Diwali 2025 Puja Vidhi & Muhurat (दिवाली पूजा विधि): दिवाली का त्योहार कार्तिक कृष्ण पक्ष की अमावस्या के दिन मनाया जाता है। इस दिन मुख्य रूप से माता लक्ष्मी, भगवान गणेश, सरस्वती माता और मां काली की पूजा होती है। दिवाली पर लक्ष्मी पूजन के लिए प्रदोष काल का समय सर्वोत्तम माना जाता है जो सूर्यास्त के बाद का समय होता है। तो वहीं माता काली की पूजा के लिए महानिशीथ काल समय शुभ होता है। हालांकि यह मुहूर्त तांत्रिक, पंडित और साधकों के लिए उपयुक्त होता है। दिवाली की रात में लोग अपने घरों को दीपक की रोशनी से सजाते हैं और एक-दूसरे को मिठाई देते हैं। यहां आप जानेंगे दिवाली पूजन मुहूर्त, विधि, मंत्र, कथा, आरती समेत सारी जानकारी।
दिवाली के दिन शाम और रात के समय शुभ मुहूर्त में मां लक्ष्मी, भगवान गणेश और माता सरस्वती की पूजा की जाती है। पुराणों के अनुसार कार्तिक अमावस्या की रात में महालक्ष्मी धरती पर आती हैं और हर घर में विचरण करती हैं। ऐसे में जो भी घर स्वच्छ और प्रकाशवान होता है वहां माता अंश रूप में ठहर जाती हैं। चलिए जानते हैं दिवाली पर मां लक्ष्मी की पूजा कैसे की जाती है।
उल्लू माता लक्ष्मी का वाहन है। ऐसे में दीपावली के दिन उल्लू का दिखना भी बेहद शुभ माना जाता है। उल्लू को देखने का अर्थ है कि माता लक्ष्मी आपके जीवन की सभी आर्थिक परेशानियों को दूर करेंगी। आपके जीवन में सुख-समृद्धि आएगी और पारिवारिक जीवन में भी आपको खुशियां मिलेंगी।
दिवाली पर्व व्यापारियों के लिये विशेष महत्व रखता है। व्यापारी लोग इस दिन अपने बही खातों की पूजा करते हैं। अपने मित्रों और अन्य व्यापारियों को आमंत्रित करते हैं और उनका पान व मिठाईयों से सम्मान करते हैं। दिवाली पर पुराने खाते बंद करके नये खाते खोले जाते हैं और लक्ष्मी पूजा के समय बही खाते रखे जाते हैं और उनकी रोली-चावल से पूजा की जाती है। फिर उन्हें भैया दूज के दिन से काम में लिया जाता है।
दिवाली पर शाम के समय प्रदोष काल में मंदिर आदि पवित्र स्थलों पर दीपक जलाने चाहिए। इसके बाद घर में सभी जगहों पर दीपक जलाने चाहिए।
आदि लक्ष्मि नमस्तेऽस्तु परब्रह्म स्वरूपिणि।
यशो देहि धनं देहि सर्व कामांश्च देहि मे।।
सन्तान लक्ष्मि नमस्तेऽस्तु पुत्र-पौत्र प्रदायिनि।
पुत्रां देहि धनं देहि सर्व कामांश्च देहि मे।।
विद्या लक्ष्मि नमस्तेऽस्तु ब्रह्म विद्या स्वरूपिणि।
विद्यां देहि कलां देहि सर्व कामांश्च देहि मे।।
धन लक्ष्मि नमस्तेऽस्तु सर्व दारिद्र्य नाशिनि।
धनं देहि श्रियं देहि सर्व कामांश्च देहि मे।।
धान्य लक्ष्मि नमस्तेऽस्तु सर्वाभरण भूषिते।
धान्यं देहि धनं देहि सर्व कामांश्च देहि मे।।
मेधा लक्ष्मि नमस्तेऽस्तु कलि कल्मष नाशिनि।
प्रज्ञां देहि श्रियं देहि सर्व कामांश्च देहि मे।।
गज लक्ष्मि नमस्तेऽस्तु सर्वदेव स्वरूपिणि।
अश्वांश गोकुलं देहि सर्व कामांश्च देहि मे।।
धीर लक्ष्मि नमस्तेऽस्तु पराशक्ति स्वरूपिणि।
वीर्यं देहि बलं देहि सर्व कामांश्च देहि मे।।
जय लक्ष्मि नमस्तेऽस्तु सर्व कार्य जयप्रदे।
जयं देहि शुभं देहि सर्व कामांश्च देहि मे।।
भाग्य लक्ष्मि नमस्तेऽस्तु सौमाङ्गल्य विवर्धिनि।
भाग्यं देहि श्रियं देहि सर्व कामांश्च देहि मे।।
कीर्ति लक्ष्मि नमस्तेऽस्तु विष्णुवक्ष स्थल स्थिते।
कीर्तिं देहि श्रियं देहि सर्व कामांश्च देहि मे।।
आरोग्य लक्ष्मि नमस्तेऽस्तु सर्व रोग निवारणि।
आयुर्देहि श्रियं देहि सर्व कामांश्च देहि मे।।
सिद्ध लक्ष्मि नमस्तेऽस्तु सर्व सिद्धि प्रदायिनि।
सिद्धिं देहि श्रियं देहि सर्व कामांश्च देहि मे।।
सौन्दर्य लक्ष्मि नमस्तेऽस्तु सर्वालङ्कार शोभिते।
रूपं देहि श्रियं देहि सर्व कामांश्च देहि मे।।
साम्राज्य लक्ष्मि नमस्तेऽस्तु भुक्ति मुक्ति प्रदायिनि।
मोक्षं देहि श्रियं देहि सर्व कामांश्च देहि मे।।
मङ्गले मङ्गलाधारे माङ्गल्ये मङ्गल प्रदे।
मङ्गलार्थं मङ्गलेशि माङ्गल्यं देहि मे सदा।।
सर्व मङ्गल माङ्गल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरण्ये त्रयम्बके देवि नारायणि नमोऽस्तुते।।
आज 21 अक्टूबर 2025 को लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 05 बजकर 50 मिनट से 05 बजकर 56 मिनट तक रहेगा।
इस दिन कर्ज लेने-देने से बचना चाहिए। घर को गंदा नहीं करना चाहिए और किसी का अपमान नहीं करना चाहिए।
दिवाली के दिन घर के मुख्य द्वार पर रंगोली बनाने का विशेष महत्व माना जाता है। कहते हैं रंगोली बनाने से मां लक्ष्मी प्रसन्न हो जाती हैं। आप इस दिवाली ऐसी रंगोली ट्राई कर सकते हैं।

दिवाली पर तोरण लगाने का विशेष धार्मिक महत्व है। यह घर के मुख्य द्वार पर सजावट के रूप में लगाया जाता है, जिससे घर में सकारात्मक ऊर्जा और शुभता का प्रवेश होता है। माना जाता है कि तोरण लगाने से देवी लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। आम, अशोक या गेंदे के फूलों से बने तोरण को सबसे शुभ माना गया है, क्योंकि ये पवित्रता और ताजगी का प्रतीक हैं।
सबसे पहले एक लाल कपड़ा लें। फिर ऊपर सभी सामग्रियों को एक-एक करके इस कपड़े में रखते जाएं। फिर कपड़े को अच्छे से बांध लें। दिवाली पूजन के समय इस पोटली को जरूर रखें। फिर अगले दिन पोटली को घर की तिजोरी या जहां भी आप पैसा रखते हैं वहां रख दें। कहते हैं इस उपाय को करने से मां लक्ष्मी की कृपा सदैव बनी रहती है।
दिवाली की रात पहला दीपक घर के मंदिर या तिजोरी के पास जलाएं। मान्यता है कि इससे लक्ष्मी माता घर में स्थायी रूप से वास करती हैं।
कार्तिक अमावस्या 2025 - 21 अक्टूबर 2025, मंगलवार
कार्तिक अमावस्या प्रारम्भ - 03:44 PM, अक्टूबर 20
कार्तिक अमावस्या समाप्त - 05:54 PM, अक्टूबर 21
21 अक्टूबर 2025 को दिए जलाने का समय शाम 05 बजकर 50 मिनट से 05 बजकर 56 मिनट तक रहेगा।
ॐ आपदामप हर्तारम दातारं सर्व सम्पदाम,
लोकाभिरामं श्री रामं भूयो भूयो नामाम्यहम,
श्री रामाय रामभद्राय रामचन्द्राय वेधसे रघुनाथाय नाथाय सीताया पतये नमः।।
मित्रता होने के बाद एक बार माता लक्ष्मी ने साहूकार की बेटी को अपने घर भोजन पर बुलाया। साहूकार की बेटी जब वहां पहुंची तो माता लक्ष्मी ने उसका सत्कार किया। लक्ष्मी जी ने अपनी सहेली को सोने-चांदी के बर्तनों में भोजन परोसा और साथ ही एक कीमती रेशमी वस्त्र भी उसे भेंट किया। साहूकार की बेटी को बैठने के लिए लक्ष्मी जी ने सोने की एक चौकी दी। इसके बाद साहूकार की बेटी ने स्वादिष्ट भोजन ग्रहण किया। भोजन के बाद लक्ष्मी जी बोलीं की मैं कुछ दिनों के उपरांत तुम्हारे घर आऊंगी। साहूकार की बेटी ने भी माता लक्ष्मी से कहा कि आप जरूर मेरे घर आएं। इसके बाद जब साहूकार की बेटी घर गई तो उसने अपने माता-पिता से सारी बातें बताईं। लेकिन बातें बताते-बताते वो उदास हो गई।
साहूकार ने जब उदासी का कारण पूछा तो बेटी बोली की लक्ष्मी जी बहुत वैभवशाली हैं, वो मेरे घर आएंगी तो उन्हें में कैसे संतुष्ट कर पाऊंगी। बेटी की बात को सुनकर पिता ने कहा कि तुम घर को स्वच्छ रखना, अच्छी तरह से घर की लिपाई-पोताई करना और श्रद्धा से जो भी अन्न घर में हो उससे भोजन बनाना। लक्ष्मी जी जरूर प्रसन्न होंगी। पिता की बात पूरी होती उससे पहले ही एक चील उड़ती हुई उनके घर के पास से गुजरी और बेहद कीमती नौलखा हार साहूकार के आंगन में गिरा कर चली गई। यह देख साहूकार की बेटी खुश हो गई और उसने हार को बेचकर लक्ष्मी जी के लिए सोने की चौकी और रेशमी दुशाला खरीद लिया। इसके बाद पिता के बताई गई बात के अनुसार बेटी ने घर को स्वच्छ किया, घर की लिपाई-पोताई की।
इसके बाद जब माता लक्ष्मी अपनी सहेली के घर पहुंची तो साहूकार की बेटी ने उन्हें सोने की चौकी पर बैठने को कहा। लेकिन माता लक्ष्मी ने कहा कि इस पर तो राजा-रानी बैठते हैं। यह कहकर वो जमीन पर आसन बिछाकर बैठ गईं। फिर माता ने साहूकार की बेटी द्वारा बनाया गया भोजन ग्रहण किया। माता रानी साहूकार की बेटी के आदर-सत्कार से बेहद प्रसन्न हुईं और उसे सुख-संपत्ति का वर देकर चली गईं। इसे कथा का पाठ करने वाले को भी माता लक्ष्मी का आशीर्वाद मिलता है और उसके जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
लक्ष्मी जी की आरती करने का समय हो गया है। ऐसे में माता की विधि विधान पूजा करके उनकी आरती जरूर उतारें।
दिवाली के दिन लक्ष्मी पूजा मुहूर्त 20 अक्टूबर 2025 की शाम 07:08 से रात 08:18 बजे तक रहेगा। लक्ष्मी पूजन के बाद पूरे घर में दीये जलाए जाते हैं।
सबसे पहले तो ये जान नें कि आमतौर पर पूजा का स्थान ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व दिशा में होना चाहिए। वहीं मंदिर में लक्ष्मी मां की मूर्ति को दक्षिण-पश्चिम या उत्तर-पूर्व दिशा में रखना शुभ मानते हैं। लक्ष्मी जी की मूर्ति गणेश जी के दाईं तरफ रखी जाती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दिवाली की रात में आपको दही और चावल खाने से बचना चाहिए। इस दिन दही और चावल खाने से आपको आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
दिवाली की शुभ रात्रि में आपको पितरों का स्मरण करके दक्षिण दिशा में दीपक जलाना चाहिए। ऐसा करने से पितरों का आशीर्वाद आपको प्राप्त होता है।
दिवाली की रात में यम दीपक जलाना शुभ होता है। यम दीपक का शुभ प्रभाव आपको तभी मिलता है जब आप किसी अंधकारमय जगह पर यह दीपक जलाकर आते हैं। साथ ही इस दीपक को जलाने के बाद आपको पीछे मुड़कर नहीं देखना चाहिए। अगर आप इन बातों का ध्यान रखते हैं तो यम दीपक जलाने से शुभ फलों की प्राप्ति आपको जीवन में होती है।
दिवाली की रात के दिन माता लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं। इस दिन शाम को पूजा के समय अगर आप घर के पूजा स्थल में या फिर तिजोरी में लक्ष्मी यंत्र स्थापित कर दें तो शुभ फलों की प्राप्ति आपको होती है। ऐसा करने से माता का आशीर्वाद आप पर हमेशा बना रहता है।
कार्तिक अमावस्या तिथि की शुरुआत 20 अक्टूबर को 3 बजकर 46 मिनट पर हो चुकी है। रात्रि के समय अमावस्या तिथि 20 अक्टूबर को ही रहेगी इसलिए आज ही दिवाली का त्योहार मनाया जाएगा।
दिवाली के दिन सूर्य तुला राशि में हैं और चंद्रमा कन्या राशि में। ऐसे में ये दोनों द्विद्वादश योग का निर्माण कर रहे हैं इसलिए राशिचक्र की 2 राशियों मिथुन और धनु के लिए दिवाली का पर्व बेहद शुभ फलदायक साबित हो सकता है।
दरिद्रता और दुख की देवी अलक्ष्मी को घर से हमेशा दूर रखने के लिए आपको दिवाली की रात में एक नींबू और मिर्च को धागे में पिरोकर मुख्यद्वार पर टांगना चाहिए। माना जाता है कि इस आसान से उपाय से घर में कभी दरिद्रता का प्रवेश नहीं होता।
इस साल गोवर्धन पूजा का त्योहार 22 अक्टूबर 2025 को मनाया जाएगा। इस दिन पूजा का मुहूर्त सुबह 06:30 से 08:47 बजे तक रहेगा।
दिवाली के दिन घरों को सजाया जाता है, शाम में मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है, दीपक जलाए जाते हैं, रोशनी की जाती है, रंगोली बनाई जाती है, मां लक्ष्मी की पूजा करते हैं और अपने घर में मां लक्ष्मी के सदा सदा वास करने की प्रार्थना करते हैं।
| शहर का नाम | लक्ष्मी पूजन शुभ मुहूर्त |
| पुणे | 07:38 पी एम से 08:37 पी एम |
| नई दिल्ली | 07:08 पी एम से 08:18 पी एम |
| चेन्नई | 07:20 पी एम से 08:14 पी एम |
| जयपुर | 07:17 पी एम से 08:25 पी एम |
| हैदराबाद | 07:21 पी एम से 08:19 पी एम |
| गुरुग्राम | 07:09 पी एम से 08:19 पी एम |
| चण्डीगढ़ | 07:06 पी एम से 08:19 पी एम |
| कोलकाता | 05:06 पी एम से 05:54 पी एम, अक्टूबर 21 |
| मुम्बई | 07:41 पी एम से 08:41 पी एम |
| दिवाली लक्ष्मी पूजन मुहूर्त 2025 | 07:08 PM से 08:18 PM |
| दिवाली लक्ष्मी पूजन निशिता काल मुहूर्त 2025 | 11:41 PM से 12:31 AM, अक्टूबर 21 |
| दिवाली प्रदोष काल मुहूर्त 2025 | 05:46 PM से 08:18 PM |
| दिवाली वृषभ काल मुहूर्त 2025 | 07:08 PM से 09:03 PM |
| अमावस्या तिथि का प्रारम्भ | 20 अक्टूबर 2025 को 03:44 PM बजे |
| अमावस्या तिथि का समापन | 21 अक्टूबर 2025 को 05:54 PM बजे |
सजा दो घर को गुलशन सा,
अवध में राम आए हैं,
अवध मे राम आए है,
मेरे सरकार आए हैं,
लगे कुटिया भी दुल्हन सी,
अवध मे राम आए हैं,
सजा दो घर को गुलशन सा,
अवध मे राम आएं हैं ।
पखारों इनके चरणों को,
बहा कर प्रेम की गंगा,
बिछा दो अपनी पलकों को,
अवध मे राम आए हैं,
सजा दो घर को गुलशन सा,
अवध मे राम आए हैं ।
तेरी आहट से है वाकिफ़,
नहीं चेहरे की है दरकार,
बिना देखेँ ही कह देंगे,
लो आ गए है मेरे सरकार,
लो आ गए है मेरे सरकार,
दुआओं का हुआ है असर,
दुआओं का हुआ है असर,
अवध मे राम आए हैं,
सजा दो घर को गुलशन सा,
अवध मे राम आए हैं ।
सजा दो घर को गुलशन सा,
अवध में राम आए हैं,
अवध मे राम आए है,
मेरे सरकार आए हैं,
लगे कुटिया भी दुल्हन सी,
अवध मे राम आए हैं,
सजा दो घर को गुलशन सा,
अवध मे राम आएं हैं ।
-ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये
धनधान्यसमृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा॥
-ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीं क्लीं वित्तेश्वराय नमः॥
-ह्रीं श्रीं क्रीं श्रीं कुबेराय अष्ट-लक्ष्मी मम गृहे धनं पुरय पुरय नमः॥
दिवाली का त्योहार आज ही मनाया जाएगा। इस दिन लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 07:08 से 08:18 तक रहेगा।
दिवाली की रात अगर आप सपने में माता लक्ष्मी को देख लें तो इसे बेहद शुभ सपना माना जाता है। इस सपने का अर्थ है कि माता लक्ष्मी आपकी भक्ति से प्रसन्न हुई हैं। इस सपने के बाद आपको जीवन में सुख-समृद्धि और धन-धान्य की प्राप्ति हो सकती है।
दिवाली पर आदित्य मंगल, कलानिधि, बुधादित्य, हंस और सर्वार्थ सिद्धि नामक 5 शुभ योग बनने वाले हैं। इसलिए दिवाली के दिन माता लक्ष्मी की पूजा करने से बेहद शुभ फलों की प्राप्ति भक्तों को हो सकती है।
दिवाली के दिन गुरु अपनी उच्च राशि में होंगे जिसके चलते हंस राजयोग का इस दिन निर्माण होगा। इसलिए गुरु की राशियों धनु, मीन और गुरु की उच्च राशि कर्क के लिए दिवाली का त्योहार बेहद शुभ साबित हो सकता है।
हिंदू धर्म के प्रत्येक शुभ अवसर की तरह दिवाली की पूजा में भी सबसे पहले आपको गणेश पूजन करना चाहिए। इसके बाद ही आपको बाकी देवी-देवताओं की पूजा करनी चाहिए।
दिवाली की पूजा में आपको लौंग का एक जोड़ा माता लक्ष्मी को अर्पित करना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ऐसा करने से धन-धान्य की आपको प्राप्ति होती है।
दिवाली के दिन पूजा के दौरान नए खरीदे गए झाडू को भी पूजा में शामिल करना चाहिए। इस झाडू को उत्तर या फिर पूर्व दिशा में आप पूजा के दौरान रख सकते हैं। इस बात का ध्यान रखें कि सूर्यास्त के बाद झाडू इस दिन न लगाएं और इस दिन झाडू पर पैर लगाने से भी बचें।
दिवाली के दिन हस्त नक्षत्र रात्रि 8 बजकर 17 मिनट तक रहेगा और उसके बाद चित्रा नक्षत्र लग जाएगा। हस्त नक्षत्र के स्वामी जहां चंद्रमा हैं वहीं चित्रा मंगल का नक्षत्र है।
उल्लू को माता लक्ष्मी का वाहन माना जाता है। ऐसे में दिवाली के दिन अगर आपको उल्लू दिखाई दे तो समझ जाइए माता लक्ष्मी की कृपा आप पर बरसेगी और सुख-समृद्धि की आपको प्राप्त होगी।
दिवाली की पूजा में इत्र रखना बेहद शुभ होता है। माना जाता है कि इत्र को इस दिन पूजा स्थल पर रखने से आर्थिक उन्नति आपको प्राप्त होती है। पूजा के दौरान आप माता लक्ष्मी को इत्र अर्पित कर सकते हैं।
ॐ देव्यै नमः।
ॐ पुण्यगन्धायै नमः
ॐ ब्रह्माविष्णुशिवात्मिकायै नमः
दिवाली की पूजा में आपको माता लक्ष्मी की ऐसी तस्वीर या मूर्ति लेनी चाहिए जिसमें वो बैठी हुई मुद्रा में हों और उनके हाथों से धन बरस रहा हो। साथ ही माता लक्ष्मी लाल रंग के वस्त्र पहने हुए हों।
दिवाली अमावस्या तिथि को रात के समय मनाई जाती है। इस दौरान तंत्र साधना करना बेहद शुभ फलदायक माना जाता है। तंत्र साधना में माता काली, भैरव भगवान की पूजा भक्तों के द्वारा होती है। माना जाता है कि दिवाली की रात तंत्र साधना करने से सिद्धि जल्दी मिलती है।
दीपावली के दिन आपको लक्ष्मी पूजन के दौरान श्रीयंत्र, कौड़ी और गोमती चक्र को अवश्य शामिल करना चाहिए। इन चीजों को लक्ष्मी पूजन में शामिल करने से माता का आशीर्वाद आपको प्राप्त होता है।
दिवाली की रात्रि में लक्ष्मी पूजन किया जाता है इसलिए आपको सूर्यास्त के बाद गलती से भी झाडू नहीं लगाना चाहिए। इसका कारण यह है कि झाडू का संबंध माता लक्ष्मी से है और लक्ष्मी पूजन में झाडू को भी शामिल किया जाता है। इसलिए गलती से भी इस दिन सूर्यास्त के बाद झाडू न लगाएं।
दिवाली के दिन 5, 7, 9, 11, 21, 51, 101, 251...आज कितने भी दिए जला सकते हैं। बस इस बात का ध्यान रखें कि दीयों की संख्या विषम में होनी चाहिए।
अयोध्या में दिवाली 20 अक्टूबर को मनाई जाएगी। लेकिन दीपोत्सव का आयोजन 19 अक्टूबर को किया जाएगा।
लक्ष्मी पूजा वाली दिवाली 20 अक्टूबर 2025 को है। इस दिन लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त शाम 7 बजकर 8 मिनट से शुरू होकर रात 8 बजकर 18 मिनट तक रहेगा।
दिवाली कुल पांच दिनों का पर्व है, धनतेरस, नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली), लक्ष्मी पूजन/मुख्य दिवाली, गोवर्धन पूजा और भाई दूज।
दिवाली पर घर को साफ-सुथरा रखें। घर की पुरानी और बेकार चीजों को हटा दें, क्योंकि वास्तु के अनुसार ये नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती हैं। घर को रंगोली, फूलों और लाइट्स से सजाएं। दरवाजे पर आम और अशोक के पत्तों से तोरण लगाना बेहद शुभ माना जाता है। खुशबूदार अगरबत्ती और फूलों से माहौल को सकारात्मक बनाएं।
दिवाली पर आप अपनी इच्छानुसार कितने भी दीपक जला सकते हैं। यहां बस इस बात पर ध्यान देना है कि दीपक की संख्या विषम में होनी चाहिए।
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