Diwali 2025 Puja Vidhi & Muhurat (दिवाली पूजा विधि): दिवाली का त्योहार कार्तिक कृष्ण पक्ष की अमावस्या के दिन मनाया जाता है। इस दिन मुख्य रूप से माता लक्ष्मी, भगवान गणेश, सरस्वती माता और मां काली की पूजा होती है। दिवाली पर लक्ष्मी पूजन के लिए प्रदोष काल का समय सर्वोत्तम माना जाता है जो सूर्यास्त के बाद का समय होता है। तो वहीं माता काली की पूजा के लिए महानिशीथ काल समय शुभ होता है। हालांकि यह मुहूर्त तांत्रिक, पंडित और साधकों के लिए उपयुक्त होता है। दिवाली की रात में लोग अपने घरों को दीपक की रोशनी से सजाते हैं और एक-दूसरे को मिठाई देते हैं। यहां आप जानेंगे दिवाली पूजन मुहूर्त, विधि, मंत्र, कथा, आरती समेत सारी जानकारी।
दिवाली 2025 लक्ष्मी पूजन मुहूर्त (Diwali 2025 Laxmi Pujan Muhurat)
- दिवाली लक्ष्मी पूजन मुहूर्त (21 अक्टूबर 202): शाम 05 बजकर 50 मिनट से 05 बजकर 56 मिनट तक
- प्रदोष काल मुहूर्त: शाम 05 बजकर 50 मिनट से 08 बजकर 18 मिनट तक
- महानिशीथ काल: रात 11:36 से देर रात 12:25 तक
दिवाली शुभ चौघड़िया मुहूर्त (Diwali Shubh Choghadiya Muhurat)
- प्रातःकाल मुहूर्त (चल, लाभ, अमृत): 09:05 AM से 01:28 PM तक
- अपराह्न मुहूर्त (शुभ): 02:55 PM से 04:23 PM तक
दिवाली पर लक्ष्मी पूजा की विधि (Diwali Lakshmi Puja Vidhi)
दिवाली के दिन शाम और रात के समय शुभ मुहूर्त में मां लक्ष्मी, भगवान गणेश और माता सरस्वती की पूजा की जाती है। पुराणों के अनुसार कार्तिक अमावस्या की रात में महालक्ष्मी धरती पर आती हैं और हर घर में विचरण करती हैं। ऐसे में जो भी घर स्वच्छ और प्रकाशवान होता है वहां माता अंश रूप में ठहर जाती हैं। चलिए जानते हैं दिवाली पर मां लक्ष्मी की पूजा कैसे की जाती है।
- दिवाली पर लक्ष्मी पूजन से पहले घर की अच्छे साफ-सफाई करें। घर में शुद्धि और पवित्रता के लिए गंगाजल का छिड़काव करें।
- घर के मुख्य द्वार और पूजाघर के पास रंगोली बनाएं।
- दिवाली पूजन के लिए पूजा स्थल पर एक चौकी रखें और उस पर लाल कपड़ा बिछाएं। फिर इस पर माता लक्ष्मी, गणेश भगवान, राम दरबार और कुबेर देव की प्रतिमा की स्थापना करें।
- ध्यान रहे कि लक्ष्मी जी की मूर्ति को श्री गणेश के दाहिने हाथ की तरफ स्थापित करना चाहिए।
- पूजा के लिये कुछ लोग सोने की मूर्ति रखते हैं, कुछ चांदी की, तो कुछ लोग मिट्टी की मूर्ति या फिर तस्वीर से भी पूजा करते हैं। आप अपनी इच्छानुसार भगवान की कैसी भी प्रतिमा रख सकते हैं।
- मूर्ति स्थापना के बाद पूजा स्थल को फूलों से सजाएं। साथ ही पूजा के लिये कलश या लोटा उत्तर दिशा की तरफ रखें और दीपक को आग्नेय कोण, यानि दक्षिण-पूर्व की तरफ रखें ।
- चौकी के पास ही जल से भरा एक कलश भी रखें।
- आपने धनतेरस पर जो सामान खरीदा है उसे भी पूजा स्थल पर जरूर रखें।
- पूजा में फल-फूल और मिठाई के साथ ही पान, सुपारी, लौंग इलायची और कमलगट्टे भी रखें।
- अब भगवान की प्रतिमा पर तिलक लगाएं और एक घी का दीपक जला लें।
- जल, मौली, हल्दी, अबीर-गुलाल, चावल, फल, गुड़ आदि से विधि विधान पूजा करें और माता महालक्ष्मी की स्तुति करें।
- अंत में माता लक्ष्मी, गणेश जी और भगवान विष्णु की आरती करें और प्रसाद सभी में बांट दें।
- इसके बाद घर के कोने-कोने में दीपक जलाकर रखें। वहीं घर के मंदिर में एक घी का बड़ा दीपक और दूसरा सरसों के तेल का बड़ा दीपक जरूर रखें। ध्यान रहे कि ये दीपक पूरी रात जलते रहना चाहिए।
लक्ष्मी माता की आरती (Laxmi Mata Ki Aarti)
- ॐ जय लक्ष्मी माता,मैया जय लक्ष्मी माता।
- तुमको निशिदिन सेवत,हरि विष्णु विधाता॥
- ॐ जय लक्ष्मी माता॥
- उमा, रमा, ब्रह्माणी,तुम ही जग-माता।
- सूर्य-चन्द्रमा ध्यावत,नारद ऋषि गाता॥
- ॐ जय लक्ष्मी माता॥
- दुर्गा रुप निरंजनी,सुख सम्पत्ति दाता।
- जो कोई तुमको ध्यावत,ऋद्धि-सिद्धि धन पाता॥
- ॐ जय लक्ष्मी माता॥
- तुम पाताल-निवासिनि,तुम ही शुभदाता।
- कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी,भवनिधि की त्राता॥
- ॐ जय लक्ष्मी माता॥
- जिस घर में तुम रहतीं,सब सद्गुण आता।
- सब सम्भव हो जाता,मन नहीं घबराता॥
- ॐ जय लक्ष्मी माता॥
- तुम बिन यज्ञ न होते,वस्त्र न कोई पाता।
- खान-पान का वैभव,सब तुमसे आता॥
- ॐ जय लक्ष्मी माता॥
- शुभ-गुण मन्दिर सुन्दर,क्षीरोदधि-जाता।
- रत्न चतुर्दश तुम बिन,कोई नहीं पाता॥
- ॐ जय लक्ष्मी माता॥
- महालक्ष्मीजी की आरती,जो कोई जन गाता।
- उर आनन्द समाता,पाप उतर जाता॥
- ॐ जय लक्ष्मी माता॥
