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Saphala Ekadashi 2025: सफला एकादशी कब मनाई जाएगी? नोट कर लें सही तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

Saphala Ekadashi 2025: सफला एकादशी 15 दिसंबर 2025 को उदय तिथि के अनुसार मनाई जाएगी और इससे व्रती को अत्यंत शुभ फल प्राप्त होने का योग है। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा करने से सफलता, सुख और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

Written By: Arti Azad @Azadkeekalamse
Published : Dec 11, 2025 01:51 pm IST, Updated : Dec 11, 2025 01:51 pm IST
Saphala Ekadashi 2025 Date- India TV Hindi
Image Source : PEXELS सफला एकादशी 2025 कब है?

Saphala Ekadashi 2025 Date, Shubh Muhurat: हिंदू धर्म में हर महीने आने वाली एकादशी तिथियों का विशेष महत्व होता है। इन्हें भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने का सर्वोत्तम दिन माना गया है। इन्हीं में से एक सफला एकादशी को बहुत पुण्यदायिनी मानी जाती है। मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से जीवन में सफलता, शांति और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। इस साल यह एकादशी खास दुर्लभ योग में पड़ रही है, जो इसके महत्व को और बढ़ा देता है।

सफला एकादशी कब मनाई जाएगी?

हिंदू पंचांग के अनुसार, पौष माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को सफला एकादशी कहा जाता है। इस साल एकादशी तिथि की शुरुआत 14 दिसंबर 2025 को शाम 6:50 बजे होगी और इसका समापन 15 दिसंबर 2025 को रात 9:21 बजे होगा। उदया तिथि के अनुसार यह व्रत 15 दिसंबर, सोमवार को रखा जाएगा। 

सफला एकादशी का धार्मिक महत्व

शास्त्रों में कहा गया है कि सफला एकादशी व्रत के प्रभाव से व्यक्ति को जीवन के हर क्षेत्र में सफलता मिलती है। इस दिन किया गया व्रत पांच हजार वर्षों तक किए गए तप के समान फल प्रदान करता है। भगवान विष्णु की कृपा से मनुष्य के पाप नष्ट होते हैं और मोक्ष की प्राप्ति के मार्ग प्रशस्त होते हैं। 

सफला एकादशी पूजा-व्रत कैसे करें?

  1. सफला एकादशी के दिन व्रती को ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान कर लेना चाहिए। 
  2. घर और मंदिर की साफ-सफाई करने के बाद स्वच्छ पीले या सफेद वस्त्र पहनें और पूजा का संकल्प लें। 
  3. पूजा घर में चौकी पर लाल या पीला वस्त्र बिछाकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की मूर्ति स्थापित करें। 
  4. गंगाजल का छिड़काव करने के बाद देसी घी का दीप जलाएं और तुलसी दल, फूल, माला और भोग अर्पित करें। 
  5. विष्णु सहस्रनाम, कनक स्तोत्र और व्रत कथा का पाठ करने से व्रती को अत्यधिक फल प्राप्त होता है। 
  6. शाम के समय भी पुनः आरती और पूजा आवश्यक मानी गई है। अंत में तुलसी की पूजा कर दान करने से व्रत पूर्ण होता है।

सफला एकादशी का महत्व और लाभ

कहते हैं कि सफला एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति के सभी कार्य सफल होने लगते हैं। इस दिन विधि-विधान से पूजा करने पर सुख, समृद्धि और शांति की प्राप्ति होती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, जो व्यक्ति इस व्रत को श्रद्धा से करता है, उसे जीवन में हर क्षेत्र में उन्नति और शुभ फल मिलता है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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