Guru Pradosh 2026: आज यानी 1 जनवरी को गुरु प्रदोष का व्रत रखा जा रहा है। प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव की आराधना की जाती है। प्रत्येक महीने के कृष्ण और शुक्ल, दोनों पक्षों की त्रयोदशी को प्रदोष व्रत किया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन महादेव की विधिपूर्वक पूजा करने से सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। बता दें कि अलग-अलग वार को पड़ने वाले प्रदोष का नामकरण भी अलग-अलग किया जाता है। जैसे सोमवार को पड़ने वाले प्रदोष को सोम प्रदोष व्रत कहते है वैसे ही गुरुवार को पड़ने वाले प्रदोष को गुरु प्रदोष व्रत कहते हैं। तो आइए जानते हैं गुरु प्रदोष पूजा विधि, मंत्र और मुहूर्त के बारे में।
बता दें कि किसी भी प्रदोष व्रत में प्रदोष काल का बहुत महत्व होता है। त्रयोदशी तिथि में रात्रि के प्रथम प्रहर, यानि सूर्योदय के बाद शाम के समय को प्रदोष काल कहते हैं। त्रयोदशी की रात के पहले प्रहर में जो व्यक्ति किसी भेंट के साथ शिव प्रतिमा के दर्शन करता है वह सभी पापों से मुक्त हो जाता है। ऐसे में प्रदोष व्रतके दिन रात के पहले प्रहर में शिवजी को कुछ न कुछ भेंट अवश्य करना चाहिए।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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