इंफाल: मणिपुर में गवर्नर अजय कुमार भल्ला की अपील के बाद अलग-अलग जिलों से लूटे गए हथियारों को लौटाए जाने का सिलसिला जारी है। पुलिस ने बुधवार को इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि मणिपुर के 7 जिले में सुरक्षाबलों को कुल 87 हथियार और गोला-बारूद सौंपे गए है। पुलिस को सबसे ज्यादा हथियार इंफाल पश्चिम जिले में सौंपे गए। इनमें 12 कार्बाइन मशीन गन और मैगजीन, .303 की दो राइफल के साथ मैगजीन, दो SLR राइफल और उसकी मैगजीन, 12 बोर ‘सिंगल बैरल’ की 4 गन और एक IED शामिल है।
पुलिस के मुताबिक, सूबे के जिरीबाम जिले में सौंपे गए हथियारों में 12 बोर की 5 ‘डबल बैरल’ बंदूकें, 9 मिमी कार्बाइन के साथ मैगजीन और एक ग्रेनेड शामिल है। मणिपुर के कांगपोकपी जिले में 2 मैगजीन के साथ एके-47 राइफल, .303 राइफल, एक ‘स्मिथ एंड वेसन’ रिवॉल्वर, मैगजीन के साथ .22 पिस्तौल, एक ‘सिंगल बैरल’ राइफल और ग्रेनेड समेत अन्य हथियार सौंपे गए। मंगलवार को बिष्णुपुर, थौबल, इंफाल पूर्वी और चुराचांदपुर जिलों में भी हथियार पुलिस को सौंपे गए।
बता दें कि राज्यपाल अजय कुमार भल्ला ने लोगों से लूटे गए और अवैध रूप से रखे गए हथियारों को 7 दिन के भीतर स्वेच्छा से पुलिस के सुपुर्द करने की 20 फरवरी को अपील की थी। इसके साथ ही गवर्नर ने यह आश्वासन भी दिया था कि इस अवधि के दौरान हथियार छोड़ने वालों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। मणिपुर के मुख्य सचिव पीके सिंह ने रविवार को कहा था कि अगर कोई हथियार त्यागना चाहता है तो लूटे गए और अवैध रूप से रखे गए हथियारों को स्वेच्छा से पुलिस के सुपुर्द करने के लिए दिया गया 7 दिन का समय पर्याप्त है।
पीके सिंह ने जोर देकर कहा कि यह अवधि समाप्त होने के बाद सुरक्षाबल अवैध और लूटे गए हथियारों के मामले में कार्रवाई करेंगे। बता दें कि मई 2023 से इंफाल घाटी में मेइती और आसपास की पहाड़ियों पर बसे कुकी-जो समूहों के बीच जातीय हिंसा में 250 से ज्यादा लोग मारे गए हैं। इस सूबे में हिंसा भड़कने के बाद पैदा हुए हालात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि हजारों लोगों को अपना घर बार छोड़ना पड़ा है।
सूबे के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह के अपने पद से इस्तीफा देने के कुछ दिनों बाद पूर्वोत्तर राज्य में राजनीतिक अनिश्चितता पैदा हो गई थी। इसके बाद केंद्र ने 13 फरवरी को मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लगा दिया था। गृह मंत्रालय द्वारा जारी एक अधिसूचना के मुताबिक, मणिपुर विधानसभा को सस्पेंड कर दिया गया है। बता दें कि मणिपुर विधानसभा का कार्यकाल 2027 तक है।
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