अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ने ब्याज दर में कटौती तो की, लेकिन साथ ही साफ संकेत दे दिया कि आगे दरें घटाना आसान नहीं होगा। यह फैसला निवेशकों और बाजारों के लिए मिला-जुला संदेश लेकर आया है।
फेड के चेयरमैन जेरोम पॉवेल ने कहा कि कमिटी की चर्चाओं में दिसंबर को लेकर विचारों में काफी मतभेद थे। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि फेड के भीतर कम से कम एक और चक्र इंतजार करने की राय अब तेजी से बढ़ रही है।
अमेरिकी केंद्रीय बैंक, फेडरल रिजर्व (फेड) की बुधवार को मीटिंग है जिसमें ब्याज दर पर नई घोषणाएं हो सकती हैं, जिसका असर आने वाले दिनों में भारत सहित दुनियाभर में भी देखने को मिल सकता है।
फेड रिजर्व ने कहा कि जॉब मार्केट मजबूत है। बेरोजगारी दर हाल के महीने में निचले स्तर पर स्थिर हो गई है। फिर भी पिछले महीने भर्ती में तेजी आई और बेरोजगारी दर थोड़ी कम होकर 4.1% पर आ गई।
बाजार में भारी उथल-पुथल के बीच एफडी में निवेश करने को इच्छुक हैं तो इस प्राइवेट बैंक की आकर्षक दरों को गौर करते हुए निवेश की योजना बना सकते हैं। आपको हर तरह की अवधि के लिए निवेश के विकल्प मिल सकते हैं।
आर्थिक मामलों के सचिव ने कहा कि हमें यह देखना होगा कि (अमेरिकी ब्याज दरों का) स्तर कहां है। हमें यह देखना होगा कि अन्य अर्थव्यवस्थाओं के बाजार कैसे व्यवहार करते हैं।
भारतीय बाजारों के लिए, सबसे अनुकूल अवधि जुलाई 1990 से फरवरी 1994 तक फेड की ब्याज दर में कटौती का चक्र था। इस दौरान निफ्टी में 310 प्रतिशत की जबरदस्त उछाल देखी गई थी।
अमेरिका के सेंट्रल बैंक फेडरल रिजर्व ने बुधवार को एक बड़ा फैसला लेते हुए ब्याज दरों में 50 बेसिस पॉइंट्स की कटौती का ऐलान किया है। बताते चलें कि फेडरल रिजर्व ने 4 साल में पहली बार ब्याज दरों में ये कटौती की है।
आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास की अध्यक्षता वाली मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) 7 से 9 अक्टूबर को होने वाली अगली मीटिंग रेपो रेट पर फैसला करेगी। अगस्त में खुदरा महंगाई 0.11 प्रतिशत बढ़कर 3.65 प्रतिशत हो गई, जो जुलाई में 3.54 प्रतिशत थी।
फेड के अध्यक्ष जेरोम पॉवेल ने कहा है कि वह फेड द्वारा अपनी प्रमुख ब्याज दर में कटौती शुरू करने से पहले मुद्रास्फीति में कमी के अतिरिक्त सबूत तलाश रहे हैं। जुलाई में डेयरी और फलों और सब्जियों की कीमतों में गिरावट आई।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि भारतीय रिजर्व बैंक इस बार भी रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं करेगा क्योंकि महंगाई दर अभी भी उच्चस्तर पर बनी हुई है।
एसएंडपी 500 और नैस्डैक ने बुधवार को लगातार तीसरे दिन रिकॉर्ड ऊंचाई दर्ज की, क्योंकि मुद्रास्फीति के आंकड़े अपेक्षा से कम आए, लेकिन फेडरल रिजर्व द्वारा इस साल सिर्फ एक बार ब्याज दर में कटौती के संकेत के चलते सूचकांक दिन के उच्चतम स्तर से नीचे बंद हुए।
21 मार्च को सिंगापुर में सुबह 9:40 बजे तक हाजिर सोना 0.7% बढ़कर 2,201.94 डॉलर प्रति औंस हो गया।
US FED Hikes Rate: अमेरिका में बढ़ती महंगाई पर लगाम लगाने के लिए फेड ने एक बार फिर से ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर दी है। अनुमान है कि आगे भी यह जारी रह सकती है।
फेडरल रिजर्व ने प्रमुख ब्याज दर को 5-5.25 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखा है। अमेरिकी केंद्रीय बैंक को अब साल के अंत तक दो 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी की उम्मीद है।
Fed Rate Hike: एक बार फिर अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने बुधवार को Fed रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी कर है। यह भारतीय शेयर बाजार को भी प्रभावित करेगी।
विदेशी ब्रोकरेज क्रेडिट सुइस ने एक रिपोर्ट में कहा है कि उभरती अर्थव्यवस्थाओं में कमजोर बाहरी मांग और डॉलर की मजबूती से विकास पर असर पड़ेगा।
भारत में जैसे केंद्रीय बैंक 'रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया है(Reserve Bank Of India)' वैसे ही अमेरिका के केंद्रीय बैंक का नाम फेडरल रिजर्व(Federal Reserve) है। अमेरिका इस समय महगांई की मार झेल रहा है। वहां खुदरा महंगाई 42 साल के शीर्ष स्तर पर जा चुकी है।
आरबीआई की रेपो रेट में बढ़ोतरी की घोषणा के बाद कोटक महिंद्रा बैंक और फेडरल बैंक ने अपने बचत खाते की ब्याज दरों में इजाफा किया है।
केंद्रीय बैंक के ब्याज दर में बढ़ोतरी के फैसले का अमेरिकी बाजार ने स्वागत किया है। डाउ जोंस 900 अंक चढ़ गया। इसके साथ ही एसएंडपी 500, नैस्डैक, हैंगसैंग, कोस्पी समेत दुनिया भर कई बाजारों में बड़ी तेजी देखने को मिली है।
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