होम लोन में को-आवेदक की मृत्यु एक भावनात्मक और वित्तीय संकट दोनों पैदा करता है। इसलिए लोन लेने के साथ इंश्योरेंस करना बिल्कुल नहीं भूलें।
सरकारी या प्राइवेट बैंक से लोन लेने से पहले रेट जरूर चेक करें। जहां से कम ब्याज पर लोन मिले, वहां से ही लें। ऐसा कर आप ईएमआई का बोझ कम कर पाएंगे।
Bank of Maharashtra ने कहा कि ब्याज दरों में कमी का यह लाभ बैंक की अपने सभी ग्राहकों को सर्वोत्तम वित्तपोषण समाधान प्रदान करने और उनके सपनों को पूरा करने में मदद करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
रेपो रेट घटने के बाद होम लोन पर बड़ी बचत करने के 3 सबसे असरदार तरीके हम आपको बता रहे हैं।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा रेपो रेट में कटौती से होम लोन लेने वाले लोगों को बड़ी राहत मिली है। लोन की ईएमआई में बड़ी कमी हो गई है।
रेपो रेट घटाए जाने से अब सभी बैंक लोन की ब्याज दरें भी घटा देंगे, जिससे आम लोगों को सस्ती दरों पर लोन मिलेगा।
ज्वाइंट होम लोन लेने पर आपको PMAY सब्सिडी से लेकर रजिस्ट्री पर लगने वाले स्टॉम्प ड्यूटी में बचत होगी।
हाल के दिनों में बैंकों ने कर्ज पर अपनी दरें घटाई हैं। आपको सबसे सस्ता होम लोन तभी मिलेगा जब आपका सिबिल स्कोर शानदार होगा।
यह दर 15 लाख और उससे ज्यादा के लोन पर लागू होगी और यह उधारकर्ता के क्रेडिट स्कोर से जुड़ी होगी। नई कम होम लोन दरों से घर का स्वामित्व और भी अधिक किफायती हो जाएगा।
हम जून और अगस्त में दर में 0.75 प्रतिशत की दर में कटौती और चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में आधा प्रतिशत कटौती की उम्मीद कर रहे हैं।
दोनों बैंकों ने रेपो-लिंक्ड लेंडिंग रेट में कटौती कर दी है। घटी हुई ब्याज दरों के अलावा, एक सरकारी बैंक रियायती प्रोसेसिंग शुल्क और शून्य दस्तावेजीकरण शुल्क जैसे लाभ भी दे रहा है।
केंद्रीय बैंक की तरफ से रेपो रेट में कटौती का फायदा सभी बैंक ग्राहक को तुरंत नहीं देते हैं। इससे उनकी समान मासिक किस्तों यानी EMI में कमी नहीं आती है।
इससे पहले RBI ने फरवरी में रेपो दर 0.25% घटाकर 6.25% कर दिया था। यह मई, 2020 के बाद पहली कटौती और ढाई साल के बाद पहला संशोधन था।
एसबीआई से होम लोन पाने के लिए शानदार सिबिल स्कोर के साथ सभी जरूरी डॉक्यूमेंट्स का होना भी जरूरी है। अगर इनमें कमी रह जाएगी तो आपको लोन मिलने में परेशानी हो सकती है।
नियमों के मुताबिक, अगर लोन लेने के बाद किसी व्यक्ति की मौत हो जाती है तो बैंक सबसे पहले उस लोन के को-ऐप्लिकैंट को कॉन्टैक्ट करते हैं। ऐसे मामले में अगर कोई को-ऐप्लिकैंट ही नहीं है या फिर को-ऐप्लिकैंट लोन की भरपाई के लिए असमर्थ है तो फिर बैंक गारंटर से संपर्क करते हैं।
बैंक और वित्तीय संस्थान आमतौर पर प्रॉपर्टी की कानूनी स्थिति की छानबीन के लिए बाहरी वकीलों को नियुक्त करते हैं। इसके लिए वकील जो फीस लेते हैं, वह वित्तीय संस्थान अपने ग्राहकों से वसूलते हैं।
सबसे सस्ती दर पर होम लोन आपको तभी ऑफर किया जाएगा, जब आपका सिबिल स्कोर शानदार होगा। यानी आपके पेमेंट करने की हिस्ट्री अच्छी होगी। कोई डिफॉल्ट या लापरवाही का अहसास न हो रहा हो।
उधारकर्ता और सह-उधारकर्ता की संयुक्त आय लोन मिलने की संभावना को बढ़ा सकती है जिसका अर्थ है ज्यादा लोन पात्रता और परिवार के लिए उपयुक्त घर चुनने में अधिक लचीलापन।
30 सितंबर, 2024 तक बकाया व्यक्तिगत होम लोन में ईडब्ल्यूएस और एलआईजी का हिस्सा 39 प्रतिशत, एमआईजी का 44 प्रतिशत और एचआईजी का 17 प्रतिशत था।
होम लोन ट्रांसफर के लिए अप्लाई करने से पहले अपने सिबिल स्कोर की समीक्षा करना अहम है। साथ ही जब किसी वित्तीय संस्थान से लोन लेने पर विचार किया जाता है, तो इसमें शामिल अतिरिक्त शुल्कों के बारे में जानना जरूरी है।
लेटेस्ट न्यूज़