पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले में 26 निर्दोष लोगों की मौत हो गई थी। इस हमले के बाद से भारतीय सेना और सरकार दोनों ही एक्शन मोड में हैं। इस बीच पाकिस्तान को युद्ध को डर सता रहा है। ऐसे में पाकिस्तान के अनुरोध पर UNSC की बैठक बुलाई गई।
सिर्फ पाकिस्तान को ही नहीं, बल्कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को भी पहलगाम पर भारत द्वारा बड़ा बदला लिए जाने का यकीन है। इसलिए दोनों देशों के बीच तनाव कम करने को लेकर यूएनएससी ने पहल शूरू कर दी है।
Pahalgam Terror Attack: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् की ओर से एक प्रेस बयान जारी किया गया है। इसमें कहा गया, 'सुरक्षा परिषद के सदस्य 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर में हुए आतंकी हमले की सबसे कड़े शब्दों में निंदा करते हैं, जिसमें कम से कम 26 लोग मारे गए और कई घायल हुए।'
भारत ने संयुक्त राष्ट्र में धर्म और आस्था को आधार बनाने वालों की कड़ी निंदा की है। भारत ने कहा कि यह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थाई सुधारों को रोकने का प्रयास है।
स्लोवाकिया के राष्ट्रपति ने यूएनएससी में भारत की स्थाई सदस्यता का समर्थन किया। राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी ने कहा कि हम भारत का पूर्ण समर्थन करते हैं।
भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अपना रुख साफ करते हुए कहा है कि शांति स्थापना का कार्य बहुत ही चुनौतीपूर्ण है। शांतिसैनिकों को सशस्त्र समूहों, आतंकवादियों और अंतरराष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्कों से जूझना पड़ रहा है।
दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग में चल रहे विदेश मंत्रियों के जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान विश्व प्रतिनधियों ने सुरक्षा परिषद समेत संयुक्त राष्ट्र में तत्काल सुधार की मांग की है। इसके साथ ही युद्ध ग्रस्त देशों में शांति बहाल करने पर चर्चा की।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थाई सदस्यता में वृद्धि नहीं करने के मामले पर भारत ने फिर इसके सदस्यों को फटकार लगाई है। भारत ने विशेषकर चीन को उसका नाम लिए बिना जमकर धोया है।
भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कहा कि वह पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद का शिकार रहा है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पर्वतनेनी हरीश ने पाकिस्तान को आतंकवाद का वैश्विक केंद्र बताया है।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के अस्थायी सदस्य के तौर पर पाकिस्तान का दो वर्ष का कार्यकाल एक जनवरी को शुरू हो गया है।
भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ठोस सुधार की कड़ी वकालत की है। भारत का कहना है कि बार-बार स्थाई सदस्यता में सुधार की मांग उठाए जाने के बावजूद परिषद की ओर से 1965 से अब तक टाल-मटोल होता आ रहा है।
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में सुधार पर जोर दिया। इसके साथ ही देशों की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता के सम्मान होने का मुद्दा उठाया।
सोशल मीडिया पर इन दिनों एक पोस्ट काफी तेजी से वायरल हो रही है। इस पोस्ट में दावा किया जा रहा है कि भारत वीटो पावर के साथ यूएनएससी का स्थायी सदस्य बन गया है। आइये जानते हैं वायरल हो रही इस पोस्ट के दावे का का पूरा सच क्या है?
भारत के पड़ोसी देश भूटान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में जमकर हिंदुस्तान की तारीफ की है। भूटान के पीएम शेरिंग तोबगे ने भारत को आर्थिक महाशक्ति और ग्लोबल साउथ की आवाज बताते हुए यूएनएससी में स्थाई सदस्यता का प्रबल हकदार बताया है।
भारत, सुरक्षा परिषद में सुधार के लिए वर्षों से किए जा रहे प्रयासों में अग्रणी रहा है तथा उसका कहना है कि 1945 में स्थापित 15 देशों की परिषद 21वीं सदी के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए उपयुक्त नहीं है। उसका मानना है कि यह समकालीन भू-राजनीतिक वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित नहीं करती।
अमेरिका ने भारत को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का स्थाई सदस्य बनाए जाने और यूएनएससी में सुधार का समर्थन किया है। बाइडेन ने पीएम मोदी से यह बात साझा की। इसके साथ ही उन्होंने शांति के लिए पीएम मोदी की रूस और यूक्रेन यात्रा की भी सराहना की।
संयुक्त राष्ट्र महासभा की न्यूयॉर्क में होने वाली बैठक से पहले अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार प्रस्ताव को पेश करके यह साफ कर दिया है कि इस महासम्मेलन में बहस का सबसे बड़ा मुद्दा भारत जैसे देशों को स्थाई सदस्यता देने का ही रहने वाला है। अमेरिका ने भारत का समर्थन किया है।
इजराइल और हमास के बीच जंग रोकने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। अब जंग कब और कैसे खत्म होगी यह हमास के रुख पर निर्भर करता है।
भारत को लंबे समय से यूएनएससी में स्थाई सदस्यता की दरकार है। मगर चीन हर बार रोड़े अटकाता रहा है। लिहाजा भारत समेत कई देशों ने अब यूएनएससी पर सुधार का दबाव बनाया है। भारत ने मजबूती से स्थाई सदस्यता के लिए अपनी दावेदारी पेश की है।
’ भारत ने इस बात पर जोर दिया कि आमसभा में जो विचार-विमर्श हो, वह समावेशी होना चाहिए और हर सदस्य देश को समान रूप से भागीदारी की अनुमति हो। माथुर ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र महासभा के एजेंडे को इस तरह बनाया जाना चाहिए कि इसमें होने वाली चर्चा और अधिक सूचना युक्त तथा प्रभावी हो।
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