Cumin Seeds Forbidden in Agahan Maas: सनातन धर्म में हर महीने के हिसाब से खान पान और जीवन यापन के नियम बताए गए हैं। कहते हैं कि अगर इनका अच्छी तरह से पान किया जाए, तो व्यक्ति को खराब से खराब मौसम में भी सेहत से जुड़ी परेशानियां नहीं होती है और डॉक्टर के पास भागना नहीं पड़ता है। आज हम जानेंगे कि अगहन के महीने में जीरे का उपयोग क्यों नहीं करना चाहिए। हिंदू पंचांग के अनुसार, मार्गशीर्ष माह या अगहन मास भगवान श्रीकृष्ण का प्रिय महीना है।
अगहन में पूजा, व्रत और सात्विक आहार का विशेष महत्व होता है। शास्त्रों में कहा गया है कि इस अवधि में व्यक्ति को अपने खान पान और पवित्रता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। आयुर्वेद और पुराणों में बताया गया है कि इस महीने जीरा नहीं खाना चाहिए। आइए जानते हैं कि आखिर अगहन मास में जीरे का सेवन क्यों वर्जित माना गया है।
शास्त्रों में जीरे के सेवन पर निषेध
धर्म ग्रंथों और पुराणों के अनुसार, अगहन मास में जीरा खाने से शरीर की पाचन शक्ति (अग्नि) अत्यधिक सक्रिय हो जाती है। यह महीना शीत ऋतु का होता है, इसलिए गर्म तासीर वाले पदार्थों का सेवन शरीर के संतुलन को बिगाड़ सकता है। यही कारण है कि इस मास में सात्विक, हल्का और संयमित आहार अपनाने की सलाह दी गई है।
धार्मिक मान्यता: जीरा घटाता है लक्ष्मी-कृपा
लोक मान्यता के अनुसार, अगहन मास में जीरा खाने से लक्ष्मी-कृपा कम हो जाती है। श्रीहरि विष्णु को सात्विक आहार प्रिय है, जबकि जीरा तामसिक और उष्ण गुण वाला माना जाता है। यही वजह है कि कई पारंपरिक परिवारों में इस मास में जीरे का प्रयोग रोक दिया जाता है और उसके स्थान पर हींग या काली मिर्च का उपयोग किया जाता है।
आयुर्वेदिक कारण: बढ़ाता है पित्त और असंतुलन
आयुर्वेद के अनुसार, जीरा शरीर में पित्त दोष और उष्णता बढ़ाता है। चूंकि अगहन मास में पित्त पहले से ही सक्रिय रहता है, ऐसे में जीरे का सेवन सिरदर्द, त्वचा रोग या पाचन गड़बड़ी का कारण बन सकता है। यह न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक असंतुलन भी पैदा करता है, जिससे ध्यान और नींद प्रभावित होती है।
अगहन में जीरा सेहत के लिए हानिकारक
अगहन मास में जीरा न खाने की परंपरा केवल धार्मिक नहीं, बल्कि स्वास्थ्य की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। यह महीना तप, संयम और भक्ति का प्रतीक है। इसलिए इस दौरान सात्विक आहार अपनाकर शरीर और मन दोनों को संतुलित रखना सबसे शुभ माना गया है।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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