉर्ट की है, न ही बगावत की। यह मैनेज्ड पॉलिटिक्स है जहां हर कदम, हर चुप्पी और हर देरी एक पहले से तय स्क्रिप्ट का हिस्सा है। अब बस औपचारिक ऐलान बाकी है - देवेंद्र फडणवीस की दावोस से वापसी के बाद।
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