Rakhi Bandhne ka Shubh Muhurat 2025 (राखी बांधने का शुभ मुहूर्त 2025): ज्योतिष अनुसार इस साल रक्षाबंधन पर 297 साल बाद ऐसा दुर्लभ संयोग बन रहा है जिसने इस त्योहार का महत्व कई गुना बढ़ा दिया है। बता दें इस साल राखी का त्योहार 9 अगस्त को मनाया जा रहा है और इस दिन सूर्य देव और बुध देव कर्क राशि में, चंद्रमा मकर में, मंगल कन्या में, गुरु और शुक्र मिथुन में, पापी ग्रह राहु कुंभ में तो केतु सिंह राशि में गोचर कर रहा होगा। ग्रहों का ऐसा योग इससे पहले 1728 में बना था। बताया जा रहा है कि उस समय भी राखी पर भद्रा नहीं थी और ग्रहों की यही स्थिति थी और 2025 में भी ठीक ऐसा ही हो रहा है। इसके साथ ही सुबह 05:47 से दोपहर 02:23 तक सर्वार्थ सिद्धि योग भी रहेगा। ऐसे में इस शुभ मुहूर्त में भाइयों को राखी बांधने से उनके जीवन में खुशहाली और समृद्धि आएगी।
| राखी बांधने का शुभ मुहूर्त 2025 | 9 अगस्त को 05:47 AM से 9:07 AM, इसके बाद 10:48 AM से 01:24 PM |
| राखी के दिन अभिजीत मुहूर्त | दोपहर 12 बजे से 12 बजकर 53 मिनट तक |
| राखी पूर्णिमा तिथि प्रारंभ | अगस्त 08 को 02:12 PM बजे |
| राखी पूर्णिमा तिथि समाप्त | अगस्त 09, को 01:24 PM बजे |
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ॐ येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः। तेन त्वामपि बध्नामि रक्षे मा चल मा चल।।
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राखी बांधते समय तीन गांठें लगानी चाहिए। जिसमें पहली गांठ भाई की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए बांधी जाती है। दूसरी भाई-बहन के रिश्ते में अटूट प्रेम और भरोसे की भावना को दर्शाती है। तीसरी भाई को उसके कर्तव्यों की याद दिलाती है कि वह हमेशा धर्म, सत्य और मर्यादा के मार्ग पर चलें और अपनी बहन की हर परिस्थिति में रक्षा करे।
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राखी बांधते समय भाई का मुख पूर्व, उत्तर या पूर्वोत्तर दिशा में होना चाहिए। भाई को एक आसन पर बिठाएं। सबसे पहले भाई के माथे पर तिलक लगाएं फिर उनकी आरती उतारें। इसके बाद रक्षामंत्र को बोलते हुए भाई के सीधे हाथ की कलाई पर राखी बांधें। मन ही मन ईश्वर से उनकी लंबी आयु और खुशहाल जीवन की कामना करें और अंत में उनका मुंह मीठा करें।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार राखी को कम से कम 1 दिन यानि 24 घंटों तक कलाई पर अवश्य बांधना चाहिए। उतारने के बाद इस किसी पवित्र स्थान पर रखना चाहिए या फिर किसी नदी में प्रवाहित कर देना चाहिए। वहीं कुछ विद्वान मानते हैं कि जन्माष्टमी के दिन तक राखी बांधे रखनी चाहिए।
रक्षाबंधन की रात्रि में चंद्र दर्शन और चंद्रमा को अर्घ्य देने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है। 9 अगस्त को चंद्रोदय शाम 7 बजकर 18 मिनट पर होगा। इस दौरान चंद्रमा की पूजा करने से चंद्र दोष से मुक्ति मिलती है। जो बहनें दिन में राखी नहीं बांध पायी हैं वो चंद्रोदय के बाद भी राखी बांध सकती हैं।
रक्षाबंधन के पावन अवसर पर नमकीन, घेवर, कलाकंद आदि चीजें बनाई जाती हैं। इन चीजों को बहने अपने भाई को खिलाती हैं। इन व्यंजनों के साथ ही भारत के अलग-अलग राज्यों में स्थानीय भोज्य पदार्थ भी इस दिन बनाए जाते हैं।
रक्षाबंधन के पावन अवसर पर नमकीन, घेवर, कलाकंद आदि चीजें बनाई जाती हैं। इन चीजों को बहने अपने भाई को खिलाती हैं। इन व्यंजनों के साथ ही भारत के अलग-अलग राज्यों में स्थानीय भोज्य पदार्थ भी इस दिन बनाए जाते हैं।
इस दिन भद्रा का साया नहीं है। ऐसे में पूरा दिन ही राखी बांधने के लिए उत्तम रहेगा। वहीं शाम या रात में राखी बांधने को लेकर शास्त्रों में कोई विशेष बात नहीं लिखी गई है। आप रात्रि के समय भी राखी बांध सकती हैं। साल 2025 में सूर्योदय के बाद भद्रा काल नहीं है और ना ही कोई अशुभ मुहूर्त है, इसलिए आप रात्रि के समय भी अपने भाई की कलाई पर राखी बांध सकती हैं।
रक्षाबंधन के दिन यूं तो सुबह के समय राखी बांधना शुभ माना जाता है लेकिन किसी कारणवश न बांध पाएं तो अमृत काल में भी राखी बांधी जा सकती है। 9 अगस्त को अमृत काल दोपहर 1 बजकर 30 मिनट से शुरू होगा और 3 बजे तक रहेगा।
दोपहर 11 बजकर 59 मिनट से राखी बांधने का सबसे शुभ मुहूर्त शुरू हो चुका है। दरअसल इस समय से अभिजीत मुहूर्त शुरू हो रहा है जो 12 बजकर 53 मिनट तक चलेगा। यानि 54 मिनट तक अभिजीत मुहूर्त रहेगा। यह समय काल शुभ और मांगलिक कार्यों के लिए बेहद सकारात्मक माना जाता है।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार पृथ्वी लोक की भद्रा तब होती है जब चंद्रमा कर्क, सिंह, कुंभ या मीन राशि में होते हैं। इस बार रक्षाबंधन के दिन चंद्रमा मकर राशि में रहेंगे इसलिए पाताल लोक की भद्रा रहेगी। यानि भद्रा पृथ्वी लोक पर मान्य नहीं रहेगी। इसलिए साल 2025 में रक्षाबंधन भद्रा काल रहित है और पूरे दिन को ही राखी बांधने के लिए शुभ माना जा रहा है।
अभिजीत मुहूर्त को बेहद शुभ समय माना जाता है। यह समय काल सूर्योदय और सूर्यास्त के बीच आता है। 9 अगस्त को अभिजीत मुहूर्त 11 बजकर 59 मिनट से शुरू होगा और 12 बजकर 53 मिनट तक रहेगा। इस शुभ मुहूर्त में बहनें अपने भाई को राखी बांध सकती हैं। इस मुहूर्त में राखी बांधने से भाई-बहन दोनों को सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
राखी रात में बांधना भी शास्त्रों में गलत नहीं माना गया है। बस आपको दो चीजों का ध्यान राखी बांधते हुए रखना चाहिए पहला कि भद्रा काल न हो और दूसरा राखी बांधते समय कोई अशुभ मुहूर्त न चल रहा हो। इन दोनों बातों का ध्यान रखते हुए रात्रि के समय भी राखी बांधी जा सकती है।
रक्षाबंधन सावन पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु, महादेव, देवी लक्ष्मी, गणेश जी, वरुण देव, इंद्र देव, हनुमान जी और इष्ट देवी-देवता की पूजा करना बेहद शुभ माना जाता है। इन देवी-देवताओं की पूजा करने से बेहद सकारात्मक परिणाम आपको जीवन में प्राप्त होते हैं।
रक्षाबंधन के दिन लाल, पीले, सिंदूरी रंग के कपड़े पहनना शुभ माना जाता है। इसके साथ हरे और गुलाबी वस्त्र भी इस दिन पहने जा सकते हैं। वहीं काले रंग के वस्त्रों को पहनने से इस दिन परहेज करना चाहिए। शुभ अवसरों पर काला रंग धारण करना अच्छा नहीं माना जाता।
राखी दाहिने हाथ में बांधी जाती है। भारतीय परंपरा में, बहन अपने भाई की दाहिनी कलाई पर राखी बांधती है, जो प्रेम, सुरक्षा और स्नेह का प्रतीक है।
रक्षाबंधन को राहुकाल सुबह 09:07 से 10:47 बजे तक रहेगा। ऐसे में बहनें अब भाइयों को राहुकाल खत्म होने के बाद ही राखी बांध सकेंगी।
अगर किसी के परिवार में बच्चे का जन्म हुआ है या फिर किसी की मृत्यु हुई है तो 12 दिनों तक सूतक काल रहता है। इस दौरान धार्मिक कार्य नहीं किए जाते। ऐसे में सवाल उठता है कि सूतक काल के दौरान रक्षाबंधन का त्योहार मना सकते हैं या नहीं? आपको बता दें कि सूतक के दौरान भी बहन भाई को राखी बांध सकती है लेकिन धार्मिक रीतियों को इसमें शामिल नहीं करना चाहिए। यानि तिलक, आरती आदि इस दौरान नहीं करनी चाहिए।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार राखी बांधने से पहले भाई-बहन को कुछ नहीं खाना चाहिए। रक्षाबंधन के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान-ध्यान के बाद पूजा करनी चाहिए और उसके बाद बहन को भाई की कलाई पर राखी बांधनी चाहिए। राखी बांधने के बाद ही भाई-बहनों को भोजन ग्रहण करना चाहिए।
रक्षाबंधन का पवित्र त्योहार न केवल भारत में बल्कि दुनिया के अन्य देशों में भी मनाया जाता है। इन देशों में प्रमुख रूप से नेपाल, मॉरीशस, फिजी, त्रिनिदाद और टोबैगो शामिल हैं। इन देशों में भारतीय मूल के लोग बड़ी संख्या में रहते हैं। इन देशों के अलावा पाकिस्तान में भी रक्षाबंधन का त्योहार मनाते हैं।
राखी भाई-बहन के पवित्र प्रेम और निस्वार्थ प्रेम का प्रतीक है। रक्षासूत्र केवल एक धागा नहीं बल्कि भाई और बहन को आजीवन एक दूसरे के संपर्क में रहने का संदेश भी देता है। प्राचीन काल में ऋषि-मुनि सुरक्षा के लिए राजाओं को भी राखी बांधते थे। यानि रक्षाबंधन के त्योहार के जरिए सामाजिक एकता का संदेश भी हमको मिलता है।
अगर रक्षाबंधन पर बहन पास नहीं है और उन्होंने आपको राखी भिजवाई है, तो आप किसी ऐसी महिला या कन्या से राखी बंधवा सकते हैं जिसे आप अपनी बहन के समान मानते हों। ऐसा संभव न हो तो अपने गुरु से भी आप राखी बंधवा सकते हैं। यदि गुरु भी पास न हों तो मंदिर के पुजारी या फिर अपने किसी दोस्त से आपको राखी बंधवानी चाहिए।
हिंदू मान्यताओं के अनुसार राखी बांधने के पीछे कुछ पौराणिक कहानियों का जिक्र मिलता है। कुछ लोग मानते हैं कि सबसे पहले द्रौपदी ने भगवान कृष्ण की घायल उंगली पर साड़ी का एक टुकड़ा बांधा था और तब से ही राखी की परंपरा शुरू हुई थी। वहीं कुछ विद्वान मानते हैं कि देवी लक्ष्मी ने सबसे पहले राजा बलि को राखी बांधी थी।
9 अगस्त को सावन पूर्णिमा दोपहर 1 बजकर 26 मिनट पर खत्म हो रही है। हालांकि, इस दौरान अगर बहन भाई को राखी ना भी बांध पाए तो पूर्णिमा की समाप्ति के बाद भी राखी बांधना गलत नहीं माना जाएगा। 9 अगस्त को उदयातिथि में पूर्णिमा 2 घंटे से अधिक समय तक है, इसलिए दोपहर के बाद भी राखी बांधना शुभ रहेगा।
अगर किसी कारणवश बहन को राहुकाल के दौरान राखी बांधनी पड़े तो सबसे पहले उन्हें देवी दुर्गा की पूजा करनी चाहिए। इसके बाद राखी को देवी दुर्गा को समर्पित करना चाहिए और फिर प्रसाद के रूप में भाई की कलाई पर राखी बांधनी चाहिए। माना जाता है कि इस तरह से राहुकाल में राखी बांधने से दुष्प्रभावों का सामना भाई-बहन को नहीं करना पड़ता।
दाहिना हाथ हमारे शरीर के अधिकतर हिस्से को नियंत्रित करता है। इसके साथ ही दाहिना हाथ आध्यात्मिक और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करने वाला भी माना जाता है। इसलिए बहनों को हमेशा भाई के दाहिने हाथ पर ही राखी बांधनी चाहिए। दाहिना हाथ पर बंधी राखी भाई को आरोग्य भी प्रदान करती है।
रक्षाबंधन पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है और पूर्णिमा के दिन माता लक्ष्मी, भगवान विष्णु, महादेव और चंद्र देव की पूजा करना बेहद शुभ होता है। इसलिए इस दिन गलती से भी आपको तामसिक भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए। काले वस्त्र धारण नहीं करने चाहिए। किसी की निंदा नहीं करनी चाहिए और अपशब्दों का इस्तेमाल करने से भी बचना चाहिए। साथ ही इस दिन तुलसी के पत्ते तोड़ने से भी आपको बचना चाहिए।
रक्षाबंधन का त्योहार सावन पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। इस शुभ दिन में अगर आप एकाक्षी नारियल, नए कपड़े, चांदी का सिक्का या स्वास्तिक घर लाते हैं तो भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा आपको प्राप्त होती है। ऐसा करने से घर में हमेशा धन-धान्य पर्याप्त मात्रा में बना रहता है।
रक्षाबंधन से जुड़ी इस कथा के अनुसार एक बार भगवान श्रीकृष्ण के हाथ में चोट लग गई थी जिससे लगातार खून बह रह था तब द्रौपदी ने अपनी साड़ी का एक टुकड़ा फाड़कर श्रीकृष्ण की उंगली पर बांध दिया, जिससे उनका खून बहना रुक गया। भगवान कृष्ण ने इस प्रेम और विश्वास के बदले द्रौपदी को उनकी रक्षा का वचन दिया। बाद में जब कौरवों ने द्रौपदी का चीरहरण करने की कोशिश की थी तो श्रीकृष्ण ने उनकी रक्षा की थी। यह कथा रक्षाबंधन के रक्षा सूत्र के महत्व को दर्शाती है।
रक्षाबंधन श्रावण पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। पूर्णिमा तिथि 9 अगस्त को दोपहर 1 बजकर 26 मिनट पर समाप्त होगी। इसलिए सूर्योदय से लेकर 1 बजकर 26 मिनट तक के समय को राखी बांधने के लिए सबसे शुभ माना जा रहा है। हालांकि, उदयातिथि की मान्यता के अनुसार 9 अगस्त पूरे दिन ही आप राखी बांध सकती हैं। उदयातिथि में सूर्य अगर 2 घंटे से अधिक समय तक रहे तो पूरे दिन भर वह तिथि व्याप्त रहती है।
राहुकाल के कारण राखी बांधने का पहला शुभ मुहूर्त सुबह 5 बजकर 47 मिनट से शुरू होकर 9 बजकर 6 मिनट तक रहेगा वहीं दूसरा मुहूर्त सुबह 10 बजकर 48 मिनट से शुरू होकर दोपहर 1 बजकर 24 मिनट तक रहेगा।
हिन्दू धर्म शास्त्रों अनुसार पहली राखी गणेश जो को अर्पित करनी चाहिए। इसके बाद भगवान शिव और भगवान विष्णु को राखी चढ़ानी चाहिए। कहते है इस से भाई को भगवन का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
नई दिल्ली - 05:47 ए एम से 01:24 पी एम
नोएडा - 05:46 ए एम से 01:24 पी एम
लखनऊ - 05:35 ए एम से 01:24 पी एम
पटना - 05:20 ए एम से 01:24 पी एम
वाराणसी - 05:29 ए एम से 01:24 पी एम
चंडीगढ़ - 05:46 ए एम से 01:24 पी एम
मुंबई - 06:18 ए एम से 01:24 पी एम
कोलकाता - 05:11 ए एम से 01:24 पी एम
मेरठ - 05:45 ए एम से 01:24 पी एम
पुणे - 06:15 ए एम से 01:24 पी एम
जयपुर - 05:55 ए एम से 01:24 पी एम
भाई इस बात ध्यान रखें कि राखी बंधवाते समय आपके हाथ में दक्षिणा या फिर चावल जरूर होने चाहिए। इनमें से किसी भी चीज को हाथ में लेकर मुट्ठी बांध लें और फिर इसके बाद ही बहन से राखी बंधवाएं।
रक्षाबंधन के दिन राहुकाल के दौरान बहनों को राखी बांधने से बचना चाहिए। नीचे चार महानगरों में राहुकाल का समय बताया गया है। आप अपने स्थान के राहुकाल के बारे में आसानी से इंटरनेट पर जान सकती हैं।
दिल्ली- सुबह 09:06 से सुबह 10:46 तक
मुंबई- सुबह 09:31 से दोपहर पहले 11:08 तक
चेन्नई- सुबह 09:06 से सुबह 10:46 तक
कोलकाता- सुबह 08:26 से सुबह 10:04 तक
साल 2025 में 95 सालों के बाद दुर्लभ योग बना है। दरअसल 1930 में रक्षाबंधन 9 अगस्त को ही मनाया गया था और उस दिन भी शनिवार ही था साथ ही उस दिन भी सौभाग्य योग और श्रवण नक्षत्र था। ठीक ऐसी ही स्थिति 2025 में भी बनी हुई है। इसलिए ज्योतिषीय दृष्टि से इस दुर्लभ योग माना जा रहा है। इस दिन राखी बांधने के साथ ही विष्णु भगवान और महादेव की कृपा से बेहद शुभ फलों की प्राप्ति होगी।
रक्षाबंधन का त्योहार सावन पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। इस दिन चंद्रमा को पूर्णता प्राप्त होती है। ऐसे में इस दिन चंद्र ग्रह के मंत्रों का जप करने से आपको मानसिक शांति मिलती है और पारिवारिक जीवन में भी शुभ फल आप प्राप्त करते हैं। चंद्र ग्रह के कुछ मंत्र नीचे दिए गए हैं जिनका जप करने से आप लाभ पा सकते हैं।
1. ॐ श्रां श्रीं श्रौं स: चन्द्रमसे नमः।
2. ॐ सों सोमाय नमः।
3. ॐ ऐं क्लीं सोमाय नमः, ॐ श्रीं श्रीं चन्द्रमसे नमः।
इस साल रक्षाबंधन पर भद्रा नहीं है। भद्रा सूर्योदय से पहले ही ख़त्म हो जाएगी। बता दें भद्रा में राखी बांधना अशुभ माना जाता है इसलिए ही इस समय पर राखी बांधने से परहेज किया जाता है।
रक्षाबंधन का त्योहार सावन पूर्णिमा के दिन रखा जाता है। इस दिन भगवान शिव और विष्णु जी दोनों की ही पूजा करना बेहद शुभ होता है। ऐसे में अगर आप इस दिन व्रत रखते हैं तो विष्णु-महेश दोनों की ही कृपा आपको प्राप्त होती है। इसके साथ ही चंद्र दोष से भी आप मुक्त होते हैं और जीवन में धन-धान्य की प्राप्ति आप करते हैं।
रक्षाबंधन के दिन कई महिलाएं लड्डू गोपाल को भाई मानते हुए राखी बांधती हैं। हालांकि, आपको यह बात पता होनी चाहिए कि अगर आप लड्डू गोपाल को राखी बांधने वाली हैं तो भाई से पहले आपको लड्डू गोपाल को ही राखी बांधनी चाहिए। लड्डू गोपाल को राखी बांधने से पहले आपको पूजा स्थल पर दीपक अवश्य जलाना चाहिए और बिना स्नान किए राखी नहीं बांधनी चाहिए।
वास्तु के अनुसार, राखी बंधवाते समय भाई का मुख दक्षिण या फिर पश्चिम दिशा की ओर होना चाहिए। वहीं बहन का मुख पूर्व या उत्तर-पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए। वास्तु के अनुसार दिशाओं का ध्यान रखकर अगर आप राखी बांधते हैं तो भाई-बहन का रिश्ता मजबूत होता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रक्षाबंधन के दिन बहन को राखी बांधने के लिए अपने भाई के घर पर जाना चाहिए। खासकर शादीशुदा बहन के लिए यह नियम अधिक महत्वपूर्ण है। हालांकि वर्तमान समय में कुछ विपरीत परिस्थितियों में भाई भी बहन के घर राखी बंधवाने चले जाते हैं लेकिन इसे शास्त्रों के अनुसार सही नहीं माना जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चांदी शुद्धता और सौभाग्य का प्रतीक है। इसलिए चांदी की राखी कई बहनें अपने भाई की कलाई पर बांधती हैं। चांदी की राखी बांधने से भाई-बहन के बीच प्रेम बढ़ता है। साथ ही भाई को चांदी की राखी भाई को पहनाने से भाई चंद्रमा भी मजबूत होता है। इसलिए चांदी की राखी को हिंदू मान्यताओं में बेहद शुभ माना जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बहन को अनामिका उंगली यानि रिंग फिंगर से भाई को तिलक लगाना चाहिए। इस उंगली का संबंध आज्ञा चक्र और सूर्य ग्रह से है। इसलिए अनामिका उंगली से तिलक करने पर भाई बहन दोनों के ही जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
राखी की थाली में चंदन, राखी, अक्षत, नारियल, मिठाई, दीपक और कलश जरूर होना चाहिए। इस थाली को सबसे पहले भगवान को अर्पित करना चाहिए।
राखी बांधने से पहले कुछ भी खाने से मना किया जाता है। लेकिन अगर राखी बांधने में देरी हो रही है तो आप फलाहार ले सकते हैं।
कुछ ज्योतिषाचार्यों अनुसार रक्षाबंधन के दिन राहु काल के समय भी राखी बांधी जा सकती है लेकिन कुछ ज्योतिषी इस समय पर राखी बांधने को मना करते हैं। अगर आपके साथ समय की दिक्कत नहीं है तो बेहतर है कि आप राहुकाल के समय में राखी बांधने या बंधवाने से बचें।
रक्षाबंधन के दिन सबसे पहले भगवान गणेश को राखी चढ़ानी चाहिए। इसके बाद आप हनुमान जी, शिव जी, या श्री कृष्ण जैसे देवताओं को भी राखी अर्पित कर सकते हैं। कुछ लोग इस दिन श्रवण कुमार को भी राखी बांधते हैं।
वैसे तो रक्षाबंधन पर राखी बांधने का मुहूर्त सुबह 5 बजकर 47 मिनट से शुरू लेकर दोपहर 1 बजकर 24 मिनट तक है। लेकिन बीच में राहुकाल लगने के कारण कुछ देर के लिए राखी बांधने पर रोक लग जाएगी। इस दिन राहुकाल सुबह 09:07 से 10:47 बजे तक रहेगा। ऐसे में बहनें राहुकाल से पहले और बाद में राखी बांध सकेंगी।
रक्षाबंधन के दिन श्रावण पूर्णिमा, नारली पूर्णिमा, संस्कृत दिवस और गायत्री जयंती मनाई जाती है। इसके अलावा इस दिन कई जगहों पर सोना पूजन भी किया जाता है।
इस साल रक्षाबंधन के दिन भद्रा तो नहीं रहेगी लेकिन राहुकाल जरूर रहेगा। शास्त्रों अनुसार राहुकाल के समय कोई भी शुभ काम नहीं करने चाहिए इसलिए बहनों को सुझाव है कि सुबह 09:07 से 10:47 तक के समय में भाइयों को राखी न बांधें।
राखी भाई के दाहिने हाथ में बांधनी चाहिए क्योंकि इसे कर्मों का हाथ माना जाता है। इस हाथ में राखी बांधने से भाई को सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
खास बात ये है कि इस साल रक्षाबंधन पर राहुकाल नहीं रहेगा ऐसे में बहनें सुबह से लेकर दोपहर तक आराम से राखी बांध सकती हैं।
भाई को राखी बांधते समय ये मंत्र जरूर बोलना चाहिए - ॐ येन बद्धो बलि राजा दानवेन्द्रो महाबलः। तेन त्वामपि बध्नामि रक्षे मा चल मा चल।।
जनश्रुति के अनुसार रानी कर्णावती ने अपने राज्य पर हो रहे आक्रमण से रक्षा के लिए मुगल सम्राट हुमायूं को राखी भेज कर मदद की गुहार लगाई थी, जिसके बाद हुमायूं ने कर्णावती की मदद करने का फैसला किया था। कहते हैं तभी से इस त्योहार का महत्व ओर भी ज्यादा बढ़ गया था।
रक्षाबंधन पर राखी बांधने का सही समय 9 अगस्त की सुबह 5 बजकर 47 मिनट से शुरू होकर दोपहर 1 बजकर 24 मिनट तक रहेगा।
इस साल रक्षाबंधन के दिन एक ऐसा अद्भुत संयोग बनने जा रहा है जो 297 साल पहले बना था। वैदिक ज्योतिष में इस योग को अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन सूर्य कर्क राशि में, गुरु और शुक्र मिथुन में, राहु कुंभ और केतु सिंह में रहेगा। बताया जा रहा है ग्रहों की ऐसी स्थिति राखी पर कई सालों पहले बनी थी। जानिए इस संयोग से किन राशि वालों को जमकर लाभ होने वाला है।
रक्षाबंधन की पौराणिक कथा अनुसार द्रौपदी ने एक बार भगवान कृष्ण की चोट को ठीक करने के लिए उनकी कलाई पर अपनी पोशाक से एक कपड़ा फाड़ कर बांध दिया था। भगवान श्री कृष्णा इस बात से इतनी ज्यादा खुश और प्रभावित हुए कि उन्होंने द्रौपदी को अपनी बहन बना लिया और उनकी रक्षा करने की जिम्मेदारी ली। कहते हैं तभी से ये त्योहार मनाया जाने लगा।
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