सितंबर तिमाही के आंकड़े दर्शाते हैं कि मांग में आंशिक गिरावट के बावजूद बाजार में भरोसा बना हुआ है, खासकर लग्जरी और प्रीमियम हाउसिंग में। इन्वेस्टर्स और डेवलपर्स, दोनों के लिए यह संकेत है कि क्वालिटी, लोकेशन और ब्रांड वैल्यू आज भी ग्राहक का भरोसा जीतने में अहम भूमिका निभा रही हैं।
प्रॉपटाइगर का कहना है कि बिक्री और नए ऑफर दोनों में सालाना आधार पर गिरावट बढ़ती कीमतों के प्रति बाजार की प्रतिक्रिया को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि हम बाजार गतिविधि में एक स्वस्थ मंदी देख रहे हैं, जो एंड यूजर के लिए फायदेमंद है क्योंकि यह स्थायी ग्रोथ लाता है।
प्रॉपइक्विटी ने अनुमान लगाया गया है कि भारत में जुलाई-सितंबर में नौ प्रमुख शहरों में बिक्री 18 प्रतिशत घटकर 1,04,393 यूनिट रह गई। क्रेडाई के पूर्व अध्यक्ष इरफान रजाक ने कहा कि मांग तो है, लेकिन पेशकश नहीं है।
तिमाही-दर-तिमाही आंकड़ों के हिसाब से अहमदाबाद में घरों की बिक्री अप्रैल-जून में 26 प्रतिशत घटकर 9,500 यूनिट रह गई। हालांकि दिल्ली-एनसीआर में बिक्री 10 प्रतिशत बढ़कर 10,058 यूनिट से 11,065 यूनिट हो गई।
सालाना आधार पर, दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर), मुंबई महानगर क्षेत्र (एमएमआर), बेंगलुरु, पुणे, हैदराबाद में बिक्री में बढ़ोतरी देखी गई है, जबकि चेन्नई और कोलकाता में मांग में गिरावट आई।
India Housing Sales: एक तरफ भारत में महंगाई बढ़ रही है। इसे कम करने के लिए सरकार से लेकर RBI के तरफ से नए कदम उठाए जा रहे हैं। इसी बीच आवास बिक्री को लेकर एक नया आंकड़ा सामने आया है, जो महंगाई के सभी दावों को गलत साबित करता हुआ दिखता है।
रियल स्टेट शोध एवं विश्लेषण कंपनी प्रॉपइक्विटी के अनुसार घरों की मांग कम रहने की वजह से डेवलपर्स दाम घटा कर अपने गैर बिके मकानों की बिक्री बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं।
शहरी क्षेत्र में घरों की मांग 2020 तक 41.56 लाख यूनिट की होगी, इसके विपरीत निजी डेवलपर्स केवल 10.23 लाख यूनिट की ही आपूर्ति कर पाने में सक्षम होंगे।
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